चमोली के तमक नाले का आपदा से रहा है पुराना इतिहास, धौली गंगा का जल प्रभाव रोक कर बनी थी झील
तमक नाले में पुल बहने की घटनाएँ नई नहीं हैं, इसका आपदाओं से पुराना इतिहास रहा है, जिससे नीती घाटी ...और पढ़ें

धौली गंगा का जल प्रभाव रोक कर बनी थी झील।
HighLights
तमक नाले में पुल बहने की घटनाएँ आपदा का पुराना इतिहास।
नीती घाटी के 14 से अधिक गाँवों का संपर्क फिर टूटा।
सीमा पर सेना और आईटीबीपी की आवाजाही भी बाधित।
संवाद सहयोगी, गोपेश्वर। तमक नाले में आपदा की घटनाएं कोई नई नहीं है। यहां पर पहले भी कई बार पुल बह चुके हैं। बीआरओ ने समस्या के समाधान के लिए आरसीसी पुल भी बनाया था, जो उंची हाइट होने के साथ सुरक्षित मानको पर था लेकिन साल पहले बह गया।
फिर यहां पर अस्थाई ह्यूम पाईप के जरिए पानी निकासी कराकर अस्थाई सड़क बनाई गई और वैली ब्रिज लगाकर यातायात सुचारू किया गया लेकिन अब इसके बहने से फिर एक बार सीमा क्षेत्र में यातायात बाधित हो गया है।
जोशीमठ के तमक नाले में बाढ़ की दो पहले हो चुकी है। 31 अगस्त 2025 भारी बारिश के कारण तमक नाले में बाढ़ आई और ज्योतिर्मठ-मलारी राजमार्ग पर बना सीमेंट-कंक्रीट का पुल बह गया।

इससे नीति घाटी के एक दर्जन से ज्यादा गांवों और सीमा पर तैनात सेना का मोटर संपर्क टूट गया था इसी तमक नाले से लगभग पांच किमी आगे जुम्मा मोटर पुल भी तीन साल पहले इसी तरह बाढ़ में बह गया थाजोशीमठ-मलारी हाईवे तमक नाला नीति घाटी की आवाजाही के लिए मुख्य स्थान है पुल से पूरी नीती घाटी कट जाता है।
तमक में पुल बहने से नीती घाटी के तमक, जुम्मा, कागा, गरपक, द्रोणागिरी, जेलम, कोषा, मलारी, कैलाशपुर, मेहरागांव, फर्किया, बांपा, गामशाली सहित 14 से अधिक गांवों का संपर्क टूट गया है।
इसके अलावा भारत-चीन सीमा पर तैनात भारत तिब्बत सीमा पुलिस , सेना की चौकियों की आवाजाही भी बाधित हो गई है। सेना के लिए नीती घाटी व सुमना घाटी जाने के लिए यह एकमात्र सड़क मार्ग है।

तमक नाले मे आपदा का पुराना इतिहास रहा है। तमक गांव के लोग बताते हैं किइसका उद्गम तमक नाले के बुग्याल क्षेत्र में होता है। ये बुग्याल नीति घाटी के ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में पड़ते हैं।
इस पुल के कुछ दूरी पर ही तमक नाला आगे चलकर धौली गंगा में मिल जाता है। धौलीगंगा ही जोशीमठ के पास अलकनंदा से मिलती है बरसात में बुग्याल क्षेत्र से बहुत पानी आने के कारण इसका जलस्तर अचानक बढ़ जाता है और बाढ़ आ जाती है।
दो सालों में तमक नाले के उफान पर आने से धौली गंगा में झील की स्थिति भी बनी थी। जिसमें प्रशासन को शीतकाल में जेसीबी मशीनों से धौली गंगा में मलबे को हटाकर झील का रिसाव करना पड़ा था। इस झील को लेकर वैज्ञानिकों ने चिंता भी व्यक्त की थी।
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