विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सूर्य-केतु युति और मघा नक्षत्र प्रवेश से मचेगी हलचल, राजनीति में भूचाल और बड़े बदलाव के संकेत

By Vns Shailesh Asthana Edited By: Abhishek sharma
Published: Tue, 25 Aug 2026 05:21 AM (IST)

सूर्य और केतु की युति तथा मघा नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश से 17 अगस्त से 16 सितंबर के बीच ...और पढ़ें

सूर्य-केतु युति और मघा नक्षत्र प्रवेश: राजनीति में बड़े बदलावों के योग।

सूर्य-केतु युति और मघा नक्षत्र प्रवेश: राजनीति में बड़े बदलावों के योग।

HighLights

  1. 17 अगस्त से 16 सितंबर तक सूर्य-केतु की युति।

  2. राजनीति और प्रशासन में बड़े बदलावों के संकेत।

  3. पुराने भूले-बिसरे मुद्दे फिर से सतह पर आ सकते हैं।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। ज्योतिषीय आकाश मंडल में एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावकारी खगोलीय स्थिति का निर्माण हुआ है। 17 अगस्त से 16 सितंबर के बीच ग्रहों के राजा सूर्य और छाया ग्रह केतु की युति (कंजंक्शन) बन रही है।

इसके साथ ही, विशेष रूप से 17 अगस्त से 30 अगस्त के बीच सूर्य अपनी स्थिति बदलते हुए अश्लेषा नक्षत्र से निकलकर केतु के स्वामित्व वाले मघा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।

ज्योतिषीय आकलनों के अनुसार, इस विशिष्ट युति और नक्षत्र परिवर्तन का सबसे बड़ा और सीधा असर देश की राजनीति और शासन-प्रशासन के उच्च स्तर पर देखने को मिल सकता है।

राजनीतिक गलियारों में बड़े नेताओं के स्थान परिवर्तन के योग
ज्योतिषाचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि इस अवधि के दौरान राजनीतिक पटल पर उठापटक तेज हो सकती है। देश और राज्यों की राजनीति में बड़े नेताओं के स्थान परिवर्तन, विभागों में फेरबदल या सांगठनिक स्तर पर बड़े निर्णय लिए जाने की पूरी संभावना है। सत्ता के गलियारों में अचानक होने वाले ये बदलाव राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे सकते हैं।

पुराने भूले-बिसरे मुद्दे आएंगे सामने
आचार्य दैवज्ञ का कहना है कि इन चौदह दिनों (17 अगस्त से 30 अगस्त) के दौरान सबसे असामान्य और गौर करने वाली बात यह होगी कि राजनीति और सामाजिक जीवन में पुराने भूले-बिसरे और दबे हुए मुद्दे अचानक पुनः सतह पर आ सकते हैं। विरोधियों द्वारा पुराने मामलों को तूल दिए जाने से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

  • क्रोध और वाणी पर संयम: इस समयावधि में ग्रहों की स्थिति के कारण मानसिक उत्तेजना और तनाव बढ़ सकता है। अतः क्रोध से बचना और सोच-समझकर निर्णय लेना ही बुद्धिमत्ता होगी।
  • बड़े स्तर पर बदलाव के संकेत: यह समय केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर बड़े बदलावों और उलटफेर का संकेत दे रहा है।

संकट से मुक्ति का मार्ग: "शंकर रटेंगे तो संकट कटेंगे"
ज्योतिषीय और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जब भी बड़े ग्रह गोचर या युति बनाते हैं, तो दुनिया भर में उथल-पुथल की स्थिति बनती है। ऐसे में मानसिक शांति, संयम और आत्मबल बनाए रखने के लिए आध्यात्मिक स्मरण को सबसे बड़ा संबल माना गया है। जैसा कि संत और विद्वान कहते आए हैं—"शंकर रटेंगे तो संकट कटेंगे"—इस कालखंड में ईश्वरीय आराधना और शिव स्मरण से न केवल मानसिक शांति मिलेगी, बल्कि हर प्रकार की बाधाओं और संकटों से पार पाने की शक्ति भी प्राप्त होगी।