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अंकिता भंडारी प्रकरणः मजबूत पैरवी से अपराधियों को मिली सजा, ऐसे लड़ी गई न्याय की लड़ाई

Published: Wed, 14 Oct 2026 09:28 PM (IST)

अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली, जिससे धामी सरकार की संवेदनशीलता और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता ...और पढ़ें

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HighLights

  1. दोषियों को अंकिता भंडारी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा मिली।

  2. धामी सरकार ने त्वरित कार्रवाई, एसआईटी जांच और मजबूत पैरवी की।

  3. पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी प्रदान की गई।

डिजिटल डेस्‍क, देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलना इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने इस संवेदनशील प्रकरण में अपराधियों को कठोर सजा दिलाने के लिए पूरी गंभीरता से कार्य किया।

घटना सामने आने के बाद 24 घंटे के भीतर आरोपियों को जेल भेजा गया और मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई।

जांच के दौरान करीब 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट तैयार की गई, जिसमें लगभग 100 गवाहों के बयान सहित महत्वपूर्ण साक्ष्यों को शामिल किया गया। न्यायालय में अभियोजन पक्ष द्वारा लगातार मजबूती से पैरवी की गई, जिसके चलते आरोपियों की जमानत अर्जियां बार-बार खारिज हुईं और वे मुकदमे के दौरान सलाखों के पीछे रहे। मजबूत जांच और प्रभावी अभियोजन के परिणामस्वरूप अंततः अंकिता के कातिलों को उम्रकैद की सजा मिली।

प्रदेश सरकार ने पूरी प्रक्रिया के दौरान अंकिता के माता-पिता और परिवार की भावनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। परिजनों की मांग के अनुरूप तीन बार सरकारी अधिवक्ता बदले गए। इतना ही नहीं, अंकिता के माता-पिता द्वारा सीबीआई जांच की मांग किए जाने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रकरण की सीबीआई जांच के आदेश भी दिए।

सरकार ने परिवार को संबल प्रदान करने के लिए ₹25 लाख की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। इसके साथ ही दिवंगत अंकिता के भाई और उनके पिता को सरकारी नौकरी प्रदान कर परिवार के साथ खड़े होने की अपनी प्रतिबद्धता को भी पूरा किया।

इस पूरे प्रकरण में धामी सरकार का रुख पहले दिन से स्पष्ट रहा कि अपराधी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के कठघरे तक पहुंचाकर कठोरतम सजा दिलाई जाएगी। जांच को लेकर उठाए गए सवालों के बीच न्यायिक स्तर पर भी जांच प्रक्रिया को संतोषजनक माना गया और मजबूत अभियोजन के परिणामस्वरूप दोषियों को सजा तक पहुंचाया गया।

वहीं तथाकथित ‘VIP’ के नाम पर कांग्रेस और आशुतोष नेगी जैसे लोगों द्वारा लगातार सवाल उठाकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया। यदि इस संबंध में किसी के पास कोई ठोस तथ्य अथवा साक्ष्य था, तो उसे जांच एजेंसियों और न्यायालय के समक्ष रखा जाना चाहिए था। अदालत के बाहर राजनीतिक लाभ के लिए आरोप लगाना और जनता को भ्रमित करना न्याय की लड़ाई नहीं, बल्कि बेटी अंकिता से जुड़े अत्यंत संवेदनशील प्रकरण का राजनीतिक इस्तेमाल है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले दिन ही स्पष्ट कर दिया था कि बेटी अंकिता को न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। त्वरित गिरफ्तारी, एसआईटी जांच, मजबूत चार्जशीट, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई, आरोपियों को जमानत न मिलने देना, परिवार की मांग के अनुसार अभियोजन व्यवस्था में बदलाव, आर्थिक सहायता और रोजगार से लेकर माता-पिता की मांग पर सीबीआई जांच के आदेश तक सरकार ने हर स्तर पर संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ निर्णय लिए।

अंकिता को न्याय दिलाने की लड़ाई में धामी सरकार केवल आश्वासनों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कार्रवाई, मजबूत पैरवी और निर्णायक परिणाम के साथ परिवार के साथ खड़ी रही।