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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 24, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    हर वक्त में खुशी खोजने की डालें आदत

    By JagranEdited By:
    Updated: Wed, 24 Oct 2018 09:24 PM (IST)

    जीवन का कोई भी लक्ष्य हो, सभी का सार खुशी ही है। लिहाजा खुश रहना ही जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है। वैज्ञानिक तौर पर भी साबित हो चुका है कि खुश रहने के दौ ...और पढ़ें

    हर वक्त में खुशी खोजने की डालें आदत
    हर वक्त में खुशी खोजने की डालें आदत

    जांस,सोनभद्र :जीवन का कोई भी लक्ष्य हो, सभी का सार खुशी ही है। लिहाजा खुश रहना ही जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है। वैज्ञानिक तौर पर भी साबित हो चुका है कि खुश रहने के दौरान मस्तिष्क से निकलने वाला हार्मोन्स शरीर को बड़ी ऊर्जा देता है। इससे शरीर की आयु भी बढ़ जाती है। इसलिए जीवन का हर दिन और हर समय लक्ष्य प्राप्ति का है। चाहे पढ़ाई हो या कोई अन्य कार्य, सभी में खुशियां खोजनी चाहिए। आज के तेज रफ्तार परिवेश में हम एक काल्पनिक दुनिया के पीछे भाग रहे हैं, जहां खुशियां भी काल्पनिक ही है जबकि आभासी दुनिया से बाहर निकलकर जब हम वास्तविक दुनिया में अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभाएंगे तो खुशियां हमारे आसपास सदैव दस्तक देंगी।

    -भैरो ¨सह, प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय आकाशपानी, ओबरा। कुदरती है खुश रहना

    खुश रहना हर इंसान की कुदरती इच्छा होती है। वह जीवनपर्यंत खुश रहने के उपाय भी खोजता है। हर किसी की खुशी भी अलग-अलग होती है। किसी व्यवसायी के लिए अच्छा मुनाफा उसके खुश रहने की वजह है तो वहीं छात्र के लिए परीक्षा में अव्वल दर्जे से पास होना। ईश्वर ने हमारी खुशियों के लिए हर वह चीज बनाई है, जिसे पाकर इंसान खुश रह सके। अगर हमारी खुशी की सबसे ज्यादा किसी को ¨चता है तो वह सच में ईश्वर हैं। लेकिन, गाहे-बगाहे हमने इच्छाओं की परिधि में अनचाहा विस्तार किया, नतीजा विपरित रहा। यदि सुखी रहना है तो जीवन का लक्ष्य बनाना होगा।

    - विनय कुमार पांडेय, प्रधानाचार्य नन्हकू राम पब्लिक स्कूल, मुड़ीलाडीह सोनभद्र। चार बातों से रहेंगे खुश

    सुकरात ने कहा है, खुशी प्राप्त करना मानव जीवन का परम उद्देश्य है। खुशी, आनंद की वह अवस्था है जिसमें हम अपने मस्तिष्क को इस अवस्था के लिए प्रशिक्षित करते हैं तो वह उसी तरह रहना सीख जाता है। क्योंकि हमारा मन जो कहता है दिमाग वही करता है। खुशी का वर्णन शब्दों में करना बड़ा मुश्किल है। इसे महसूस किया जा सकता है। एक अबोध बालक के चेहरे की मुस्कान देखकर पता चलता है कि वो कितना खुश है और हम भी उसे देखकर अनायास ही मुस्कुरा देते हैं। अच्छे रिश्ते, पैसा, सफलता और शक्ति यह सब खुशी प्राप्त करने का साधन है, वास्तविक खुशी नहीं। जिन्दगी में खुश रहने के लिए हमें चार बातें संतुष्ट, वर्तमान, आभार व सकारात्मक होने की अवस्था का बोध करें।

    - दीनबंधु त्रिपाठी, प्रभारी प्रधानाचार्य उच्च प्राथमिक विद्यालय विसुंधरी, घोरावल। समायोजन के भाव जरूरी

    ¨जदगी का प्रारंभ चुनौती के साथ होता है। इसका अंत संतोषपूर्ण व प्रसन्नतापूर्वक हमारे प्रयास में होने चाहिए। जीवन में समायोजन का बढ़ा महत्व है। बच्चों में शुरू से ही समायोजित होने की आदत डालनी चाहिए। इसके लिए स्कूलों में शिक्षकों तथा घर में अभिभावकों को प्रयास करना चाहिए। आज के प्रतिद्वंद्वी वातावरण में सफल होने की कला हमें दूसरों से अलग बनाती है। किसी भी वातावरण में समायोजित होने की कला होने पर हमारे अंदर आत्मविश्वास और संतोष का भाव पैदा होता है। संतोष का भाव ही जीवन में खुश रहने का सबसे बड़ा कारण है और खुश रहना ही जीवन का लक्ष्य होना चाहिए। साफ है कि जीवन में हर परिवर्तन के साथ सामंजस्य स्थापित करना ही खुश रहने का मूल मंत्र है।

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    -कौशर जहां सिद्दीकी, प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय बिसरेखी, सोनभद्र। ¨जदगी का असली मजा खुशी में

    वास्तव में ¨जदगी का असली मजा खुश रहने में ही है। लेकिन क्या वर्तमान जीवन शैली में इंसान खुश रह सकता है। यदि कार्य का बोझ ज्यादा हो तो हम लोगों को उसे हंसते हुए पूरा करना चाहिए। वैसे तो इंसान का जीवन संघर्षपूर्ण होता है और आजीवन संघर्ष भी करता है। यदि ज्यादा दिन जीना है तो खुश रहना ही होगा। मेरी राय में तो किसी को खुशी प्रदान करना ईश्वरीय गुण है। जब किसी को खुश करोंगे तो आपकी खुशी दोगुनी बढ़ जाएगी। एक प्रधानाचार्य के रूप में बच्चों को अभिभावकों को, अध्यापकों एवं परिचारकों को खुश करना एक चुनौती पूर्ण है। यदि हर इंसान अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से पूरा करने का प्रयास करें तो वह कार्य अच्छे तरह से पूर्ण होगा। प्रत्येक मनुष्य को अपना लक्ष्य अवश्य निर्धारित कर लेना चाहिए। यह ¨जदगी अमूल्य है इसका कोई मूल्य नही है। चाहे हम लोग कितना ही धनवान हो जाएं लेकिन ¨जदगी का सौदा नहीं कर सकते। स्वस्थ रहो और मस्त रहो के तर्ज पर जीवनयापन करो इसके अलावा ¨जदगी का कोई दूसरा पहलू नहीं है। यह संसार तो कष्टों से भरा है, ¨जदगी जीवों तो खुश होकर जीवो और मौत भी आ जाय तो खुशी से स्वीकार करो। इसलिए हम लोगों को ¨जदगी भर खुश रहने का लक्ष्य बना ही लेना चाहिए।

    -रमाकांत द्विवेदी, प्रधानाचार्य, पं. विद्याधर इंटर कालेज, कबरी, सोनभद्र।