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    सारनाथ में बोले केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत - 'पर्यटकों और बौद्ध अनुयायियों के लिए बढ़ाई जाएंगी सुविधाएं'

    By pandey jayprakash(01) Edited By: Abhishek sharma
    Updated: Tue, 04 Aug 2026 04:16 PM (IST)

    केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सारनाथ में पर्यटकों और बौद्ध अनुयायियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने की घोषणा की, जिसमें यूनेस्को विश्व धरोहर सूची मे ...और पढ़ें

    सारनाथ में बढ़ेंगी पर्यटकों और बौद्ध अनुयायियों की सुविधाएं, मंत्री शेखावत का ऐलान।

    सारनाथ में बढ़ेंगी पर्यटकों और बौद्ध अनुयायियों की सुविधाएं, मंत्री शेखावत का ऐलान।

    HighLights

    1. सारनाथ में पर्यटकों और बौद्ध अनुयायियों की सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।

    2. बहुभाषी क्यूआर कोड और अस्थायी ध्यान केंद्र बनेंगे।

    3. अवैध निर्माण पर मंत्री ने जताई नाराजगी, संरक्षण पर जोर।

    जागरण संवाददाता, वाराणसी। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मंगलवार को पुरातात्विक खंडहर परिसर का निरीक्षण करने के साथ कहा कि यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद सारनाथ में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और बौद्ध अनुयायियों के लिए सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।

    विश्व धरोहर पट्टिका और पुरातात्विक स्मारकों के आसपास लगाए जाने वाले क्यूआर कोड में भारतीय भाषाओं के साथ प्रमुख विदेशी भाषाओं को भी शामिल करने पर जोर दिया। क्यूआर कोड में 22 भारतीय भाषाओं के साथ जापानी, कोरियाई, चीनी, थाई, कंबोडियाई, श्रीलंका, म्यामार समेत अन्य बौद्ध देशों की भाषाओं में भी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

    आने वाले बौद्ध अनुयायी और पर्यटक अपने मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर सारनाथ के इतिहास, पुरातात्विक महत्व और भगवान बुद्ध से जुड़े इतिहास की जानकारी आसानी से हासिल कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि बौद्ध अनुयायियों के पूजा-पाठ और ध्यान के लिए पुरातत्व विभाग के मानकों के अनुरूप अस्थायी ध्यान केंद्र बनाने का सुझाव दिया।

    भगवान बुद्ध ने सारनाथ से धर्मचक्र प्रवर्तन का संदेश सारनाथ से दिया। यहीं से पूरे विश्व को शांति, करुणा और मानवता का संदेश निकला। सारनाथ की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। इससे यहां आने वाले पर्यटकों और बौद्ध अनुयायियों की संख्या बढ़नी तय है, ऐसे में पर्यटकों की सुविधा और धरोहर के संरक्षण पर विशेष जोर देना होगा।

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    उन्होंने कहा कि गर्मी, सर्दी और बरसात के मौसम में बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी सारनाथ पहुंचते हैं। उनके लिए पूजा-पाठ और ध्यान की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। काशी भगवान महादेव की नगरी है, जबकि सारनाथ बौद्ध धर्म की प्रमुख स्थली है।

    काशी और सारनाथ की धार्मिक व आध्यात्मिक पहचान भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को विश्व के सामने प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयास से सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने का गौरव मिला है। अब इस गौरव को बनाए रखने के लिए स्मारकों के संरक्षण के साथ पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी।


    अवैध निर्माण के लिए स्थानीय पुरातत्व व प्रशासन जिम्मेदार

    सारनाथ में स्मारकों के आसपास हुए अवैध निर्माण पर केंद्रीय मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पुरातात्विक स्मारकों के आसपास अवैध निर्माण को लेकर स्थानीय पुरातत्व अधिकारियों और प्रशासन की जिम्मेदारी तय होगी। विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद धरोहर क्षेत्र और उसके आसपास संरक्षण नियमों का सख्ती से पालन कराना जरूरी है।

    मंत्री के साथ यूनेस्को में भारत के स्थायी सदस्य व राजदूत विशाल वी. शर्मा रहे। मंत्री के पुरातात्विक खंडहर परिसर पहुंचने पर सहायक संरक्षण अधिकारी राजू ने उनका स्वागत किया। इस दौरान उपनिदेशक पर्यटन दिनेश कुमार, केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के कुलपति प्रो. वांगचुक दोरजे नेगी, कुलसचिव डा. सुनीता चंद्रा, डा. सुशील सिंह, पर्यटन अधिकारी नितिन द्विवेदी और सुनील कुमार आदि साथ रहे।