पूर्वांचल के 381 शैक्षणिक सोसाइटियों में 'जातिगत कब्जे' की जांच शुरू, इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
पूर्वांचल के 381 सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में जातिगत एकाधिकार की जांच शुरू हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े ...और पढ़ें

बनारस समेत चार जिलों के डीआइओएस और बीएसए से रिपोर्ट तलब। सांकेतिक तस्वीर
संग्राम सिंह, वाराणसी। प्रदेश के राज्य वित्त पोषित (एडेड) शैक्षणिक संस्थानों के संचालन और उनकी प्रबंध समितियों पर किसी खास जाति या परिवार के वर्षों से चले आ रहे एकाधिकार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत की तल्ख टिप्पणी के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स वाराणसी मंडल के सहायक रजिस्ट्रार ने बनारस, गाजीपुर, जौनपुर और चंदौली के जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआइओएस) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को अंतिम अल्टीमेटम जारी किया है।
सभी अधिकारियों को एक सप्ताह में निर्धारित प्रारूप पर पूरी जांच रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है। यह पूरी कार्रवाई याचिका धनराज सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य में हाईकोर्ट द्वारा बीते 28 जुलाई को पारित आदेश के अनुपालन में की जा रही है। अदालत ने करीब 381 एडेड स्कूलों-कालेजों की समितियों के कामकाज, फर्जी चुनाव प्रबंधन और सत्ता के केंद्रीकरण पर गंभीर चिंता जताई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अपर मुख्य सचिव माध्यमिक व बेसिक शिक्षा और रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स उत्तर प्रदेश को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया है। सहायक रजिस्ट्रार अनूप मिश्रा की ओर से चारों जिलों के अधिकारियों को अनुस्मारक पत्र भेजा गया है।
इससे पहले 10 अगस्त को भी पत्र भेजकर ब्योरा मांगा गया था, जो अफसरों की हीलाहवाली के कारण लंबित पड़ा था। अब लखनऊ मुख्यालय से 18 अगस्त को मिले कड़े निर्देशों का हवाला देते हुए इसी सप्ताह हर हाल में रिपोर्ट मांगी गई है।
'जातिगत वर्चस्व' की रिपोर्ट के मायने
शासन और हाईकोर्ट की ओर से तैयार विशेष प्रारूप में संस्थान का नाम, पंजीकृत समिति और उसके पंजीकरण नंबर के साथ सबसे महत्वपूर्ण बिंदु 'प्रबंध समिति पर वर्चस्व रखने वाले विशिष्ट जाति समूह' का स्पष्ट विवरण मांगा गया है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के संरक्षक रमेश सिंह का कहना है कि इस बिंदु को शामिल करने के पीछे का मुख्य मकसद शैक्षणिक संस्थानों में चल रहे प्रशासनिक खेल को उजागर करना है।
अक्सर देखा जाता है कि सरकारी अनुदान से चलने वाले इन स्कूलों-कालेजों में केवल कागजों पर चुनाव कराए जाते हैं और वर्षों से एक ही जाति या परिवार के लोग पदों पर काबिज रहते हैं। एडेड संस्थानों में शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियों, बजट आवंटन और प्रबंधकीय फैसलों में जातिगत स्वार्थ व पक्षपात के गंभीर आरोप लगते रहे हैं।
सोसाइटियों में होना चाहिए सभी वर्गों को समान प्रतिनिधित्व : रजिस्ट्रार
फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स वाराणसी मंडल के रजिस्ट्रार अनूप मिश्र कहते हैं कि तय समय सीमा में सूचना नहीं देने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी जारी की गई है। अपने आदेश में कोर्ट परखना चाहता है कि क्या इन सोसाइटियों में समाज के सभी वर्गों को समान प्रतिनिधित्व मिल रहा है या सरकारी पैसे से चलने वाली संस्थाएं किसी एक विशेष वर्ग की 'व्यक्तिगत जागीर' बनकर रह गई हैं।
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कहां कितने एडेड स्कूल-कालेज
- बनारस- 106
- जौनपुर- 153
- गाजीपुर- 90
- चंदौली- 32
