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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 27, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जल में होता है आध्यात्मिक शक्तियों का वास

By JagranEdited By:
Published: Sun, 27 May 2018 09:51 PM (IST)

जागरण संवाददाता, सोनभद्र : जल ही जीवन है और जीवन से जुड़े इसी जल की महत्ता का गुणगान सभी

जल में होता है आध्यात्मिक शक्तियों का वास
जल में होता है आध्यात्मिक शक्तियों का वास

जागरण संवाददाता, सोनभद्र : जल ही जीवन है और जीवन से जुड़े इसी जल की महत्ता का गुणगान सभी धर्मों में किया गया है। साथ ही इसकी महिमा का वर्णन करते हुए तमाम परंपराओं और पूजा आदि को जोड़ दिया गया है। जल संरक्षण के लिए तमाम पूजा-पाठ और त्योहार व उत्सव भी बनाये गये हैं। पृथ्वी पर जन्म लेने से लेकर परलोक गमन प्रक्रिया में भी इसी जल का इस्तेमाल होता है। जल की महिमा का बखान प्राचीन वेदों से लेकर सभी धर्मग्रंथों में किया गया है। यहां तक कि ¨हदू धर्म में आचमन से लेकर अंतिम संस्कार तक के प्रयोग में जल ही लाया जाता है।

यह बातें भिक्षुक भिखारी जंगली बाबा ने कही। दैनिक जागरण के जलदान और जिला प्रशासन के मिशन सोन जलाग्रह 1001 अभियान की सराहना करते हुए कहा कि जल संरक्षण की दिशा में यह प्रयास मिशाल बनेगा। उन्होंने ¨हदू धर्मग्रंथों में बताये गये जल के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। कहा कि माना जाता है कि इसी जल में आध्यात्मिक शक्तियों का वास होता है। किसी भी काम का शुभारंभ और उसका विसर्जन इसी जल से होता है। धार्मिक संस्कार में जल की महत्ता हमेशा से बनी रही है। बाबा कहते हैं जल के संरक्षण और जल के महत्व को समझने के लिए तमाम उत्सव और त्योहार बनाये गए हैं। मौजूदा समय में सूर्य उपासना के महापर्व छाला छठ को जल संरक्षण के लिए उपयुक्त माना जा सकता है। क्योंकि इसमें जलाशयों को साफ कर महिलाएं पूजन करती हैं। कई बार तो जब कहीं जल नहीं होता तो वहां लोग जल भरने की व्यवस्था करते हैं। कहा जाता है कि एक जलाशय का निर्माण कराना तीर्थ करने के बराबर पुण्य देता है।

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