राम मंदिर के बाद अब बदरीनाथ धाम चढ़ावा विवाद, बीकेटीसी सख्त; दोषी पर होगी कार्रवाई
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने बदरीनाथ धाम में चढ़ावे और दान में कथित हेराफेरी के वायरल आरोपों को गंभीरता से लिया है। ...और पढ़ें

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा, कोई कर्मचारी दोषी पाया गया तो कार्रवाई होगी।

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राज्य ब्यूरो, देहरादून। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने इंटरनेट मीडिया पर श्री बदरीनाथ धाम में चढ़ावे और दान में कथित हेराफेरी से जुड़े वायरल आरोपों को गंभीरता से लिया है।
मंदिर समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि आंतरिक जांच समिति गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यदि जांच में कोई भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इंटरनेट मीडिया पर चल रही बातों का खंडन
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इंटरनेट मीडिया पर चल रही बातों का खंडन करते हुए कहा जिस कर्मचारी को उनका निजी सचिव बताया जा रहा है, वह उनका निजी सचिव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित कर्मचारी मंदिर समिति का नियमित सरकारी कर्मचारी है। वह पूर्व में समिति के तीन अध्यक्षों के साथ वैयक्तिक सहायक के रूप में कार्य कर चुका है।
उन्होंने कहा कि यदि इंटरनेट मीडिया में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
वहीं बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि वायरल आरोपों के बाद बदरीनाथ मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई गई है। उपलब्ध फुटेज में अपेक्षित स्पष्टता नहीं मिल पाई है, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरी जानकारी समिति अध्यक्ष को उपलब्ध करा दी गई है।
अपुष्ट या भ्रामक आरोपों से बचना चाहिए
मुख्य कार्याधिकारी ने कहा कि अध्यक्ष के निर्देशों के बाद संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। मामले की विस्तृत जांच के लिए आंतरिक जांच समिति गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। समिति उपलब्ध साक्ष्यों, तथ्यों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
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बीकेटीसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े विश्वविख्यात श्री बदरीनाथ धाम से संबंधित है, इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी भी प्रकार के अपुष्ट या भ्रामक आरोपों से बचना चाहिए, ताकि धाम की गरिमा और छवि प्रभावित न हो।