ज्ञानवापी तहखानों का एएसआइ सर्वे और मां श्रृंगार के नियमित दर्शन-पूजन की इजाजत पर 22 सितंबर को होगी सुनवाई
जिला जज ने ज्ञानवापी मामले में तहखानों के एएसआई सर्वे और मां श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन की इजाजत संबंधी ...और पढ़ें

ज्ञानवापी मामले में एएसआई सर्वे और श्रृंगार गौरी दर्शन पर अब 22 सितंबर को सुनवाई।
HighLights
ज्ञानवापी मामले में अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।
एएसआई सर्वे और श्रृंगार गौरी दर्शन पर फैसला लंबित।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण सुनवाई टली।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। ज्ञानवापी स्थित मां श्रृंगार के नियमित दर्शन-पूजन की इजाजत देने व किरण सिंह की ओर से बंद तहखानों का एएसआइ सर्वे करने की मांग समेत अन्य लंबित मुकदमों की सोमवार को जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत में सुनवाई हुई। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ज्ञानवापी के ही मामले में 12 दिसंबर 2024 को पारित आदेश के दृष्टिगत सभी मामलों में अगली सुनवाई के लिए जिला जज ने 22 सितंबर की तिथि मुकर्रर कर दी।
बता दें कि वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से दाखिल एक रिट याचिका 1246/2020 में सुप्रीमकोर्ट द्वारा 12 दिसंबर 2024 को पारित आदेश में ज्ञानवापी से संबंधित लंबित मुकदमों में अगले आदेश तक कोई भी प्रभावी अंतरिम अथवा अंतिम आदेश पारित न करने का अधीनस्थ न्यायालयों को आदेश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया कि जिस मुकदमे में प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट (उपासना स्थल अधिनियम) का मामला शामिल है उसमें अगले आदेश तक कोई प्रभावी अथवा अंतरिम आदेश पारित न किया जाए।
मां श्रृंगार गौरी की नियमित दर्शन-पूजन की इजाजत देने को लेकर पांच महिलाओं की ओर से दाखिल मुकदमा में चोलापुर थाना क्षेत्र के महमुदपुर गांव निवासी जयप्रकाश रामचन्दर राजभर द्वारा पक्षकार बनाने की प्रस्तुत प्रार्थना पत्र को वापस लेने की अपील पर भी अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तिथि मुकर्रर कर दी। जयप्रकाश ने 24 मई 2025 को जिला जज की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था बाद में जयप्रकाश की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने अपना प्रार्थना पत्र वापस लेने की इजाजत देने की अदालत से अपील की।
इस अपील पर मंदिर पक्ष के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी,सुभाष नंदन चतुर्वेदी व अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद के अधिवक्ता मुमताज अहमद व रईस अहमद ने आपत्ति जताया था। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जिला जज ने लिखित रुप से प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने का जयप्रकाश को निर्देश दिया था। सोमवार को जयप्रकाश की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र में उल्लेखित तथ्यों में संशोधन किए जाने पर पक्षकारों ने पुनः आपत्ति जताई।
