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    बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर में गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक को नहीं बदलेगा एक्ट, संविधान के अधिकार से बदली व्यवस्था

    Updated: Fri, 20 Mar 2026 04:40 AM (IST)

    बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने स्पष्ट किया है कि मंदिरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक के लिए 1939 अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता नही ...और पढ़ें

    बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर। जागरण

    बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर। जागरण

    HighLights

    1. गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक, एक्ट में बदलाव नहीं।

    2. संविधान के अनुच्छेद 26 से मिला अधिकार प्रभावी।

    3. बीकेटीसी बोर्ड बैठक में लिया गया महत्वपूर्ण निर्णय।

    राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर में गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक के निर्णय को लेकर कुछ सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह कि इस निर्णय को अमलीजामा कैसे पहनाया जाएगा। क्या बीकेटीसी की ओर से श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर अधिनियम, 1939 में कोई संशोधन किया जाएगा, या नया बायलाज बनाकर व्यवस्था अमल में लाई जाएगी।

    इस पर बीकेटीसी ने साफ किया कि एक्ट में कोई संशोधन नहीं होगा। यह फैसला भारतीय संविधान के अनुच्छेद-26 से प्राप्त अधिकारों के अनुरूप लिया गया है। समिति का कहना है कि धार्मिक संस्थाओं को अपने धार्मिक मामलों के प्रबंधन और व्यवस्था तय करने का अधिकार है, इसी आधार पर यह निर्णय बोर्ड बैठक में लिया गया। इसे आधिकारिक मिनट्स में भी शामिल कर लिया गया है। इसी से व्यवस्था का पालन कराया जाएगा।

    बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेद्वी के अनुसार, संविधान का अनुच्छेद 26 धार्मिक संप्रदायों को अपने धार्मिक एवं धर्मार्थ संस्थानों की स्थापना, संचालन और प्रबंधन का अधिकार देता है। इसी के तहत मंदिर समिति अपने परंपरागत नियमों और व्यवस्था को निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र है।

    समिति का कहना है कि मंदिरों की आस्था, परंपरा और धार्मिक मर्यादाओं को बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है। उसी के अनुरूप व्यवस्था बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा, बोर्ड बैठक में लिए गए इस निर्णय के मिनट्स दर्ज हो चुके हैं और अब इन्हीं के आधार पर आगे की व्यवस्था तैयार की जाएगी।

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    मामले को शासन और संबंधित प्राधिकरणों के संज्ञान में भी लाया जाएगा। जानकारों का मानना है कि संविधान में व्यक्ति को अपनी आस्था के अनुसार धर्म पालन का अधिकार है, वहीं धार्मिक संस्थाओं को अपने आंतरिक मामलों और परंपराओं के संचालन की स्वतंत्रता भी दी गई है।

    श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर अधिनियम-1939 में मिले अधिकार
    श्री बदरीनाथ-श्री केदारनाथ मंदिर अधिनियम, 1939 के तहत बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) का गठन एक वैधानिक संस्था के रूप में किया गया है, जिसे बदरीनाथ, केदारनाथ सहित संबद्ध मंदिरों के संचालन, प्रबंधन व संपत्ति के संरक्षण का अधिकार प्राप्त है। अधिनियम के अनुसार समिति पूजा-पद्धति, धार्मिक परंपराओं और व्यवस्थाओं को तय करने के साथ-साथ मंदिरों की आय, दान और चल-अचल संपत्ति का प्रबंधन करती है।

    समिति द्वारा बनाए गए सभी नियम और व्यवस्थाएं भारतीय संविधान के प्रावधानों, विशेषकर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 26 के दायरे में ही लागू होते हैं, जिससे आस्था, परंपरा और कानूनी संतुलन बना रहे।