कुमाऊं में सेब उत्पादन में बंपर बढ़त, नई तकनीक से कम रकबे में भी रिकॉर्ड कमाई कर रहे बागवान
कुमाऊं में बागवानी का रकबा घटने के बावजूद फल उत्पादन में 90.4% की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

उत्पादन में ये वृद्धि हाई डेंसिटी प्लांटिंग और वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग का परिणाम है, जिससे प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ी है।
HighLights
कम रकबे में भी कुमाऊं में फल उत्पादन 90.4% बढ़ा।
हाई डेंसिटी प्लांटिंग और वैज्ञानिक तकनीकें बनीं वृद्धि का आधार।
अल्मोड़ा जिला और रामनगर ब्लॉक फल उत्पादन में अग्रणी।
संतोष बिष्ट, अल्मोड़ा। कुमाऊं के 6 जिलों में बागवानी का रकबा लगातार सिमट रहा है, लेकिन फल उत्पादन के आंकड़े एक नई तस्वीर पेश कर रहे हैं। कम होते बागानों के बावजूद कुमाऊं में फल उत्पादन करीब 90.4 प्रतिशत बढ़ गया है। यानी अब कम जमीन में भी पहले से कहीं अधिक फल पैदा हो रहे हैं। हाई डेंसिटी प्लांटिंग, उन्नत पौधों और वैज्ञानिक बागवानी तकनीकों ने उत्पादन बढ़ाने की संभावनाओं को नई दिशा दी है।
सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग की शोधार्थी निशा टम्टा ने कुमाऊं क्षेत्र में बागवानी के विकास पर शोध किया। शोध के अनुसार वर्ष 2001-02 से 2020-21 के आंकड़ों के अनुसार कुमाऊं में फल उत्पादन का क्षेत्रफल 81,564 हेक्टेयर से घटकर 71,250 हेक्टेयर रह गया। इसके बावजूद उत्पादन 2,01,762 मीट्रिक टन से बढ़कर 3,84,162 मीट्रिक टन पहुंच गया। प्रति हेक्टेयर उत्पादकता भी 2.47 से बढ़कर 5.39 मीट्रिक टन हो गई।
हालांकि उत्पादन बढ़ने के बावजूद बागवानी के सामने श्रमिकों की कमी, सिंचाई, गुणवत्तापूर्ण पौध, तकनीकी प्रशिक्षण, भंडारण और विपणन जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। शोध के अनुसार ड्रिप सिंचाई, जल संरक्षण, स्थानीय जलवायु के अनुकूल प्रजातियों और वैज्ञानिक बाग प्रबंधन को बढ़ावा देकर पहाड़ों में बागवानी को ग्रामीण रोजगार और आय का मजबूत आधार बनाया जा सकता है।
अल्मोड़ा जिले में सबसे अधिक उत्पादन
वर्ष 2020-21 के आंकड़ों के अनुसार कुमाऊं में सबसे अधिक उत्पादन में अल्मोड़ा जिला प्रथम और ब्लाकों में रामनगर ब्लाक प्रथम स्थान पर हैं। लमगड़ा में 2,592 हेक्टेयर में 19,256 मीट्रिक टन, बागेश्वर में 1,247 हेक्टेयर में 5,257 मीट्रिक टन, नैनीताल के रामनगर में 2,649 हेक्टेयर में 25,590 मीट्रिक टन, पिथौरागढ़ के कनालीछीना 2,616 हेक्टेयर में 8,654 मीट्रिक टन, चंपावत में 3,298 हेक्टेयर में 5,261 मीट्रिक टन, ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर 1,997 हेक्टेयर में 12,215 मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा है।
यहां इन फलों का हो रहा उत्पादन
लमगड़ा में आड़ू, नाशपाती एवं सेब, बागेश्वर में आम एवं खट्टे फल, नैनीताल जिला के रामनगर ब्लाक, आम एवं लीची, पिथौरागढ़ के कनालीछीना ब्लाक खट्टे फल, नाशपाती एवं आम, चंपावत ब्लाक आम एवं खट्टे फल, ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर ब्लाक में आम एवं अमरूद का सबसे अधिक उत्पादन हो रहा है।
वैज्ञानिक बागवानी से बदलेगी तस्वीर
शोध में जल संरक्षण, ड्रिप सिंचाई, वैज्ञानिक तरीके से बागों के प्रबंधन और स्थानीय जलवायु के अनुकूल फल प्रजातियों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई गई है।
कृषि का रकबा घटने के साथ उत्पादन भी हो रहा कम
अल्मोड़ा: पहाड़ में जहां बागवानी का रकबा कम हो रहा है, लेकिन उत्पादन बढ़ रहा है, पर इसके उलट कृषि का रकबा घटने के साथ लगातार उत्पादन भी घट रहा है। पिछले पांच से छह वर्षों में पर्वतीय जिलों में खेती का रकबा करीब एक तिहाई घट चुका है। अल्मोड़ा में ही सात सालों में 30752 हेक्टेयर क्षेत्रफल कम हुआ है।
अल्मोड़ा के मुख्य उद्यान अधिकारी युवराज सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन का फलों की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। हालांकि गुणवत्ता पर असर ना हो इसके लिए सरकार की ओर से उपाय किए जा रहे हैं। तकनीकी में बदलाव किया जा रहा है। कृषकों को नई तकनीकी अपनानी चाहिए। जिससे की विपरीत जलवायु में भी गुणवत्ता बनाई रखी जा सके।
शोध निदेशक डॉ. दीपक का कहना है कि कुमाऊं क्षेत्र में फल उत्पादन का क्षेत्रफल 12.64 प्रतिशत घटा, जबकि कुल उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि हुई। इसका प्रमुख कारण उच्च सघनता वाली बागवानी, उन्नत पौध किस्मों और वैज्ञानिक बाग प्रबंधन का बढ़ता उपयोग है।
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