चैत्र नवरात्र पर मां का पालकी पर आगमन अशुभ लेकिन गज से प्रस्थान शुभ, जानिए काशी के ज्योतिषाचार्यों ने क्या बताया
इस वर्ष वासंतिक नवरात्र 19 मार्च से 27 मार्च तक चलेगा। माता का आगमन पालकी पर होगा, जिसे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अशुभ माना गया है, लेकिन मां की साधना ...और पढ़ें

चैत्र नवरात्र पर माता का पालकी पर आगमन अशुभ, गज से प्रस्थान शुभ है।
HighLights
वासंतिक नवरात्र 19 से 27 मार्च तक चलेगा।
माता का पालकी पर आगमन अशुभ माना गया।
गज पर प्रस्थान अत्यंत शुभ, अंततः शुभता।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। आदिशक्ति की आराधना, उपासना और साधना का महापर्व वासंतिक नवरात्र इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च से प्रारंभ होगा। यह नवरात्र पूरे नौ दिनों तक चलेगा और 27 मार्च को महानवमी के दिन संपन्न होगा। नवरात्र के पहले दिन प्रात:काल से ही घटस्थापना के कार्य आरंभ हो जाएंगे। महानवमी के दिन व्रत की पूर्णाहुति के साथ-साथ मां की विदाई भी होगी।
प्रो. विनय पांडेय, आचार्य दैवज्ञ शास्त्री के अनुसार इस बार माता का आगमन पालकी पर होगा, जिसे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुभ नहीं माना जाता है। हालांकि, मां की साधना अशुभ को भी शुभ बनाने की क्षमता रखती है। वहीं माता का गज वाहन से प्रस्थान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस लिहाज से इस बार नवरात्र का फलाफल अंतत: शुभता से परिपूर्ण होने की ही संभावना व्यक्त कर रहा है।
नवरात्र के दौरान भक्तजन विभिन्न प्रकार की पूजा-अर्चना और उपासना करेंगे। इस अवसर पर विशेष रूप से माता दुर्गा की आराधना की जाएगी। भक्तजन नौ दिनों तक उपवास रखकर मां की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करेंगे। नवरात्र के दौरान मंदिरों में विशेष सजावट की जाएगी और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी।
नवरात्र का पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दौरान लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं और सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्र के दिनों में अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। नवरात्र में भक्तों के लिए विभिन्न संस्थाओं की ओर से विशेष आयोजन किए जाएंगे। विभिन्न स्थानों पर भव्य पंडाल सजाए जाएंगे, जहां श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा कर सकेंगे। इसके अलावा, कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा।
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नवरात्र के दौरान भक्तों को विशेष ध्यान रखना होगा कि वे सभी नियमों और परंपराओं का पालन करें। इस प्रकार, चैत्र नवरात्र का पर्व इस वर्ष भी भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। सभी श्रद्धालु इस अवसर पर मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए तैयार हैं और इस महापर्व का आनंद लेने के लिए उत्सुक हैं। लेकिन ध्यान पूजन और अर्चन से शुभ परिणाम प्राप्त करना हो तो देवी को प्रसन्न करने के लिए तमाम विधि विधान पूर्वक यत्न भी करना जरूरी है।