चीनी के बाद गुड़ के दाम भी आसमान पर, रसोई का जायका हुआ फीका, उपभोक्ताओं को दाम घटने का इंतजार
सुलतानपुर में चीनी और गुड़ के दाम बढ़ने से लोग अब किलो की जगह पाव में खरीदारी कर रहे हैं, जिससे रसोई का बजट प्रभावित हो रहा है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
चीनी और गुड़ के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे।
लोग अब किलो की जगह पाव में कर रहे खरीदारी।
रसोई में प्रयोग घटा, चाय की कीमतें भी बढ़ीं।
शिवशंकर पांडेय, भदैंया (सुलतानपुर)। चीनी और गुड़ के दाम एक साथ बढ़ने से बाजारों में इनकी बिक्री और प्रयोग में भी कमी आई है। छोटे तबके के लोग जहां किलो के बजाय पाव व आधा किलो में खरीदारी करने लगे हैं तो बड़े परिवार में अब दस किलो महीने की खरीदारी दो से तीन किलो पर ही सिमट गई है।
लोग अब भी सरकार के हस्तक्षेप और दाम में कमी आने की आशा जगाकर हर दिन दाम घटने का इंतजार कर रहे हैं। चीनी जहां बीस रुपये किलो तक बढ़कर अब 68 से 70 के रिकार्ड स्तर पर पहुंची है तो वहीं गुड़ भी 15 रुपये की छलांग लगाकर 65 रुपये किलो के शीर्ष स्तर पर पहुंचा है। पांच दिनों में ही गुड़ और चीनी के बढ़ते दामों ने छोटे दुकानदारों की नींद छीन ली है।
जितनी जरूर उतनी ही करते हैं खरीदारी
दुकानदार अरविंद कुमार ने बताया कि चीनी तो बहुत महंगी हो गई है। अब जितनी जरूरत होती है उतनी लाते हैं, खरीदार कम आते हैं। दुकानदार बब्लू जायसवाल बताते हैं कि चीनी की बिक्री में कमी आई है तथा छोटे उपभोक्ता पाव व आधा किलो खरीदने लगे है। वहीं चाय दुकानदारों ने चीनी व गुड़ के दाम बढ़े देख एक चाय 10 की जगह 12 रुपये कप कर दी है।
चीनी का दाम बढ़ने के बाद गुड़ का दाम भी बढ़ गया है। रसोई की जिम्मेदारी महिलाओं की होती है तो इसकी भरपाई भी हमलोग प्रयोग कम करके ही करेंगे। हर दिन दो से तीन बार जहां चाय बनती थी वही अब एक ही बार बन रही है।
-पूजा त्रिपाठी, मझिलेगांव
चीनी और गुड़ की मंहगाई से कम प्रयोग में लाया जा रहा है। आगंतुकों को गुड़ के बजाय पानी पीने को अब बिस्किट दिया जा रहा है। सरकार को चीनी व गुड़ के दाम को कम करने पर ध्यान देना चाहिए।
-रेनू, दोमुंहा
पहले पांच किलो से लेकर दस किलो चीनी महीने में एक साथ खरीदारी की जाती थी। अब दाम बढ़ने से दो से तीन किलो की ही खरीदारी की जा रही है। महंगाई ने रसोई का जायका बिगाड़ दिया है।
-श्यामा देवी, हनुमानगंज
अब चीनी का प्रयोग रसोई में कम किया जा रहा है। महंगाई बढ़ने से इसकी भरपाई कटौती कर की जा रही है। आगंतुकों के आने पर चाय पूछना ही बंद कर दिया है। सरकार को इस पर लगाम लगाना चाहिए।
-आशा तिवारी, किठांवा
