फतेहपुर चौरासी के वो बलिदानी... अमीनाबाद पार्क में तिरंगा फहराकर 32 साल की उम्र में बलिदान हुए थे गुलाब सिंह लोधी
गुलाब सिंह लोधी ने 23 अगस्त 1935 को लखनऊ के अमीनाबाद पार्क में तिरंगा फहराते हुए 32 वर्ष की आयु ...और पढ़ें

अमर बलिदानी गुलाब सिंह लोधी का गांव चंदिका खेड़ा में 2024 तक आसतित्व में रहा आवास। आर्काइव
HighLights
गांव चंदिका खेड़ा में वर्ष 1903 में हुआ था जन्म , 23 अगस्त 1935 को हुए थे बलिदान
अमीनाबाद पार्क में पेड़ पर चढ़कर फहराया था तिरंगा, अंग्रेजी सेना ने बरसाई थीं गोलियां
पैतृक गांव में पार्क और प्रतिमा, अस्पताल व पुलिस प्रशिक्षण केंद्र भी नाम से
संवाद सूत्र, फतेहपुर चौरासी(उन्नाव)। जिस उम्र में युवा अपने भविष्य और परिवार की तरक्की के सपने देखते हुए नौकरी और व्यवसाय में आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं, उस उम्र में फतेहपुर चौरासी ब्लाक के चंदिका खेड़ा गांव निवासी गुलाब सिंह लोधी ने देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था।
महज 32 वर्ष की उम्र में बलिदान देने वाले गुलाब सिंह का नाम आज भी स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में दर्ज है। उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के सामने तिरंगा फहराकर देशभक्ति की मिसाल पेश की थी।
गुलाब सिंह का जन्म वर्ष 1903 में चंदिका खेड़ा गांव में राम रतन सिंह लोधी के घर हुआ था। युवावस्था में ही उन्होंने देश को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराने के लिए चल रहे आंदोलन में शामिल होने का निर्णय लिया। तत्कालीन झंडा सत्याग्रह आंदोलन के दौरान उन्होंने अंग्रेजों की नजरों से बचकर लखनऊ के अमीनाबाद पार्क में तिरंगा फहराने की योजना बनाई।
बैलों को हांकने वाले पैने डंडे में तिरंगा लगाकर उसे कपड़ों में छिपा लिया। अमीनाबाद पार्क पहुंचकर गुलाब सिंह पेड़ पर चढ़ गए और तिरंगा फहरा दिया। इसके बाद उन्होंने तिरंगे की जय और भारत माता की जय के नारे लगाए।
पार्क में तिरंगा फहराता देख आसपास मौजूद हजारों लोग भी एकजुट हो गए। पूरा क्षेत्र भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। इससे अंग्रेजी हुकूमत बौखला गई। आदेश मिलने पर अंग्रेजी सेना ने गुलाब सिंह पर गोलियां चला दीं। 23 अगस्त 1935 को उन्होंने अमीनाबाद के झंडेवाले पार्क में देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। ब्रिटिश हुकूमत के इस व्यवहार से देश के युवाओं का खून गर्म हुआ और नौजवानों की फौज में वृद्धि हुई।
जमींदोज हो चुका बलिदानी का घर
बलिदानी की स्मृति को सहेजने के लिए उनके पैतृक गांव में पार्क बनाकर प्रतिमा स्थापित की गई है। कालीमिट्टी स्थित पुलिस प्रशिक्षण केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी उनके नाम से जाना जाता है। केंद्र सरकार ने 23 दिसंबर 2013 को उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया था। ग्रामीणों के अनुसार गुलाब सिंह का विवाह ओसियां के मजरा नैनीखेड़ा गांव में हुआ था। देश सेवा में जुटने के बाद वह परिवार से दूर रहे। देखरेख के अभाव में उनकी जन्मस्थली का घर जमींदोज हो चुका है और जमीन खाली पड़ी है। ग्रामीणों ने यहां स्मारक या अन्य निर्माण कराने की मांग की है।
बलिदानी के आवास की जमीन पर बने स्मारक
फतेहपुर चौरासी के चंदिका खेड़ा गांव निवासी बलिदानी के पौत्र महादेव ने बताया कि मेरे बाबा की जन्मस्थली की खाली पड़ी भूमि पर उनकी यादों को जिंदा रखने के लिए स्मारक बनवाया जाए। जिससे आसपास के अलावा जनपद सहित अन्य जगहों के लोग उनकी बलिदान के विषय में जानकारी ले सकें।
बलिदानी के विषय में जानकारी देने को तय हो कार्यक्रम
फतेहपुर चौरासी के गांव चंदिका खेड़ा निवासी बलिदानी के तीसरी पीढ़ी के नाती सूबेदार ने कहा कि उनके न रहने के बाद इसी गांव में पहली मीटिंग का आयोजन किया गया था। यह क्रम कुछ दिन चला जिसमें बलिदानी के विषय में लोगों को जानकारी दी जाती थी। अब ऐसा नहीं होता, इसके लिए कार्यक्रम तय किए जाएं। वह युवावस्था से ही देश को आजाद कराने में स्वजन को छोड़कर वह राष्ट्रसेवा में जुट गए थे।
सांसद ने गांव पहुंच बलिदानी को किया नमन
बलिदानी को किया नमन बलिदानी गुलाब सिंह लोधी के बलिदान दिवस पर उनकी जन्मस्थली गांव चंदिका खेड़ा में रविवार को सांसद डा. साक्षी महाराज ने पार्क में स्थित बलिदानी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित कर नमन किया। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बलिदानी गुलाब सिंह लोधी के बलिदान को देश कभी भुला नहीं पाएगा। उन्होंने बलिदानी के स्वजन सूबेदार, मुकेश कुमार, महादेव, सियादुलारी व राजाराम को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। विधायक श्रीकांत कटियार व ब्लाक प्रमुख मनोज निषाद ने भी बलिदानी को नमन किया।
