पारंपरिक खेती छोड़ मत्स्य पालन से मालामाल हो रहे सिद्धार्थनगर के किसान, पंगेसियस बना कमाई का जरिया
सिद्धार्थनगर में मत्स्य पालन एक बड़े कारोबार के रूप में उभर रहा है, जहाँ 3200 हेक्टेयर में 1.25 लाख मीट्रिक ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, शोहरतगढ़, (सिद्धार्थनगर)। जलाशयों में पलती मछलियां सिद्धार्थनगर की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही हैं। मत्स्य पालन अब यहां केवल परंपरागत आजीविका का साधन नहीं, बल्कि बड़े कारोबार और रोजगार का आधार बन रहा है। जिले में करीब 3200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में व्यावसायिक मत्स्य पालन किया जा रहा है। ग्रामसभा के तालाबों, नालों और नदियों से होने वाले उत्पादन को मिलाकर कुल मछली उत्पादन लगभग 1.25 लाख मीट्रिक टन बताया जा रहा है। इसमें पंगेसियस प्रजाति की हिस्सेदारी करीब 85 हजार मीट्रिक टन है। हालांकि, प्रदेश के पंगेसियस मत्स्य पालन क्लस्टर के अग्रणी जिले के रूप में पहचान मिलने के बावजूद बजट आवंटन का इंतजार है।
बढ़नी ब्लाक के अकरहरा गांव में करीब 70 एकड़ और शोहरतगढ़ ब्लाक के परिगवा गांव में लगभग 30 एकड़ क्षेत्रफल में मछली पालन हो रहा है। इन गांवों में मत्स्य पालन ने व्यावसायिक स्वरूप हासिल कर लिया है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं और सैकड़ों लोगों की आजीविका जुड़ी है। तालाबों में पानी, तापमान और आक्सीजन का संतुलन बनाए रखते हुए पालीकल्चर पद्धति अपनाई जा रही है।
मत्स्य पालक वकार खान के अनुसार, जिले में हर वर्ष मछली उत्पादन बढ़ रहा है। यहां से गोरखपुर से लेकर बहराइच तक मछलियों की आपूर्ति की जाती है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत पंगेसियस मत्स्य पालन क्लस्टर विकसित होने से उत्पादन और कारोबार को नई गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि, क्लस्टर की प्रक्रिया अभी कागजी चरण में है और बजट आवंटित नहीं हुआ है।
स्थानीय उत्पादन से खाद्य सुरक्षा पर जोर
मत्स्य पालकों का दावा है कि स्थानीय स्तर पर उत्पादित मछलियों में करीब 98 प्रतिशत मानव उपभोग के लिए सुरक्षित हैं। उनका कहना है कि बाहर से आने वाली कुछ मछलियों के संरक्षण और परिवहन में पामोलिन तेल जैसे पदार्थों के इस्तेमाल की आशंका है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि और वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी हैं। खाद्य सुरक्षा के लिहाज से ऐसी आशंकाओं की जांच आवश्यक है।
मधवापुर मंडी से बढ़ेगी बाजार की पहुंच
बढ़नी ब्लाक के मधवापुर में मछली मंडी का निर्माण कराया जा रहा है। इसके संचालन से भंडारण, बिक्री और परिवहन की सुविधाएं बेहतर होने की उम्मीद है। मंडी और क्लस्टर को बजट मिलने से मत्स्य पालकों को बाजार तक पहुंच आसान हो सकती है। इससे निवेश, रोजगार और उत्पादन विस्तार की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। जिले में मत्स्य पालन की बढ़ती क्षमता को देखते हुए अब कारोबारियों की निगाहें क्लस्टर के बजट और मंडी के संचालन पर टिकी हैं।