ज्येष्ठ माह में 17 मई से 15 जून तक अधिक मास, मांगलिक कार्यों पर माह भर तक लगेगा विराम
ज्येष्ठ माह में 17 मई से 15 जून तक अधिक मास रहेगा, जिसके कारण विवाह और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्य एक महीने के लिए रुक जाएंगे। यह अवधि भगवान विष ...और पढ़ें

ज्येष्ठ माह में अधिक मास के कारण मांगलिक कार्यों पर एक माह का विराम।
HighLights
ज्येष्ठ माह में 17 मई से 15 जून तक अधिक मास।
विवाह, गृह प्रवेश सहित सभी मांगलिक कार्य स्थगित।
आत्मचिंतन, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष समय।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। इस वर्ष ज्येष्ठ माह में 17 मई से 15 जून तक अधिक मास लगने जा रहा है, जिसके चलते लगभग एक माह तक विवाह, गृह प्रवेश सहित सभी मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। अधिक मास को अधिमास या पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि इसे अशुभ नहीं माना जाता, फिर भी पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में शुभ कार्य नहीं किए जाते।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार सामान्यतः एक वर्ष में 12 माह होते हैं, लेकिन कुछ विशेष वर्षों में पंचांग के संतुलन के लिए 13वां महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। यह प्रक्रिया ऋतु, पर्व और कालगणना के संतुलन को बनाए रखने के लिए आवश्यक मानी जाती है। इस बार यह संयोग ज्येष्ठ माह में बन रहा है। अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है, इसलिए इसे अत्यंत पवित्र और पुण्यदायक माना जाता है।
हालांकि इतना शुभ और पुण्यदायी होने के बावजूद इस अवधि में विवाह, नामकरण, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक संस्कार नहीं किए जाते। यह समय मुख्य रूप से आत्मचिंतन, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए समर्पित माना जाता है। अधिक मास समाप्त होने के बाद ही पुनः शुभ मुहूर्तों के अनुसार मांगलिक कार्यक्रमों का आयोजन शुरू होगा।
इस अवधि में लोग धार्मिक अनुष्ठान और साधना में अधिक समय व्यतीत करते हैं। विद्वानों का मानना है कि इस समय का उपयोग आत्मिक विकास और भक्ति में लगाना चाहिए। अधिक मास के दौरान, भक्तजन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और इस समय को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर मानते हैं।
खबरें और भी
इस वर्ष अधिक मास का यह समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी लोगों को एकत्रित होने और एक-दूसरे के साथ समय बिताने का अवसर प्रदान करता है। इस दौरान लोग अपने परिवार के साथ मिलकर धार्मिक गतिविधियों में भाग लेते हैं, जिससे पारिवारिक बंधन और मजबूत होते हैं।
अधिक मास के समाप्त होने के बाद, 16 जून से मांगलिक कार्यों का पुनः आरंभ होगा। इस समय के बाद विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्तों की तलाश की जाएगी। इस प्रकार, अधिक मास का यह समय न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और पारिवारिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।