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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 05, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    अनोखी है बदरीनाथ के कपाट खुलने की प्रकिया, सुहागिनें मुंह ढककर निकालती हैं तिल का तेल; सदियों पुरानी परंपरा

    Updated: Wed, 05 Feb 2025 06:42 PM (IST)

    Badrinath Dham Yatra 2025 बदरीनाथ धाम के कपाट 4 मई 2025 को सुबह 6 बजे खुलेंगे। महाराजा मनुजयेंद्र शाह की ओर से कपाट खुलने की तिथि की घोषणा हुई। गाडू घ ...और पढ़ें

    Badrinath Dham Yatra 2025: गाडू घड़ा (तेल कलश) यात्रा 22 अप्रैल को नरेंद्रनगर राजमहल से शुरू होगी। File
    Badrinath Dham Yatra 2025: गाडू घड़ा (तेल कलश) यात्रा 22 अप्रैल को नरेंद्रनगर राजमहल से शुरू होगी। File

    HighLights

    1. बदरीनाथ धाम के कपाट चार मई को सुबह छह बजे खुलेंगे
    2. अक्षय तृतीया से शुरू होगी चारधाम यात्रा

    जागरण संवाददाता, देहरादून। Badrinath Dham Yatra 2025: भू-बैकुंठ बदरीनाथ धाम के कपाट चार मई को सुबह छह बजे भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। गाडू घड़ा (तेल कलश) यात्रा 22 अप्रैल को नरेंद्रनगर राजमहल से शुरू होगी।

    टिहरी जिले के नरेंद्रनगर राजमहल में धार्मिक परंपरा के अनुसार वसंत पंचमी पर रविवार को पंचाग गणना बाद श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय की गई। तिथि तय करने के लिए राजमहल में सुबह साढ़े दस बजे से पूजा अर्चना शुरू हुई। श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत ने गाडू घड़ा (तेल कलश) राजमहल के सुपुर्द किया।

    महाराजा मनुजयेंद्र शाह, श्री बदरीनाथ - केदारनाथ मंदिर समिति अधिकारियों और डिमरी पंचायत की उपस्थिति में राजपुरोहित कृष्ण प्रसाद उनियाल ने पंचांग गणना और राजा की जन्मपत्री देखने के बाद धाम के कपाट खुलने की तिथि तय की। महाराजा मनुजयेंद्र शाह की ओर से कपाट खुलने की तिथि की घोषणा हुई। कपाट वैशाख मास शुक्ल पक्ष सप्तमी को पुष्य नक्षत्र में रविवार चार मई को सुबह 6 बजे खुलेंगे। कपाट खुलने की घोषणा होने के साथ ही राजमहल जय बदरी विशाल के उदघोष से गुंजायमान हो गया।

    टिहरी जिले के नरेंद्रनगर राजमहल में पिरोये गए तिलों के तेल से ही कपाट खुलने पर भगवान बदरी विशाल का अभिषेक किया जाता है। राजमहल में पीले वस्त्रों में सुसज्जित राजपरिवार से जुड़ी सुहागिनें तिलों का तेल निकालती हैं। इसके बाद गाडू घड़ा (तेल कलश) यात्रा बदरीनाथ धाम के लिए प्रस्थान करती है। आइए, आपको बताते हैं गाडू घड़ा (तेल कलश) यात्रा के बारे में।

    राजमहल से रवाना होती है तेल कलश यात्रा

    धार्मिक परंपराओं के अनुसार श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया टिहरी जिले के नरेंद्रनगर राजमहल से कलश यात्रा के प्रस्थान के साथ शुरू हो जाती है। बसंत पंचमी पर नरेंद्रनगर राजमहल में राजपुरोहित महाराजा की जन्म कुंडली देखकर भगवान बदरी विशाल के कपाट खोलने की तिथि एवं मुहूर्त निकालते हैं। इसी दिन तेल पिरोने की तिथि भी तय होती है।

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    तेल से होता है बदरी विशाल का अभिषेक

    • नरेंद्रनगर राजमहल में पिरोये गए तिलों के तेल से ही कपाट खुलने पर भगवान बदरी विशाल का अभिषेक किया जाता है।
    • इसके बाद ही भगवान के स्नान-पूजन की क्रियाएं संपन्न होती हैं।
    • परंपरा के अनुसार टिहरी रियासत (पूर्व में गढ़वाल रियासत) के राजाओं को बोलांदा बदरी (बोलने वाले बदरी) कहा जाता है।
    • यही कारण है कि बदरीनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि एवं मुहूर्त राजाओं की कुंडली के हिसाब से निकाले जाते हैं।
    • नरेंद्रनगर राजमहल में पीत वस्त्रों में सुसज्जित राजपरिवार से जुड़ी सुहागिनें तिलों का तेल निकालती हैं।
    • इस दौरान सुहागिनें व्रत धारण कर पीले रंग के कपड़े से मुंह व सिर ढककर रखती हैं।
    • बदरी विशाल का अभिषेक करने के लिए विशेष रूप से तिलों का तेल तैयार किया जाता है।
    • सदियों से टिहरी राजपरिवार ही अभिषेक के लिए प्रयुक्त होने वाले तिलों के तेल की व्यवस्था करता है।
    • इस परंपरा के अनुसार सुहागिन महिलाएं और राजपरिवार की महिलाएं सिलबट्टे और ओखली में तिलों को पीस कर तेल निकालती हैं।
    • उसके बाद पीसे हुए तिलों को हाथ से मलकर तेल निकाला जाता है।
    • इस तेल को पीले कपड़े से छानकर राजमहल में रखे एक विशेष बर्तन में रखकर आग पर गरम किया जाता है, जिससे उसमें से पानी का अंश निकल जाए।
    • तेल निकालने के बाद उसे एक घड़े में भरा जाता है, जिसे गाडू घड़ा कहते हैं।
    • तेल को चांदी के कलश में रखा जाता है। इ
    • स कलश को डिमरी पंचायत और बदरीनाथ धाम के रावल के अलावा कोई छू भी नहीं सकता।

    अक्षय तृतीया से शुरू होगी चारधाम यात्रा

    बीकेटीसी के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि 26 फरवरी को शिवरात्रि के दिन पंचांग गणना पश्चात तय होगी। कपाट खुलने की तिथि तय करने के लिए ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में 26 फरवरी को सुबह साढ़े नौ बजे से समारोह शुरू होगा।

    वहीं, द्वितीय केदार मद्महेश्वर और तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट खुलने की तिथि वैशाखी के दिन तय होगी। श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने बताया कि बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय होने के साथ तैयारियों को शुरू किया जा रहा है।

    शासन प्रशासन से समन्वय बनाकर आगामी यात्रा की तैयारियां की जा रही है। जल्द मंदिर समिति अधिकारियों का दल बदरी-केदार जाएगा और यात्रा पूर्व तैयारियों का खाका तैयार करेगा। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा परंपरागत रूप से अक्षय तृतीया के दिन से शुरू होती है।

    30 अप्रैल अक्षय तृतीया को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे। हालांकि, श्री गंगोत्री मंदिर समिति की ओर से चैत्र प्रतिपदा में गंगोत्री धाम के कपाट खुलने और श्री यमुनोत्री मंदिर समिति की ओर से यमुना जयंती पर यमुनोत्री धाम के औपचारिक रूप से कपाट खुलने का समय, देव डोलियों के धाम पहुंचने के कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी।