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    उत्तराखंड: फूलों की घाटी में सघन गश्त, ट्रैप कैमरों में कैद हुए स्नो लेपर्ड समेत अन्य दुर्लभ वन्यजीव

    Updated: Tue, 24 Feb 2026 07:11 PM (IST)

    नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क की फूलों की घाटी रेंज में छह दिवसीय सघन गश्त अभियान चलाया गया।टीम ने ट्रैप कैमरों में हिम तेंदुआ, कस्तूरी मृग और मोनाल सहित ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर।

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    संवाद सहयोगी, गोपेश्वर (चमोली)। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के अंतर्गत फूलों की घाटी रेंज ने उच्च हिमालयी क्षेत्र की सुरक्षा और वन्यजीवों की निगरानी के लिए छह दिवसीय सघन गश्त अभियान चलाया।

    इस दौरान टीम ने ट्रैप कैमरों में स्नो लैपर्ड समेत अन्य दुर्लभ वन्यजीव कैद किए। यह अभियान मुख्य रूप से शीतकाल के दौरान अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने और वन्यजीवों के पारिस्थितिकी तंत्र का अध्ययन करने के उद्देश्य से चलाया गया था।

    खासतौर पर शीतकाल में फूलों की घाटी रेंज में लगी आग के बाद यह गश्त महत्वपूर्ण थी।

    गश्ती टीम बीते दिनों गोविंदघाट रेंज कार्यालय से रवाना हुआ था। टीम ने घांघरिया और फूलों की घाटी के मुख्य क्षेत्रों का सघन भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

    गश्ती टीम ने भ्यूंडार घाटी के दुर्गम क्षेत्र सिमर टोली तक निरीक्षण किया।

    निम्न वन्यजीवों हुए कैमरे में कैद

    • स्नो लेपर्ड
    • कस्तूरी मृग
    • राज्य पक्षी मोनाल
    • गुलदार
    • लेपर्ड कैट
    • भालू
    • हिमालयन सेरो
    • हिमालयन थार
    • यलो थ्रोटेड मार्टिन
    • रेड फाक्स 

    गश्त करने वाली टीम में अनुभाग अधिकारी जय प्रकाश, वन वीट अधिकारी नरेंद्र सिंह, सुशील चौहान, नागेंद्र सिंह, अजय सिंह रावत, वन आरक्षी अरविंद सिंह, प्रीतम सिंह, मनोज भट्ट आदि शामिल रहे।

    ड्रोन सर्वे एवं आधुनिक निगरानी

    निरीक्षण के दौरान फूलों की घाटी, घांघरिया व भ्यूंडार क्षेत्रों में ड्रोन से हवाई सर्वेक्षण किया गया। ड्रोन से ली गई तस्वीर और वीडियो के विश्लेषण से उन दुर्गम क्षेत्रों की भी निगरानी संभव हो पाई, जहां मानवीय पहुंच कठिन है।

    संपूर्ण गश्त और ड्रोन सर्वे के दौरान पार्क क्षेत्र के भीतर किसी भी प्रकार की अवैध मानवीय गतिविधि अतिक्रमण या शिकार के साक्ष्य नहीं मिले हैं।

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