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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 26, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Gyanvapi Case: केस ट्रांसफर की मांग पर मस्जिद पक्ष ने दाखि‍ल की आपत्ति, बुधवार को होगी सुनवाई

    By Jagran NewsEdited By: Vinay Saxena
    Updated: Tue, 26 Sep 2023 08:42 PM (IST)

    आपत्ति के प्रार्थना पत्र में बताया गया है कि ज्ञानवापी के जितने भी मुकदमे अदालतों में चल रहे हैं सभी में संपत्ति आराजी संख्या 9130 (ज्ञानवापी परिसर) क ...और पढ़ें

    प्रतिवादी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद (मस्जिद पक्ष) की ओर से आपत्ति जिला जज की अदालत में दाखिल की गई है।
    प्रतिवादी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद (मस्जिद पक्ष) की ओर से आपत्ति जिला जज की अदालत में दाखिल की गई है।

    HighLights

    1. व्यास जी का तहखाना जिलाधिकारी को सौंपने की मांग को लेकर दाखिल किया गया है मुकदमा
    2. सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में दाखिल मुकदमे के स्थानांतरण पर सुनवाई 27 को

    वाराणसी, जागरण संवाददाता। Gyanvapi Case Update: ज्ञानवापी परिसर स्थित व्यास जी का तहखाना जिलाधिकारी को सौंपने और वहां पूजा-पाठ की मांग के साथ शैलेंद्र कुमार पाठक की ओर से दाखिल वाद को सुनवाई के लिए जिला जज की अदालत में स्थानांतरित करने के प्रार्थना पत्र पर मंगलवार को आपत्ति दाखिल की गई है। प्रतिवादी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद (मस्जिद पक्ष) की ओर से आपत्ति जिला जज की अदालत में दाखिल की गई है। वहीं, वकील के निधन पर शोक प्रस्ताव के चलते इस मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। अगली सुनवाई के लिए 27 सितंबर की तिथि तय की गई है।

    आपत्ति के प्रार्थना पत्र में बताया गया है कि ज्ञानवापी के जितने भी मुकदमे अदालतों में चल रहे हैं सभी में संपत्ति आराजी संख्या 9130 (ज्ञानवापी परिसर) का जिक्र है। यहां मौजूद इमारत के नीचे ही तहखाना है। इसलिए वादी का यह कहना कि किसी भी मुकदमे में तहखाने पर अधिकार के बारे में कोई मुकदमा नहीं है, सरासर गलत है।

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    वहीं, राखी सिंह व अन्य की ओर से पिछले वर्ष दाखिल ज्ञानवापी-शृंगार गौरी मुकदमे और बीते सोमवार को शैलेंद्र कुमार पाठक की ओर से दाखिल मुकदमे की प्रकृति एक जैसी नहीं है। इसमें अभी प्रतिवादियों की ओर से कोई आपत्ति दाखिल नहीं की गई है।

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    ऐसी स्थिति में भी वादी का यह कहना कि दोनों मुकदमे एक जैसे हैं और दोनों को साथ सुनने के लिए जिला जज की अदालत में स्थानांतरित करने की मांग सही नहीं है। वहीं, नए मुकदमे को वादी बिना किसी वजह स्थानांतरित करने की मांग नहीं कर सकता है। अदालत मुकदमे को खुद सुनवाई के लिए मंगाता है तो इसमें आपत्ति दाखिल करने का प्रतिवादी का अधिकार वंचित रह जाएगा। इसलिए मुकदमे को स्थानांतरित करने की मांग को खारिज किया जाना जरूरी है।

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