सीतापुर में 27 कब्जाधारकों को डीएम कोर्ट का नोटिस, पूर्व सपा विधायक अनूप गुप्ता भी शामिल
सीतापुर की शिवपुरी कॉलोनी में 25 बीघा जमीन पर बने मकानों के कब्जाधारकों को डीएम कोर्ट ने सार्वजनिक नोटिस जारी किया है। इसमें सपा के पूर्व विधायक अनूप ...और पढ़ें

27 कब्जाधारकों को डीएम कोर्ट का नोटिस।

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जागरण संवाददाता, सीतापुर। शिवपुरी कॉलोनी (पूर्व कंटोनमेंट एरिया) में 25 बीघा भूमि पर बने मकानों, निर्माणाधीन भवनों और प्लाटों के कब्जाधारकों को जिलाधिकारी न्यायालय की ओर से जारी बुधवार को सार्वजनिक नोटिस चस्पा की गई। ॉ
इसमें सपा के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक अनूप गुप्ता समेत 27 लोग शामिल हैं। नोटिस के माध्यम से संबंधित सभी भू-स्वामियों को 24 जुलाई तक जिलाधिकारी न्यायालय में उपस्थित होकर अपने स्वामित्व से संबंधित अभिलेख और साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे पहले प्लाईवुड फैक्ट्री की 47 बीघा जमीन मुक्त कराई जा चुकी है। अभिलेख खंगालने के दौरान यह जमीन भी प्लाईवुड फैक्ट्री की होने की बात सामने आई है। प्रशासन की ओर से की गई इस कार्रवाई से कालोनी के लोगों में हलचल मच गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए। कार्रवाई को लेकर शहर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
छावनी गोरा बारीक में दर्ज है भूमि
नोटिस में उल्लेख किया गया है कि संबंधित लगभग 25 बीघा भूमि राजस्व अभिलेखों में ग्राम छावनी गोरा बारीक (पूर्व कंटोनमेंट क्षेत्र) के नाम दर्ज है।
इसी भूमि पर वर्तमान में लगभग 27 मकान बने हुए हैं, जबकि कुछ भूखंड अभी खाली या निर्माणाधीन हैं। जिलाधिकारी न्यायालय ने सभी संबंधित व्यक्तियों को 24 जुलाई तक अपना पक्ष रखने तथा भूमि के स्वामित्व संबंधी अभिलेख प्रस्तुत करने का अवसर दिया है।
सपा नेता बोले सभी दस्तावेज वैध
सपा के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक अनूप गुप्त ने प्रशासनिक कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पास संबंधित भूमि की रजिस्ट्री है। इसके बाद दाखिल-खारिज की प्रक्रिया भी पूरी हुई।
उन्होंने बताया कि करीब तीन वर्ष पहले सक्षम प्राधिकारी से भवन निर्माण का नक्शा स्वीकृत होने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू कराया गया। उनका कहना है कि उनके सभी दस्तावेज पूरी तरह वैध हैं और वह निर्धारित तिथि से पहले ही जिलाधिकारी न्यायालय में अपना जवाब दाखिल कर देंगे।
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करीब 30 वर्ष पहले बसी थी कॉलोनी
शिवपुरी कालोनी शहर की प्रमुख आवासीय कालोनियों में गिनी जाती है। लगभग 30 वर्ष पहले विकसित हुई इस कालोनी में बैंक अधिकारियों, सरकारी विभागों के सेवारत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों सहित कई प्रतिष्ठित परिवारों ने मकान बनाए हैं।
चौड़ी सड़कें, बेहतर मूलभूत सुविधाओं के कारण यह शहर की पाश कालोनियों में शुमार है। ऐसे में प्रशासन की कार्रवाई ने यहां रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
जिलाधिकारी न्यायालय के आदेश पर सार्वजनिक नोटिस के माध्यम से सभी संबंधित कब्जाधारकों को 24 जुलाई तक न्यायालय में अपने स्वामित्व संबंधी अभिलेख और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति नोटिस के बावजूद अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं करता है, तो यह माना जाएगा कि उसे नोटिस के संबंध में कोई आपत्ति या दावा नहीं है। -डॉ. जनार्दन, उप जिलाधिकारी, सदर।