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राममंद‍िर चंदा व‍िवाद के बीच श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में बढ़ गया चढ़ावा, बाबा दरबार में भक्‍तों की भी बढ़ रही है भीड़

By Digital Desk Edited By: Abhishek sharma
Published: Fri, 17 Jul 2026 02:52 PM (IST)

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के नव्य-भव्य स्वरूप के बाद श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, पहली तिमाही ...और पढ़ें

काशी विश्वनाथ मंदिर में चढ़ावे और भक्तों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि।

काशी विश्वनाथ मंदिर में चढ़ावे और भक्तों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि।

HighLights

  1. काशी विश्वनाथ मंदिर में चढ़ावा 32 करोड़ रुपये तक पहुंचा।

  2. एक महिला श्रद्धालु ने 3.50 करोड़ रुपये का दान दिया।

  3. नव्य-भव्य स्वरूप के बाद चढ़ावे में चार गुना वृद्धि।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के नव्य-भव्य स्वरूप में आने के बाद से श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हो रही है। भक्तजन दुनिया भर से बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए आ रहे हैं और श्रद्धा के साथ यथाशक्ति चढ़ावा भी चढ़ा रहे हैं। इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में चढ़ावे की राशि पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 करोड़ रुपये अधिक रही है।

पिछले वर्ष इस तिमाही में करीब 21.50 करोड़ रुपये का चढ़ावा आया था, जो इस बार बढ़कर 32 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस दौरान, तमिलनाडु से आई 80 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला श्रद्धालु ने अपने दिवंगत बेटों स्व. वेंकट सुब्रमण्यम और आर. राजलक्ष्मी की याद में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर को 3 करोड़ 50 हजार रुपये का दान दिया।

इस महिला ने अपने पति और दोनों बेटों के निधन के बाद भक्ति भाव में अपना जीवन समर्पित कर दिया है। काशी पहुंचने पर उन्होंने सादगी से बाबा विश्वनाथ का दर्शन किया और मंदिर तथा अन्न क्षेत्र को दान देने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने मंडलायुक्त से मिलकर दान की धनराशि का चेक सौंपा, जिसमें दो करोड़ रुपये का चढ़ावा शामिल था। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अगले एक वर्ष तक अन्न क्षेत्र में 50-50 लाख रुपये का दान देने का भी निर्णय लिया है।

इसके साथ ही, अगले 25 वर्षों तक दोनों बेटों के नाम से रुद्राभिषेक के लिए 25-25 हजार रुपये देने का भी वचन दिया है। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के नव्य-भव्य स्वरूप में आने के बाद से चढ़ावे की राशि में चार गुना वृद्धि हुई है। पहले, साल भर में मंदिर को लगभग 20 करोड़ रुपये का दान मिलता था, जबकि वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा चार गुना से अधिक बढ़कर 84 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह वृद्धि मंदिर के नए स्वरूप और श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था का प्रतीक है।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और दान की राशि से यह स्पष्ट होता है कि बाबा विश्वनाथ के प्रति लोगों की आस्था और श्रद्धा में कोई कमी नहीं आई है। मंदिर प्रशासन भी इस बढ़ती हुई श्रद्धा को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए निरंतर प्रयासरत है। मंदिर परिसर में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि भक्तजन आसानी से दर्शन कर सकें और अपनी श्रद्धा अर्पित कर सकें।

इस प्रकार, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह श्रद्धालुओं के लिए एक प्रेरणा का स्रोत भी बन गया है। भक्तों की बढ़ती संख्या और दान की राशि इस बात का प्रमाण है कि बाबा विश्वनाथ की कृपा से श्रद्धालुओं का विश्वास और भी मजबूत हुआ है।