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उत्तराखंड में अटल आयुष्मान योजना बनी संजीवनी, 17 लाख मरीजों को मिला मुफ्त इलाज

Published: Wed, 23 Sep 2026 06:09 PM (IST)

उत्तराखंड में 'अटल आयुष्मान योजना' ने प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प को साकार करते हुए 17 लाख से अधिक मरीजों को ...और पढ़ें

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HighLights

  1. 17 लाख से अधिक मरीजों को ₹3,400 करोड़ का मुफ्त इलाज मिला।

  2. योजना ने उत्तराखंड के हेल्थकेयर सिस्टम को नई मजबूती प्रदान की।

  3. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिला।

डिजिटल टीम, देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "सबको उत्तम और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं" के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए उत्तराखंड की 'अटल आयुष्मान योजना' राज्य के करोड़ों नागरिकों के लिए वरदान साबित हो रही है। योजना के तहत अब तक 17 लाख से अधिक मरीजों को ₹3,400 करोड़ रुपये से अधिक का कैशलेस (मुफ्त) इलाज मुहैया कराया जा चुका है।
 
इस योजना ने न केवल राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के भारी-भरकम वित्तीय बोझ से मुक्ति दिलाई है, बल्कि उत्तराखंड के पूरे हेल्थकेयर सिस्टम को एक नई मजबूती दी है। 

पहाड़ के हर नागरिक तक पहुंच रही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा

योजना की अभूतपूर्व सफलता पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में हमारी सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ राज्य के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। 'अटल आयुष्मान योजना' के तहत 17 लाख से अधिक नागरिकों का मुफ्त और कैशलेस इलाज होना इस बात का प्रमाण है कि यह योजना हमारी जनता के लिए एक बड़ी ढाल बनकर उभरी है। हमारा संकल्प है कि बीमारी के समय किसी भी परिवार को आर्थिक तंगी के कारण इलाज से वंचित न रहना पड़े।

बदला राज्य का हेल्थकेयर सिस्टम

5 लाख तक का सुरक्षा कवच

उत्तराखंड देश के उन गिने-चुने राज्यों में से एक है, जिसने 'अटल आयुष्मान योजना' के माध्यम से राज्य के सभी परिवारों को सालाना ₹5 लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा दी है।

सरकारी और निजी अस्पतालों का मजबूत नेटवर्क
योजना के तहत प्रदेश के सैकड़ों सरकारी और प्रमुख सूचीबद्ध निजी अस्पतालों को जोड़ा गया है। इससे मरीजों को बिना कोई पैसा दिए कार्ड दिखाते ही तुरंत भर्ती और इलाज की सुविधा मिलती है।

दुर्गम क्षेत्रों तक बेहतर इलाज की पहुंच

योजना के कारण बड़े निजी अस्पतालों ने भी अपनी सेवाओं का विस्तार किया है। पहाड़ के सुदूर गांवों से आने वाले मरीजों को अब इलाज के लिए दिल्ली या चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ता, उन्हें देहरादून, हल्द्वानी और हरिद्वार जैसे शहरों में ही आधुनिक सुपर-स्पेशलिटी इलाज मिल जाता है।

योजना न होती तो घर-जमीन बेचनी पड़ती

पिथौरागढ़ के निवासी मदन सिंह ने कहा कि मुझे हार्ट अटैक आया था और डॉक्टरों ने तुरंत एंजियोप्लास्टी की सलाह दी। निजी अस्पताल में इसका खर्च लाखों में था। मेरे पास इतने पैसे नहीं थे। अटल आयुष्मान कार्ड की बदौलत मेरा पूरा इलाज बिना एक पैसा दिए हो गया। यह योजना हम गरीबों के लिए भगवान का रूप है।

टिहरी की सुनीता देवी ने इस योजना के बारे में अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि मेरे पति का रीढ़ की हड्डी का बड़ा ऑपरेशन हुआ। अस्पताल में भर्ती होने से लेकर दवाइयों तक का सारा खर्च कार्ड से कवर हुआ। अगर यह योजना न होती तो हमें अपना घर-जमीन बेचना पड़ता। 

'अटल आयुष्मान योजना' ने उत्तराखंड में केवल बीमारियों का इलाज ही नहीं किया है, बल्कि आम जनमानस में यह विश्वास जगाया है कि संकट की घड़ी में राज्य सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुआ यह बदलाव उत्तराखंड को एक आत्मनिर्भर और स्वस्थ राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है।