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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 04, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

साठ दिन बाद काम पर लौटीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मांगे पूरी न होने पर फिर होगा आंदोलन शुरू

By Raksha PanthariEdited By:
Updated: Tue, 04 Feb 2020 08:25 PM (IST)

सीएम से मांगों को पूरा करने का आश्वासन मिलने के बाद मंगलवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने धरना और आमरण अनशन स्थगित कर दिया है। साथ ही काम पर लौट गई हैं।

साठ दिन बाद काम पर लौटीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मांगे पूरी न होने पर फिर होगा आंदोलन शुरू
साठ दिन बाद काम पर लौटीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मांगे पूरी न होने पर फिर होगा आंदोलन शुरू

देहरादून, जेएनएन। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की ओर से मांगों को पूरा करने के आश्वासन के बाद मंगलवार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने धरना और आमरण अनशन स्थगित कर दिया और काम पर लौट गईं। वह बीती सात दिसंबर से परेड ग्राउंड में धरने पर बैठी थीं और दस जनवरी से आमरण अनशन शुरू कर दिया था। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने एक बार सचिवालय और दो बार मुख्यमंत्री आवास कूच किया था। आंगनबाड़ी कार्यकत्री, सेविका, मिनी कर्मचारी संगठन की प्रदेश अध्यक्ष रेखा नेगी का कहना है कि धरना और अनशन दस मार्च तक के लिए स्थगित किया है। मांगे पूरी नहीं हुईं तो फिर से आंदोलन आरंभ कर देंगी।

मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर महापौर सुनील उनियाल गामा और भाजपा महानगर अध्यक्ष सीताराम भट्ट मंगलवार दोपहर परेड ग्राउंड स्थित धरनास्थल पहुंचे। महापौर ने कहा कि मुख्यमंत्री उनकी मांगों को लेकर गंभीर हैं और इस बारे में केंद्र सरकार को भी पत्र भेजा है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि सरकार उनकी मांगों को लेकर कमेटी बनाएगी। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद उनकी समस्याओं के समाधान ही हरसंभव कोशिश होगी।

 

उन्होंने यह भी कहा कि जिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवाएं समाप्त की गई हैं, उन्हें भी काम पर वापस लिया जाएगा और जितने समय वह काम पर नहीं गईं उस अवधि का मानदेय दिलाने का भी प्रयास किया जाएगा। इसके बाद महापौर ने आमरण अनशन पर बैठी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुरजि नेगी और रज्जू बुटोला को जूस पिलाकर अनशन खत्म कराया। संगठन की प्रदेश अध्यक्ष रेखा नेगी ने कहा कि हम अपना धरना और अनशन 10 मार्च तक के लिए स्थगित कर रही हैं। 

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बर्खास्त की गई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा बहाल करने समेत अन्य मांगों पर यदि तब तक विचार नहीं हुआ तो दोबारा आंदोलन आरंभ कर देंगी। कार्यकर्ताओं के काम पर लौटने के बारे में निदेशक महिला सशक्तिकरण बाल विकास मंत्रालय को पत्र के जरिये जानकारी दे दी गई है। 

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