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आषाढ़ गुप्‍त नवरात्र माह भर बाद, देवी की गुप्‍त आराधना का वह अवसर जब पूर्ण होती हैं सभी मनोकामनाएं

By Digital Desk Edited By: Abhishek sharma
Published: Fri, 12 Jun 2026 12:01 PM (GMT+05:30)

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026 से शुरू होकर 23 जुलाई को समाप्त होगी, जो वर्ष की दूसरी गुप्त नवरात्रि ...और पढ़ें

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: मनोकामना पूर्ति और शक्ति साधना का विशेष अवसर।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: मनोकामना पूर्ति और शक्ति साधना का विशेष अवसर।

HighLights

  1. आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026 से होगी शुरू।

  2. दस महाविद्याओं और देवी वराही की होती है पूजा।

  3. तांत्रिक साधनाओं और आध्यात्मिक उन्नति के लिए महत्वपूर्ण।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। वर्ष में चार नवरात्र‍ का मान ह‍िंंदू परंपरा में है, इस ल‍िहाज से चार अलग-अलग अवसर देवी की आराधना के म‍िलते हैं। वर्ष में पहली माघ मास में दूसरी चैत्र और तीसरी आषाढ में और इसके बाद आख‍िरी शारदीय नवरात्र की मान्‍यता है। चैत्र के बाद अब आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 अगले माह में शुरू होने जा रही है। इस ल‍िहाज से माह भर के बाद आषाढ़ नवरात्र का दौर शुरू होने जा रहा है। 

श्रावण मास के पूर्व पुण्‍य का यह बड़ा अवसर माना जाता है। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली यह गुप्त नवरात्रि वर्ष की दूसरी गुप्त नवरात्र का मान रखती है। इसका आरंभ 15 जुलाई 2026 (बुधवार) को होगा। मान्‍यता है क‍ि बुधवार से नवरात्र शुरू होने पर देवी नाव पर सवार होकर आती हैं। यह सभी की मनोकामनाएं पूरी करने वाली और अत्यंत शुभ मानी जाती हैं। 

इसका समापन 23 जुलाई 2026 (गुरुवार) को मनुष्‍य की सवारी से व‍िदायी का मान है। गुप्त नवरात्रि का महत्व सनातन धर्म में अत्यधिक है, क्योंकि साल में चार नवरात्रि आती हैं, जिनमें से दो प्रमुख 'गुप्त नवरात्रि' होते हैं। गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से तांत्रिक साधनाओं, आध्यात्मिक उन्नति और गुप्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

इन देव‍ियों की व‍िशेष पूजा का मान

देवी भागवत के अनुसार भी नवरात्र वर्ष में चार बार आती है। चैत्र और शरद नवरात्र में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, जबकि गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्या के रूप में देवियों की पूजा की जाती है। पूजन की परंपरा में देवी के ही स्‍वरूपों की पूजा की व‍िध‍ि मानी गई है। घट स्‍थापना से लेकर नौ द‍िन के अंत‍ में हवन व पूर्णाहुत‍ि का भी मान है। 

गुप्त नवरात्र में भक्त और साधक माँ काली, तारा देवी, त्रिपुरा सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्मस्ता, त्रिपुरा भैरवी, माँ धूमावती, माँ बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं। यह नौ दिन और रातें शक्ति और तंत्र साधनाओं के लिए अत्यंत शक्तिशाली और लाभकारी मानी जाती हैं। यह अवधि विशेष रूप से तांत्रिक गतिविधियों से जुड़े लोगों और शक्ति साधना, भैरव साधना, महाकाल साधना आदि में लगे लोगों के लिए महत्वपूर्ण है।

इन ग्रंथों का पाठ देता है पर‍िणाम

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के नौ दिन और रातें शक्ति के विभिन्न रूपों की पूजा के लिए समर्पित हैं। इस दौरान भक्त देवी दुर्गा को समर्पित मंत्रों का जाप करके उनका दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। 'दुर्गा सप्तशती', 'देवी महात्म्य' और अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना भी इस अवधि का हिस्सा है। श्रीमद्-देवी भागवत इसे बहुत शुभ मानता है।

देवी वाराही की व‍िशेष पूजा का मान

आषाढ़ गुप्त नवरात्र में देवी वराही के भक्त भौतिक समृद्धि, आध्यात्मिक विकास, अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए उनकी पूजा करते हैं। वराही देवी सप्तमातृकाओं में से एक मानी गई हैं। वह भगवान विष्णु के वराह अवतार की पत्नी मानी जाती हैं। वराही एक योद्धा देवी हैं जिन्होंने शुभ, निशुंभ और उनकी सेनाओं के साथ युद्ध के दौरान माँ दुर्गा की सहायता की थी।

उनका चेहरा शूकर जैसा दिखता है और वे अपने भक्तों को शत्रुओं पर विजय, प्रगति, सफलता और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। वराही देवी की पूजा साहस, निर्भीकता और सभी बुराइयों पर नियंत्रण के लिए भी की जाती है। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान वराही देवी मंत्रों का जाप करना अत्यंत पुण्यकारी और लाभकारी होता है।

व‍िशेष साधना से पुण्‍य और समृद्ध‍ि की प्राप्‍त‍ि 

आषाढ़ नवरात्रि हिंदू माह आषाढ़ (जून-जुलाई) में मनाई जाने वाली नौ दिन और नौ रातों की अवधि है, जो शक्ति (मातृ देवी) के नौ रूपों को समर्पित है। आषाढ़ नवरात्रि, जिसे गुप्त नवरात्रि भी कहा जाता है, आषाढ़ शुक्ल पक्ष (चंद्रमा के बढ़ते चरण) में मनाई जाती है। गुप्त नवरात्र के नौ दिन और रातें शक्ति और तंत्र साधनाओं और उनकी सिद्धियों के लिए अत्यंत शक्तिशाली, पुण्यकारी और तात्त्विक मानी जाती हैं।

चूंकि अधिकांश तांत्रिक अनुष्ठान और साधनाएं गुप्त रूप से की जाती हैं, इसलिए आषाढ़ और माघ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि के रूप में जाना जाता है। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से देवी वराही के सभी उपासकों के लिए महत्वपूर्ण है। वराही देवी महाल्य में वर्णित सात मातृकाओं में से एक हैं।

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