आइएमएस बीएचयू का वह आयोजन जहां उल्लास के साथ महामना के देश सेवा के संकल्पों को भी मिलता है मुकाम
बीएचयू में 'एलिक्जिर' नामक वार्षिक उत्सव का आयोजन किया गया, जहाँ नवोदित और पुरा छात्र चिकित्सक अपने सामाजिक दायित्वों का ...और पढ़ें
HighLights
बीएचयू का वार्षिक 'एलिक्जिर' उत्सव डॉक्टरों का समागम।
75 यूनिट रक्तदान और कैंसर जागरूकता अभियान चलाए गए।
सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भरा यह चार दिवसीय आयोजन।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। महामना की बगिया बीएचयू में साल में ऐसा मौका भी आता है जब नवोदित डाक्टरों और पुरा छात्र अपना चिकित्सक का सफेद कोट उतारकर थाम लेते हैं सामाजिक उत्तरदायित्व और उत्साह के साथ ऐसे उल्लास में डूबने के उत्सव में जिसे नाम दिया गया है 'एलिक्जिर' का।
बीएचयू जो सर्वविद्या की राजधानी है वहां से निकले चिकित्सकों ने देश विदेश में आइएमएस बीएचयू का नाम रोशन किया है। छात्रों की एकता और उनके समर्पण की ही देन है कि वह समर्पित भाव से मरीजों की सेवा और इसी बहाने देश सेवा के मौके को निभाने का कोई अवसर नहीं छोड़ते। स्टूडेंट कन्वेनर अर्चित आनंद बताते हैं कि पहले यह आयोजन मेडिफेस्ट नाम से होता था, इसके बाद आयोजन का नाम बदलकर एलिक्सस हाे गया और बीच में अन्य वजहों से आयोजन नहीं हो सका था।
फिर इसका नाम एलिक्जिर हुआ तो काफी समय से यह वार्षिक उत्सव बीएचयू की बड़ी पहचान बन चुका है। आइएमएस के छात्र बताते हैं कि वर्ष भर तो वह समर्पित होकर मरीजों को नई जिंंदगी देने में जूझते हैं लेकिन यह आयोजन मौका देता है कि वह जूझ़ने के साथ ही खुलकर कुछ समय के लिए अपनी जिंंदगी भी जी सकें, इसी का नाम एलिक्जिर है जो छात्रों के भीतर उल्लास और जज्बा भी देता है कि खुल कर जिंदगी को जियो।
आयोजन का मकसर सिर्फ उल्लास तक सीमित नहीं रह जाता क्याेंकि इस आयोजन के माध्यम से सामाजिक उत्तरदायित्व का भी निर्वहन होता है। बताया कि इसमे बहुत सारे इवेंट चार दिनों के दौरान हुए हैं। इसमें बीएचयू के दूसरे विभागाें की भी सहभागिता होती है। इस आयोजन के दौरान युवा डाक्टरों की पहल पर 75 ब्लड डोनेशन भी हुए हैं जो मरीजों की जिंंदगी बचाने के काम आएंगे।
वहीं सर्वाइकल कैंसर की जागरुकता के इवेट के जरिए लोगों को इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरुक किया गया। मैराथन के माध्यम से छात्रों को ही नहीं परिसर के लोगों को भी यह बताया गया कि दौड़ना सेहत के लिए कितना जरूरी है। सोशल और कल्चरल इवेंट के के साथ ही बीएचयू का वार्षिक उत्साह इस बार विराम ले चुका है। इस दौरान नए डाक्टरों का उत्साह पुरा छात्रों से मिलकर और दोगुना हुआ है।
बताते हैं कि स्पांसर ही नहीं हम सभी छात्रों के साथ मिलकर आयोजन के लिए बजट जुटाते हैं इसमें छात्र और शिक्षकों की साझा सक्रियता ही इस आयोजन को भव्य बनाती है। बताया कि प्रयास होता है कि हर साल आयोजन को और भी भव्य बनाया जाए ताकि महामना की बगिया बीएचयू कहीं और अधिक सुवासित हो और यहां के छात्र देश भर में जाकर मरीजों की सेवा के साथ सामाजिक उत्तरदायित्वों का भी निर्वहन करें।
आखिरी दिन संगीत के नाम
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आइएमएस) में आयोजित चार दिवसीय वार्षिक युवा महोत्सव 'एलिक्सिर-26' का अंतिम दिन संगीत और उत्साह के नाम रहा। रविवार को गायक जोड़ी साकेत-परंपरा की प्रस्तुतियों ने मेडिकल के छात्र-छात्राओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। युवाओं ने गीत-संगीत का भरपूर आनंद लिया और देर तक उत्सव के रंग में डूबे रहे।
चार दिनों तक चले इस आयोजन में हास्य, संगीत, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों का संगम देखने को मिला। पहले दिन स्टैंडअप कामेडियन रजत सूद ने अपनी प्रस्तुति से विद्यार्थियों का मनोरंजन किया। दूसरे दिन 'लिबास' बैंड ने संगीत की धुनों से समां बांधा। तीसरे दिन डीजे ताशा और डीजे प्रेरक की प्रस्तुतियों पर युवा थिरके। अंतिम दिन साकेत-परंपरा की प्रस्तुति महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रही।
महोत्सव के सफल आयोजन के लिए विद्यार्थियों की कोर कमेटी गठित की गई थी। इसमें अर्चित आनंद स्टूडेंट कन्वीनर, साहिल शौर्य जनरल सेक्रेटरी, कुणाल दास इवेंट मैनेजर और हर्षित कुमार कोषाध्यक्ष रहे, सिक्युरिटी हेड संदीप चौधरी आदि रहे। इनके साथ सांस्कृतिक, खेल, मार्केटिंग, सजावट, सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग टीमें जिम्मेदार रहीं। पूरे आयोजन में मेडिकल के छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी रही
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