पर्यटक नशे में मिले तो उसे थाने नहीं होटल पहुंचाया जाए, हिमाचल प्रदेश में खुलेंगे 24 घंटे रेस्तरां और बार : सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वाराणसी में कहा कि हिमाचल में रेस्तरां और बार 24 घंटे खुले रहेंगे, और नशे ...और पढ़ें

हिमाचल में 24 घंटे खुले रहेंगे रेस्तरां-बार, नशे में पर्यटक को थाने नहीं होटल पहुंचाने की तैयारी। (AI image)
HighLights
हिमाचल में रेस्तरां और बार 24 घंटे खुले रहेंगे।
नशे में पर्यटक को थाने की बजाय होटल पहुंचाया जाएगा।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई नई योजनाएं शुरू होंगी।
राघवेन्द्र शुक्ल, जागरण, वाराणसी। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को कहा कि प्रदेश में रेस्तरां और बार 24 घंटे खुले रखने की व्यवस्था की जाएगी। पर्यटकों को हर सुविधा हर समय मिलनी चाहिए। यदि कोई पर्यटक शराब के नशे में मिलता है तो उसे थाने ले जाने के बजाय होटल पहुंचाया जाए।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में बयान देने पर उन्हें इंटरनेट मीडिया पर ट्रोल किया गया, लेकिन इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। वह होटल ताज में फेडरेशन आफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशंस आफ इंडिया (एफएचआरएआइ) के 56वें वार्षिकोत्सव को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि हिमाचल में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं। अगले वर्ष तक सभी जिला मुख्यालयों को हेलीपैड से जोड़ दिया जाएगा। धर्मशाला हवाईअड्डे के विस्तार और अन्य हेली सेवाओं के लिए 3000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कांगड़ा को पर्यटन केंद्र और हिमाचल प्रदेश की देश की पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित किया जा रहा है। वर्ष 2025 में 3.11 करोड़ और जनवरी से जुलाई 2026 तक 1.06 करोड़ पर्यटक हिमाचल पहुंचे हैं। सरकार ऐसी कार्ययोजना बना रही है, जिससे एक पर्यटक कम से कम सात दिन तक प्रदेश में ठहरे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला पर्यटकों की सुरक्षा के मामले में शिमला पहले और मनाली दूसरे स्थान पर है। स्विट्जरलैंड से ज्यादा बर्फीला क्षेत्र हिमाचल में है। 24 ऐसे क्षेत्र हैं, जहां जून-जुलाई में भी बर्फ रहती है। 40 किलोमीटर क्षेत्र में झीलें हैं, जहां सितारा होटल और क्रूज चलाए जा सकते हैं। शिमला, मनाली, धनौल्टी और धर्मशाला के साथ नए पर्यटन स्थल विकसित किए जा रहे हैं। लेह के साथ स्पीति में भी बर्फ, नदी और प्रकृति का आनंद लिया जा सकता है। सरकार धार्मिक, साहसिक और वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 68 प्रतिशत वन भूमि है। इसमें 30 प्रतिशत सघन वन क्षेत्र और 10 प्रतिशत शिवालिक, मध्य व वृहद हिमालय का क्षेत्र है। महज 30 से 32 प्रतिशत भूमि ही निर्माण योग्य है। इसलिए जमीन की खरीद-बिक्री की पूरी प्रक्रिया सरकार के नियंत्रण में है।
शर्तों के साथ अन्य राज्यों को पानी: सुक्खू ने कहा कि हिमाचल की पांच नदियों का पानी पहले अन्य राज्यों को जाता था, लेकिन इसके बदले प्रदेश को कोई लाभ नहीं मिलता था। अब ऐसा नहीं होगा। अगले कुछ वर्षों में दिल्ली और गुरुग्राम जल संकट से जूझ सकते हैं। हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और दिल्ली को हिमाचल से पानी मिलता है। केंद्र सरकार को बांध बनाना था, लेकिन प्रदेश सरकार ने अपनी शर्तें रखीं। समझौते के बाद बांध को मंजूरी दी गई और हरियाणा, राजस्थान व दिल्ली को इन शर्तों पर सहमत होना पड़ा।
पर्यटन और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश: मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मशाला हवाईअड्डे का विस्तार किया जा रहा है। इसके लिए 3000 करोड़ रुपये के कार्य प्रस्तावित हैं। पांच हेलीपैड निर्माणाधीन हैं, जिससे सभी जिला मुख्यालय आपस में जुड़ जाएंगे। संयुक्त अरब अमीरात ने हिमाचल में पालम सिटी बनाने की इच्छा जताई है। प्रदेश सरकार एयरो सिटी भी बना रही है, जिससे उड़ानों की संख्या बढ़ेगी। एयर बस चलाने की तैयारी है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार 5000 करोड़ रुपये निवेश कर रही है, जबकि वृद्धाश्रमों के लिए 250 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। शिमला की यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने के साथ शिमला-मनाली मार्ग को चार लेन किया जा रहा है। प्रदेश की 51 शक्तिपीठों में से पांच के सुंदरीकरण का कार्य होगा। वन्यजीव क्षेत्र में 600 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से प्रदेश को 4000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। देश की कुल दवा कंपनियों में 35 प्रतिशत हिमाचल में हैं, लेकिन इसका लाभ प्रदेश को नहीं मिल रहा है। पर्यटन को बढ़ावा देने से राजस्व बढ़ेगा, क्योंकि पर्यटन से जुड़े कार्यों में 18 प्रतिशत जीएसटी है। कार्यक्रम के बाद उन्होंने श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन किया।
