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चैत्र नवरात्र का पर्व 19 मार्च से 27 मार्च तक, पालकी पर देवी की सवारी, जानें इसका पूरा महात्‍म्‍य

By Digital Desk Edited By: Abhishek sharma
Published: Wed, 18 Feb 2026 05:13 PM (IST)

चैत्र नवरात्र 19 से 27 मार्च तक मनाया जाएगा, जो हिंदू नव वर्ष का भी आरंभ है। इस दौरान मां ...और पढ़ें

चैत्र नवरात्र 19 मार्च से है तो देवी सवारी का महत्व और विशेष पूजन विधि से आपको राहत म‍िलेगी।

चैत्र नवरात्र 19 मार्च से है तो देवी सवारी का महत्व और विशेष पूजन विधि से आपको राहत म‍िलेगी।

HighLights

  1. चैत्र नवरात्र 19 से 27 मार्च तक, हिंदू नव वर्ष आरंभ।

  2. घटस्थापना से मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा।

  3. पालकी सवारी के कारण विशेष सावधानी, जप-तप जरूरी।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। चैत्र नवरात्र इस बार मार्च माह में पड़ रहा है। मध्‍य मार्च से शुरू होकर माह के अंत में नवरात्र का समापन होना है। चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि का आरंभ होता है, जो हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। इस पर्व के साथ ही हिंदू नव वर्ष का भी आरंभ होता है। नवरात्रि के नौ दिनों में माता दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना की जाती है, जो इस पर्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि का आरंभ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस वर्ष, प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 4 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी और यह 20 मार्च तक रहेगी। चैत्र नवरात्रि का पर्व 19 मार्च से 27 मार्च तक मनाया जाएगा। पहले दिन घटस्थापना की जाएगी, जिससे इस पर्व की शुरुआत होगी।

चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है, क्योंकि यह हिंदू नव वर्ष का आरंभ भी करती है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, जिनमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति इन नौ दिनों तक जप और तप करता है, उस पर मां दुर्गा की विशेष कृपा बनी रहती है।

नवरात्रि के दौरान श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-पाठ करने से मां दुर्गा अपने भक्तों के सभी दुख और कष्ट दूर करती हैं, साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि भी करती हैं।

नवरात्रि के दिनों का विवरण इस प्रकार है

  • पहला दिन (19 मार्च): मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना
  • दूसरा दिन (20 मार्च): मां ब्रह्मचारिणी पूजा
  • तीसरा दिन (21 मार्च): मां चंद्रघंटा पूजा
  • चौथा दिन (22 मार्च): मां कुष्मांडा पूजा
  • पांचवां दिन (23 मार्च): मां स्कंदमाता पूजा
  • छठा दिन (24 मार्च): मां कात्यायनी पूजा
  • सातवां दिन (25 मार्च): मां कालरात्रि पूजा
  • आठवां दिन (26 मार्च): मां महागौरी पूजा
  • नौवां दिन (27 मार्च): मां सिद्धिदात्री पूजा

चैत्र नवरात्र पर भक्तजन मां दुर्गा से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। हालांक‍ि इस बार पालकी (डोली) पर सवारी यानी दोलायां मरणं धुव्रम् - बड़ा संकट होने की आशंका की वजह से इस बार विशेष सावधानी और पूजा-पाठ की जरूरत है। काले तिल, काले कपड़े का दान और हनुमान चालीसा पाठ, कन्‍या पूजन और दुर्गा शप्‍तशती का पाठ करना चाहिए।

नवरात्र के दौरान माता दुर्गा का पालकी (डोली) पर सवार होकर आना शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार बहुत शुभ नहीं माना जाता है। यह सांकेतिक रूप से समाज में आर्थिक तंगी, मानसिक अशांति, प्राकृतिक विपदा या महामारी के बढ़ने का संकेत देता है। यह समय विशेष सतर्कता और सावधानी बरतने का भी होता है।

नोट : व‍िव‍िध धार्म‍िक पक्षों का अवलोकन आवश्‍यक है। 

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