उत्तराखंड के रूपकुंड ट्रेक और आली-वेदनी बुग्याल पर बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हटी 8 साल पुरानी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने चमोली के आली-वेदनी बुग्याल और रूपकुंड ट्रेक पर रात्रि प्रवास व पर्यटक संख्या की पाबंदी हटाई है। ...और पढ़ें

चमोली जिले में स्थित आली-वेदनी बुग्याल। साभार: वन विभाग
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने बुग्यालों में रात्रि प्रवास की रोक हटाई
आली-वेदनी और रूपकुंड ट्रेक पर पर्यटक संख्या प्रतिबंध भी समाप्त
स्थानीय पर्यटन कारोबारियों और होमस्टे संचालकों को बड़ी राहत मिली
संवाद सूत्र, कर्णप्रयाग (चमोली)। चमोली जिले के आली-वेदनी बुग्याल और रूपकुंड ट्रेक को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से सीमांत क्षेत्र में होमस्टे संचालकों और पर्यटन कारोबारियों को बड़ी राहत मिली है।
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने यहां वर्ष 2018 से पर्यटकों की संख्या सीमित करने के साथ ही रात्रि प्रवास पर रोक लगाई थी। इस रोक के हटने से होटल, होमस्टे व घोड़ा-खच्चर संचालकों के साथ ही ट्रेक गाइड, पोर्टर और स्थानीय दुकानदारों में उत्साह है।
आदेश की प्रति मिलने के बाद बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ ने सभी वन क्षेत्राधिकारियों को इसके अनुपालन के निर्देश जारी कर दिए हैं।
उत्तराखंड हाई कोर्ट के 21 अगस्त 2018 को बुग्यालों में प्रतिदिन सिर्फ 200 पर्यटकों को ही जाने की अनुमति देने के साथ वहां रात्रि प्रवास पर प्रतिबंध लगा दिया था।
इसके अलावा अदालत ने बुग्यालों को राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य घोषित करने पर विचार करने का आदेश भी दिया था। इससे न केवल पर्यटकों की संख्या घटी, बल्कि रात्रि प्रवास बंद होने से पर्यटन कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ।
इस आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और लगभग आठ साल तक चली सुनवाई के बाद 20 जुलाई को अदालत ने तीन प्रतिबंध हटाने के आदेश जारी कर दिए।
नंदा देवी राजजात समिति के महामंत्री भुवन नौटियाल ने बताया कि वेदनी और आली बुग्याल केवल प्राकृतिक धरोहर ही नहीं, देवाल, लोहाजंग, वाण, मुंदोली, कुलिंग, कनोल, डिडना जैसे गांवों की आर्थिकी की रीढ़ भी हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला निश्चित रूप से उम्मीद जगाने वाला है।
लाटूधाम के अध्यक्ष कृष्णा बिष्ट कहते हैं कि संतुलित नियमों के साथ पर्यटन और पर्यावरण दोनों बचाए जा सकते हैं। लोहाजंग के होटल संचालकों व ट्रेक गाइड और पोर्टर संगठन को भी उम्मीद है कि प्रतिबंध हटने से सीजन में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।
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यथावत रहेंगे पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रतिबंध
वर्ष 2014 में आली-वेदनी-बुग्याल संरक्षण समिति ने उत्तराखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अनियंत्रित पर्यटन और कचरे से पारिस्थितिकी को नुकसान का मुद्दा उठाया था।
हाई कोर्ट ने वर्ष 2018 में इसे लेकर कड़े निर्देश दिए थे। हालांकि, सुप्रीम कोई के आदेश के बाद भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़े हाई कोर्ट के शेष सभी निर्देश पहले की तरह लागू रहेंगे।
अदालत ने पर्यटकों की संख्या सीमित करने व रात्रि प्रवास पर रोक समेत तीन प्रतिबंध ही हटाए हैं।
बुग्याली क्षेत्र में प्रतिदिन 200 से अधिक पर्यटकों के जाने, रात्रि प्रवास की अनुमति और रूपकुंड ट्रेक को नई गति मिलने से सीमांत गांवों की आजीविका को बड़ा सहारा मिलेगा।
- भूपाल राम टम्टा, विधायक, थराली
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