चमोली में पर्यटकों के लिए खुली रंग-बिरंगे फूलों की घाटी, 1931 में फ्रैंक स्माइथ ने की थी खोज; टिकट और टाइमिंग
चमोली जिले में स्थित विश्व धरोहर फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खुल गई है, जो 31 अक्टूबर तक खुली रहेगी। यह 12,995 फीट की ऊंचाई पर 500 से अधिक रंग-बिरंग ...और पढ़ें

विश्व धरोहर फूलों की घाटी।
HighLights
फूलों की घाटी 31 अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुली।
12,995 फीट ऊंचाई पर 500 से अधिक फूल।
1931 में फ्रैंक स्माइथ ने की थी खोज।
जागरण संवाददाता, गोपेश्वर (चमोली)। उत्तराखंड के चमोली जिले में समुद्रतल से 12,995 फीट की ऊंचाई पर 87.5 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली विश्व धरोहर फूलों की घाटी सोमवार सुबह आठ बजे पर्यटकों के लिए खोल दी गई है। 20 से अधिक पर्यटक घाटी के बेस कैंप घांघरिया से रवाना हो चुके हैं।
अभी घाटी की सैर के लिए ऑफलाइन पंजीकरण किए जा रहे हैं। यह 31 अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुली रहेगी। घाटी के दीदार के लिए भारतीय पर्यटक के लिए 200, छात्र और 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए 100 और विदेशी पर्यटकों के लिए 800 रुपये प्रति पर्यटक शुल्क रखा गया है।
500 से अधिक रंग-बिरंगे फूल
यहां जैवविविधता का खजाना बिखरा हुआ है। 500 से अधिक रंग-बिरंगे फूलों के साथ यह घाटी दुर्लभ वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास भी है। घाटी की विशेषता यह है कि यहां हर 15 दिन में अलग-अलग प्रजाति के फूल खिलते हैं। यहां जाने के लिए ज्योतिर्मठ के पुलना से घांघरिया तक 10 किमी का पैदल चलना पड़ता है।
इसकी खोज 1931 में ब्रिटिश पर्वतारोही वनस्पति शास्त्री फ्रैंक स्माइथ ने की थी
यहां से घाटी तीन किमी के फासले पर है। रुकने की अनुमति न होने के कारण शाम पांच बजे तक घांघरिया लौटना पड़ता है।घाटी को 1982 में राष्ट्रीय पार्क और 2005 में यूनेस्को की धरोहर घोषित किया गया। इसकी खोज 1931 में कामेट पर्वतारोहण के लिए गए ब्रिटिश पर्वतारोही वनस्पति शास्त्री फ्रैंक स्माइथ ने की थी।