उत्तराखंड: भूतिया गांव स्वाला में रील्स बनाने वालों की एंट्री बैन, PAC जवानों के वाहन दुर्घटना से जुड़ा है रहस्य
चंपावत के स्वाला गांव ने 'भूतिया गांव' की सनसनी फैलाने वाले ब्लॉगरों और यूट्यूबरों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। ...और पढ़ें

स्वाला गांव। यहां प्रवेश द्वार के पास ग्राम पंचायत की ओर से चेतावनी बोर्ड लगाया गया है। जागरण
HighLights
स्वाला गांव में ब्लॉगरों, यूट्यूबरों के प्रवेश पर प्रतिबंध
'भूतिया गांव' की भ्रामक कहानियों पर रोक लगाने का प्रयास
गांव की वास्तविक पहचान, संस्कृति को बढ़ावा देने का लक्ष्य
जागरण संवाददाता, चंपावत। टनकपुर-चंपावत राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित रहस्यमयी स्वाला गांव में अब 'भूतिया गांव' के नाम पर सनसनी फैलाने वालों की एंट्री पर ग्राम पंचायत ने सख्त रोक लगा दी है।
गांव के प्रवेश मार्ग पर बड़ा चेतावनी बोर्ड लगाकर साफ कर दिया गया है कि बिना अनुमति किसी भी ब्लॉगर, यूट्यूबर, न्यूज चैनल, सोशल मीडिया क्रिएटर या रील बनाने वाले व्यक्ति को गांव में प्रवेश नहीं मिलेगा।
गांव के संबंध में भ्रामक और तथ्यहीन सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की भी चेतावनी दी गई है।

स्वाला गांव वर्षों से रहस्य, डर और लोककथाओं के कारण देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इंटरनेट मीडिया के दौर में यह गांव 'हॉन्टेड विलेज' और 'भूतिया गांव' जैसे शीर्षकों के साथ लाखों लोगों तक पहुंचा।
इसके बाद यहां कंटेंट बनाने वालों की आवाजाही लगातार बढ़ती गई। कई यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर गांव में पहुंचकर डरावने वीडियो और कथित पैरानॉर्मल गतिविधियों के दावे करते रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे अधिकांश वीडियो तथ्यों पर आधारित नहीं होते, बल्कि अधिक व्यूज और लोकप्रियता हासिल करने के लिए गांव की गलत तस्वीर पेश करते हैं। इससे गांव की प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है और स्थानीय लोग भी असहज महसूस कर रहे हैं।
चंपावत जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित स्वाला गांव का नाम वर्ष 1952 में हुई पीएसी जवानों के वाहन हादसे के बाद रहस्यमयी कहानियों से जुड़ गया।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, दुर्घटना के बाद कई तरह की कथाएं प्रचलित हुईं, जिन्हें समय के साथ इंटरनेट मीडिया ने और बढ़ा दिया।

हालांकि गांव के बुजुर्ग इन दावों को खारिज करते हुए बताते हैं कि गांव के वीरान होने की असली वजह सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव तथा पलायन रहा है।
पुराने मकान खाली होने के कारण आज वे खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। ग्राम पंचायत का कहना है कि गांव को अंधविश्वास और अफवाहों की पहचान से बाहर निकालना जरूरी है।
पंचायत चाहती है कि स्वाला की पहचान उसके वास्तविक इतिहास, संस्कृति और सामाजिक विरासत से हो, न कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही सनसनी से।
इसी उद्देश्य से प्रवेश प्रतिबंध और चेतावनी बोर्ड लगाया गया है। पंचायत ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति वीडियो शूटिंग, रील निर्माण या गांव के बारे में भ्रामक जानकारी प्रसारित करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
क्या लिखा है चेतावनी बोर्ड पर
- बिना आज्ञा प्रवेश निषेध।
- सभी न्यूज चैनल, सोशल मीडिया क्रिएटर्स और रील बनाने वालों का प्रवेश वर्जित।
- गांव के बारे में भ्रामक बातें फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी।
- आदेश ग्राम प्रधान, ग्राम सभा स्वाला की ओर से जारी।
क्यों चर्चित है स्वाला गांव
- वर्ष 1952 में पीएसी जवानों के वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद चर्चाओं में आया।
- वर्षों से 'भूतिया गांव' की कहानियों के कारण लोगों की उत्सुकता का केंद्र।
- सोशल मीडिया पर हजारों वीडियो और रील बनने के बाद देशभर में पहचान मिली।
- स्थानीय लोग पलायन और सुविधाओं की कमी को गांव के वीरान होने का वास्तविक कारण बताते हैं।
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