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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 04, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    UP News: ट्रेन पर पथराव का 34 साल चला मुकदमा, नहीं पहुंचा 25 में से एक भी गवाह; कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

    Updated: Sat, 04 Jan 2025 04:15 PM (IST)

    उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 34 साल पुराने ट्रेन पर पथराव के मामले में बड़ा फैसला सामने आया है। दादर-वाराणसी ट्रेन पर पथराव और सरकारी संपत्ति को नुकसान ...और पढ़ें

    34 साल पुराने मामले में अदालत से छह आरोपितों को बड़ी राहत मिली। जागरण
    34 साल पुराने मामले में अदालत से छह आरोपितों को बड़ी राहत मिली। जागरण

    HighLights

    1. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (उत्तर रेलवे) की अदालत ने छह आरोपितों को किया दोषमुक्त
    2. दादर-वाराणसी ट्रेन पर पथराव करने, सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाने का था मुकदमा

    संवाद सहयोगी, जागरण वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 34 साल पुराने ट्रेन पर पथराव के मामले में बड़ा फैसला सामने आया है। दादर-वाराणसी ट्रेन पर पथराव करने और सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाने के 34 साल पुराने मामले में अदालत से छह आरोपितों को बड़ी राहत मिली। मुकदमे में एक भी गवाह के हाजिर नहीं होने पर शुक्रवार को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (उत्तर रेलवे) अभिनव जैन की अदालत ने आरोपित पूर्व छात्र हरिशंकर, गुलाबचंद्र, राजेश कुमार हलवाई, आनंद कुमार मिश्र,अशोक कुमार सिंह व हबीबुल्ला को दोषमुक्त कर दिया।

    अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आपराधिक न्याय शास्त्र के अनुसार आरोपितों को दोषसिद्ध करने के लिए अभियोजन को आरोपितों पर लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करना होता है। पत्रावलियों के विश्लेषण से यह धारित करने का आधार पर्याप्त है कि उपरोक्त आरोपितों को आरोप से परे साबित करने में असफल रहा है।

    अभियोजन के अनुसार मोढ़ (भदोही) रेलवे स्टेशन पर 12 सितंबर 1990 को दिन में उपरोक्त आरोपित छात्रों ने दादर-वाराणसी अप एवं डाउन ट्रेन का जंजीर खींच कर उसे रोक दिया। हौज पाइप काटकर सरकार विरोधी नारेबाजी करते ट्रेन पर पथराव किया। मौके पर पहुंचे भदोही के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक भूरा सिंह के नेतृत्व में पुलिसकर्मियों ने आठ छात्रों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।

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    कोर्ट ने 34 साल बाद सुनाया फैसला। जागरण


    जीआरपी कैंट ने 23 दिसंबर 1990 को विवेचना पूरी कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दी। आरोप पत्र में अभियोजन की ओर से प्रभारी निरीक्षक भूरा सिंह, मोढ़ रेलवे स्टेशन मास्टर समेत 25 गवाह बनाए गए। इसमें छात्रों को गिरफ्तार करने वाले पुलिसकर्मियों के नाम भी शामिल थे।

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    अदालत में मुकदमा की सुनवाई शुरु पुरी होने तक जब अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्य के लिए एक भी गवाह के पेश न होने पर अदालत ने छह सितंबर 2024 को अभियोजन के साक्ष्य का अवसर समाप्त कर दिया। अभियोजन द्वारा अपने समर्थन में प्रस्तुत किये गये अभियोजन प्रपत्रों को साबित भी नहीं किया गया। इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान दो आरोपितों सुरेश व मिथिलेश की पत्रावली 19 मई 2022 को अलग कर दी गई थी।