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वाराणसी में सर्दियों की आहट के साथ शुरू हुआ विदेशी मेहमानों का आगमन, गंगा घाटों पर साइबेरियन सीगल की अठखेलियां

By Pradyuman Pandey RamuEdited By: Abhishek sharma
Published: Wed, 04 Nov 2026 12:30 PM (IST)

वाराणसी में सर्दियों की शुरुआत के साथ साइबेरियन सीगल जैसे प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है, जो गंगा ...और पढ़ें

HighLights

  1. साइबेरियन सीगल का वाराणसी के गंगा घाटों पर आगमन।

  2. प्रवासी पक्षी सर्दियों में काशी के पर्यटन को बढ़ाते हैं।

  3. नाविकों की आय में वृद्धि, स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ।

जागरण संवाददाता, वाराणसी: धर्म, अध्यात्म और संस्कृति की अनूठी संगम स्थली काशी में सर्दियां शुरू होते ही एक अलग ही प्राकृतिक और मनमोहक नजारा देखने को मिलने लगा है। मौसम में ठंडक घुलने के साथ ही काशीवासियों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बहुप्रतीक्षित 'विदेशी मेहमानों' यानी साइबेरियन सीगल (प्रवासी पक्षियों) का बेसब्री से इंतजार है। हर साल की तरह इस बार भी नवंबर से दिसंबर के बीच इन खूबसूरत मेहमानों का आगमन शुरू हो जाता है, जिनकी एक झलक पाने के लिए गंगा घाटों पर रौनक बढ़ जाती है।

हजारों किलोमीटर का सफर तय कर काशी पहुंचते हैं पक्षी

साइबेरियन सीगल जैसे प्रवासी पक्षी कड़ाके की ठंड से बचने के लिए साइबेरिया और अन्य ठंडे उत्तर एशियाई क्षेत्रों से हजारों किलोमीटर का सफर तय करके भारत आते हैं। उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र वाराणसी में इन पक्षियों का डेरा मुख्य रूप से मां गंगा के घाटों और नदी के खुले छोर पर होता है। जानकारों के अनुसार, ये मेहमान ठंड के मौसम में करीब तीन से चार महीने तक काशी में प्रवास करते हैं। इसके बाद जैसे-जैसे फरवरी से मार्च के बीच मौसम गर्म होने लगता है, ये अपने मूल आवास की ओर वापस लौट जाते हैं।

नाव की सैर करने वाले पर्यटकों के लिए बनता है मुख्य आकर्षण

सुबह के वक्त जब सूरज की पहली किरणें गंगा के पानी पर पड़ती हैं और उस पर साइबेरियन सीगल का झुंड उड़ान भरता है, तो वह दृश्य देखते ही बनता है। सुबह-सुबह गंगा में नाव की सैर (बोटिंग) करने वाले पर्यटकों के लिए ये सफेद पक्षी सबसे बड़ा आकर्षण होते हैं। नाव पर बैठे पर्यटक इन पक्षियों को झुंड में उड़ते, पानी के ऊपर कलाबाजियां करते और लहरों के बीच तैरते देखकर बेहद रोमांचित महसूस करते हैं। कई श्रद्धालु और पर्यटक इन्हें अपने हाथों से दाना खिलाते हैं, जो उनके लिए जीवनभर का एक यादगार और अनमोल पल बन जाता है।

पर्यटन को मिलती है रफ्तार और स्थानीय नाविकों की बढ़ती है आय

प्रवासी पक्षियों के काशी आगमन का यह दौर केवल प्राकृतिक सौंदर्य में ही चार चांद नहीं लगाता, बल्कि स्थानीय आर्थिकी और पर्यटन कारोबार के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। इन पक्षियों के दीदार के लिए देश के कोने-कोने से सैलानी बड़ी संख्या में वाराणसी का रुख करते हैं। पर्यटकों के बढ़ने से गंगा तटों पर नाव चलाने वाले स्थानीय नाविकों को सीधा रोजगार और आर्थिक लाभ मिलता है। सैलानियों की आवाजाही से नाविकों की आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है, जिससे उनके घरों में भी खुशहाली आती है।

काशी की सर्दियों को मिलती है एक खास पहचान

गंगा के घाटों, ऐतिहासिक इमारतों, सुबह-ए-बनारस की भव्य आरती और ठंड के मौसम में इन सफेद प्रवासी पक्षियों की अठखेलियां—यह सब मिलकर काशी के शीतकालीन पर्यटन को एक विशिष्ट और वैश्विक पहचान दिलाते हैं। जैसे-जैसे आने वाले दिनों में ठंड और परवान चढ़ेगी, गंगा की लहरों पर इन विदेशी मेहमानों का यह कारवां और अधिक विस्तृत होता जाएगा। यदि आप भी इस अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य और काशी की अलौकिक सुबह का आनंद लेना चाहते हैं, तो गंगा घाटों का यह नजारा आपको अपनी ओर जरूर आकर्षित करेगा।

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