चंपावत सामूहिक दुष्कर्म: बेटी के बुजुर्ग पिता का दर्द, बोले- 'दरिंदों का खून पीने से मिलेगा सुकून'
चंपावत में सामूहिक दुष्कर्म का शिकार हुई 10वीं की छात्रा के 70 वर्षीय बीमार पिता ने दरिंदों के प्रति गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, चंपावत । संतान का सुख और उसकी रक्षा हर मां-बाप के लिए सर्वोपरि होता है। खासकर तब जब विवाह के बाद संतानहीन दंपति को अधेड़ अवस्था में मां-बाप बनने का सौभाग्य मिले।
52 वर्ष की आयु में पिता बने बुजुर्ग की इकलौती संतान को दरिंदों ने अपने हवस का शिकार बना दिया। पीड़ित पिता बिलखते और कराहते हुए सिर्फ एक बात कहते रहे, कि उनकी बेटी जिंदा तो है या दरिंदोें ने जान ले ली।
दूरस्थ गांव के बुजुर्ग पीड़िता के पिता ने बताया कि विवाह के बाद उन्हें कोई संतान न थी। दंपति ने संतान प्राप्ति के लिए हजारों-लाखों मिन्नते मांगी, तब जब वह अधेड़ हुए और 52 वर्ष की आयु में पुत्री हुई, तो दोनों ने मिलकर उसपर सारी खुशियां न्यौछावर कर दी।
बीमारी के चलते उसकी मां का देहांत
मजदूरी, खेती बाड़ी कर भरण पोषण करने के साथ ही सब खुशहाल थे। लेकिन भगवान को शायद यह खुशी मंजर न थी। बुजुर्ग ने बताया कि उसकी पुत्री जब मात्र छह माह की थी तो बीमारी के चलते उसकी मां का देहांत हो गया। घर में अब सिर्फ उनकी पुत्री और वह स्वयं रहे।
पत्नी की मृत्यु के बाद भी उन्होंने हिम्मत न हारी और अपनी छाती से लगाए पुत्री का पालन पोषण से लेकर शिक्षा दिलाना आरंभ किया। अब बिटिया कक्षा 10वीं में पढ़ाई करने लगी। बताया कि कुछ समय पहले वह बीमार हुए और कमर के नीचे से बुजुर्ग चलने फिरने में असहाय हो गए। जिसके बाद उनकी पुत्री गांव से उन्हें चंपावत शहर ले आई।
दुकान पर काम करती थी पीड़िता
किराए पर कमरा लेकर खुद पढ़ाई के साथ एक दुकान पर काम करने लगी। जिससे घर का खर्च, पिता का इलाज सब हो सके। इस घटना ने तब सबको झकझोर दिया, जब कोतवाली में शिकायत लिखने के दौरान बुजुर्ग पिता ने अपनी बेटी के लिए खैरियत पूछी। साथ ही एक ही विनती करता रहा, कि मेरा पैर ठीक नहीं है, कमर के नीचे से अशक्त हूं, इसलिए मुझे एक बार उन दरिंदों के पास ले चलो, मैं बस उनका खून पीना चाहता हूं, तब सुकुन मिलेगा।