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देहरादूनः दैनिक जागरण विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने राजनीति में भ्रष्टाचार पर किया मंथन, धनबल के बढ़ते प्रभाव पर जताई चिंता

Published: Tue, 06 Oct 2026 10:52 AM (IST)

दैनिक जागरण द्वारा देहरादून में आयोजित विचार गोष्ठी में बुद्धिजीवियों ने राजनीति में बढ़ते धनबल और भ्रष्टाचार पर चिंता व्यक्त ...और पढ़ें

दैनिक जागरण की ओर से पटेलनगर स्थित कार्यालयल में विचार गोष्ठी में शामिल बुद्धिजीवी। जागरण

दैनिक जागरण की ओर से पटेलनगर स्थित कार्यालयल में विचार गोष्ठी में शामिल बुद्धिजीवी। जागरण

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जागरण संवाददाता, देहरादून। राजनीति में धनबल का बढ़ता प्रभाव अब केवल चुनाव तक सीमित नहीं रह गया है। टिकट वितरण से लेकर विकास कार्यों के टेंडर और सरकारी विभागों के कामकाज तक भ्रष्टाचार की शिकायतों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

राजनीति और नौकरशाही के गठजोड़, कमीशनखोरी और भाई-भतीजावाद पर चिंता जताते हुए वक्ताओं ने कहा कि बदलाव के लिए व्यवस्था के साथ आमजन को भी अपनी भूमिका निभानी होगी।

दैनिक जागरण की ओर से सोमवार को पटेल नगर स्थित कार्यालय में ‘आज की राजनीति और भ्रष्टाचार’ विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में बुद्धिजीवियों ने यह बात कही।

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दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक नरेंद्र मोहन की स्मृति में जागरण साहित्य सृजन सम्मान समारोह के तहत 10 अक्टूबर तक विभिन्न शहरों में अलग-अलग विषयों पर विचार गोष्ठियां आयोजित की जा रही हैं।

इसी क्रम में सोमवार को आयोजित गोष्ठी में संयुक्त नागरिक संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिनेश भंडारी ने कहा कि राजनीति में भ्रष्टाचार की शुरुआत टिकट वितरण से ही होने लगती है। धनबल के कारण ईमानदार लोगों का जनीति में प्रवेश और टिकना मुश्किल हो रहा है।

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सामाजिक कार्यकर्ता सुशील सैनी ने दावा किया कि कई जगह 40 से 60 प्रतिशत तक कमीशन तय होने की बात सामने आती है। संयुक्त नागरिक संगठन के उमेश्वर सिंह रावत ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को परेशानी झेलनी पड़ती है।

मुकेश नारायण शर्मा ने कहा कि आज भ्रष्टाचार को सामान्य व्यवस्था की तरह स्वीकार किया जाने लगा है। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती ने कहा कि जब तक ठेकेदार ब्यूरोक्रेसी और राजनीति का क्रम नहीं टूटेगा तब तक भ्रष्टाचार रहेगा।

शिक्षा और चिकित्सा का सेवा भाव हो चुका कमजोर

शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त संजय गर्ग ने कहा कि शिक्षा और चिकित्सा का उद्देश्य कभी सेवा हुआ करता था, लेकिन अब सेवा भावना कमजोर पड़ रही है। ऊपर से आने वाले दबाव का असर निचले स्तर तक पहुंचता है।

आमजन से भी होता है भ्रष्टाचार

मेजर (सेनि.) महावीर सिंह रावत ने कहा कि राजनीति का उद्देश्य सेवा होना चाहिए, स्वार्थ नहीं। गलत कार्य दिखाई दे तो नागरिकों को चुप नहीं रहना चाहिए। लोक निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त इंजीनियर पदमेंद्र सिंह बत्र्वाल ने कहा कि भ्रष्टाचार की शुरुआत कई बार आमजन से भी होती है। ऊपर से भ्रष्टाचार पर रोक लगे तो उसका असर धरातल पर भी दिखाई देगा।

सख्त कानून के साथ प्रभावी पालन जरूरी

गिरीश चंद्र भट्ट ने कहा कि विधायक और सांसद निधि से होने वाले कार्यों में भी भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती हैं। कानून सख्त होने के साथ उसका प्रभावी पालन जरूरी है। एसपी नौटियाल ने राजनीति में भ्रष्टाचार के साथ भाई-भतीजावाद को भी बड़ी चुनौती बताया।

ईमानदारी से काम करने वालों को करते हैं परेशान

डीएवी पीजी कालेज के सेवानिवृत्त प्राचार्य डा. दिनेश सक्सेना ने कहा कि ईमानदार रहकर काम करने वालों को भी कई बार परेशान किया जाता है। पर्यावरणविद जगदीश बाबला ने कहा कि भ्रष्टाचार रोकने में आमजन की भूमिका अहम है। नेताओं को चुनाव के बाद भी जनता के बीच रहकर उनकी समस्याएं सुननी चाहिए।

पूर्व प्रधान संपादक की स्मृति में दिया जाता है जागरण साहित्य सृजन सम्मान

दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक नरेंद्र मोहन की स्मृति में जागरण साहित्य सृजन सम्मान दिया जाता है। इसकी सम्मान राशि 11 लाख है। यह सम्मान उन लेखकों को दिया जाता है, जिनकी कृति ने पठनीयता, गुणवत्ता और विषय के आधार पर वर्ष भर में सबका ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया। पहला जागरण साहित्य सृजन सम्मान वरिष्ठ लेखक महेंद्र मधुकर जी को वर्ष 2024 में प्रकाशित उनकी कृति वक्रतुंड के लिए प्रदान किया गया।

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