Makar Sankranti: 14 या 15 जनवरी को है मकर संक्रांति? बनारस के ज्योतिषियों ने बताया सही शुभ मुहूर्त
मकर संक्रांति सूर्य के धनु से मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण होने का पर्व है। वाराणसी के पंडितों के ...और पढ़ें

15 जनवरी को सूर्योदय काल से आठ घंटे 1.39 बजे तक रहेगा स्नान-दान का पुण्यकाल। जागरण
HighLights
सूर्य 14 जनवरी रात 9:39 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
पर्व 15 जनवरी को, पुण्यकाल दोपहर 1:39 बजे तक रहेगा।
स्नान, दान, खिचड़ी और तिल का विशेष महत्व है।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। सूर्य की राशि परिवर्तन से प्रकृति में होने वाली क्रांति का पर्व है मकर संक्रांति। इस दिन सूर्य धनु से मकर राशि में गमन करते हैं और उत्तरायण हो जाते हैं। सूर्य के उत्तरायण होते ही प्रकृति में परिवर्तन आरंभ हो जाता है। दिन बड़े होने लगते हैं और प्रकाश की अवधि बढ़ने लगती है। साथ ही शीत ऋतु का प्रकोप कम होना आरंभ हो जाता है।
प्रकृति की उपासिका भारतीय सनातन संस्कृति इसे पर्व के रूप में मनाती है। इस दिन पवित्र तीर्थों में पावन नदियों में स्नान, दानादि को महती पुण्यदायक बताया गया है। इस बार यह पर्व 15 जनवरी गुरुवार को पड़ रहा है। बीएचयू के ज्योतिष विभाग में प्रोफेसर डा. सुभाष पांडेय ने बताया कि सामान्य तौर पर गुरुवार को लोग खिचड़ी नहीं खाते, किंतु मकर संक्रांति का पर्व ही इस बार गुरुवार को है, जिसमें खिचड़ी का दान व भोजन करना ही महत्वपूर्ण व पुण्य फलदायी बताया गया है।
ऐसे में पर्व के दिन गुरुवासरीय वर्जना की महत्ता नहीं रह जाती। लोग खिचड़ी बना सकते हैं, खा सकते हैं तथा दान भी कर सकते हैं। प्रोफेसर सुभाष के अनुसार संयोगवश इसी दिन तिल द्वादशी भी है। मान्यता है कि माघ मास के कृष्ण द्वादशी को ही भगवान विष्णु के शरीर से तिल की उत्पत्ति हुई थी।
पर्व पर माघ मास तिल द्वादशी व वृद्धि योग की युति होने से इसका महात्म्य और भी फलदायी बताया जा रहा है। अतएव इस दिन को तिल का उपभोग व दान अत्यंत पुण्यदायी है। मकर संक्रांति पर्व किसी वर्ष पौष तो किसी वर्ष माघ में पड़ता है। माघ स्नान-दान का महत्वपूर्ण मास माना गया है।
श्रीकाशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री व काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि सनातन धर्म में पर्व-व्रत निर्धारण के लिए ऋषियों द्वारा प्रतिपादित व्यवस्था के अनुकूल सूर्य सिद्धांतादि पारंपरिक गणित के आधार पर 14 जनवरी बुधवार की रात 9.39 बजे सूर्यदेव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
धर्मशास्त्रों के अनुसार, सूर्य संक्रांति की घटना अत्यंत सूक्ष्म समय में होती है, अतएव ठीक उसी समय कोई पर्व, स्नानादि नहीं किया जा सकता, ऐसे में हमारे मनीषियों ने पर्वादि उल्लास, उत्सव व स्नान, दान पुण्य के लिए संक्रांति से आठ से 16 घंटे तक की अवधि तय की है। सूर्य संक्रांति या विशेषकर मकर संक्रांति जब रात में होती है तो संक्रांति का पुण्यकाल संक्रांति के समय से 16 घंटे आगे तक रहता है। इस दृष्टि से पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा और दोपहर बाद दोपहर 1.39 बजे तक इसका पुण्यकाल होगा। 15 जनवरी की प्रात:काल सूर्योदय से दोपहर बाद दोपहर 1.39 बजे तक स्नान-दान का पर्व होगा।
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