सोनभद्र में बाणसागर डैम से डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद प्रशासन सतर्क
बाणसागर डैम से डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद सोनभद्र प्रशासन सतर्क हो गया है। सोन नदी में ...और पढ़ें
HighLights
बाणसागर डैम से डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
रिहन्द और ओबरा बांधों से पानी की निकासी बढ़ी।
सोन नदी के किनारे क्षेत्रों में निगरानी तेज हुई।
जागरण संवाददाता, ओबरा (सोनभद्र)। मध्य प्रदेश स्थित बाणसागर डैम से बुधवार रात आठ गेट खोलकर करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद सोन नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने रिहन्द और ओबरा बांधों से पानी की निकासी बढ़ा दी है। रिहन्द बांध के सात फाटक खोले जाने के बाद ओबरा बांध का जलस्तर भी तेजी से बढ़ने लगा।
इसके मद्देनजर ओबरा बांध प्रशासन ने पानी की निकासी के लिए खुले फाटकों की संख्या पांच से बढ़ाकर छह कर दी है। वर्तमान में ओबरा बांध से करीब 84100 क्यूसेक पानी रेणुका नदी में छोड़ा जा रहा है। वहीं ओबरा जल विद्युत परियोजना की इकाइयों से भी करीब 16200 क्यूसेक पानी नदी में प्रवाहित किया जा रहा है।
बांध और जल विद्युत परियोजना से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण रेणुका और सोन नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। इससे नदी किनारे के क्षेत्रों में संभावित खतरे को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। ओबरा बांध प्रखंड के अधिशासी अभियंता रुपेश कुमार खरे ने बताया कि बुधवार रात बाणसागर डैम से करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
इसके चलते सोन नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि होने की संभावना है। संभावित स्थिति को देखते हुए रिहन्द और ओबरा बांधों के फाटकों की संख्या बढ़ाकर अतिरिक्त पानी की निकासी की जा रही है। उन्होंने बताया कि बाणसागर से छोड़ा गया पानी गुरुवार देर रात तक सोन नदी के माध्यम से जनपद में पहुंचने की पूरी संभावना है।
इससे पहले रिहन्द और ओबरा बांधों से पर्याप्त मात्रा में पानी की निकासी कर जलाशयों में अतिरिक्त जल के लिए जगह बनाई जा रही है। बाणसागर का पानी पहुंचने के बाद परिस्थितियों के अनुसार दोनों बांधों के फाटकों की संख्या घटाकर नदी के जलस्तर को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाएगा।
बाणसागर से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद सोन नदी के किनारे बसे क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन की ओर से जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
