विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

देहरादून में विकसित होगी नई झील, रामपुर मंडी परिसर में तैयारी, फरवरी में पर्यटकों के लिए खोलने की योजना

Published: Mon, 07 Sep 2026 05:31 AM (IST)Updated: Mon, 07 Sep 2026 06:43 AM (IST)

देहरादून के आसन वेटलैंड में पर्यटकों के लिए रामपुर मंडी परिसर में एक नई झील विकसित की जा रही है। ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. आसन वेटलैंड में पर्यटकों के लिए नई झील विकसित।

  2. फरवरी में खुलने की योजना, बर्ड वाचिंग का आकर्षण।

  3. प्रवासी पक्षियों के लिए मड टापू भी बनेंगे।

राजेश पंवार, विकासनगर। देश के पहले कंजरवेशन रिजर्व व उत्तराखंड की पहली रामसर साइट आसन वेटलैंड क्षेत्र में पर्यटकों के लिए एक और झील विकसित की जा रही है। वानिकी प्रशिक्षण केंद्र रामपुर मंडी परिसर में पुरानी झील को विकसित कर पर्यटकों को और अधिक आकर्षित करने की योजना है। चकराता वन प्रभाग नेचर ट्रेल के माध्यम से पर्यटकों को एक सुकूनभरा वातावरण देने की तैयारी कर रहा है। बर्ड वाचिंग के लिए फिल्हाल वन विभाग के दो टावर हैं।

देश के पहले कंजरवेशन रिजर्व आसन वेटलैंड को वर्ष 2020 में रामसर साइट का दर्जा मिला था। धीरे धीरे सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। नमामि गंगे के तहत भी बजट मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद रामसर साइट का दर्जा मिलने का उददेश्य पूरा करने की दिशा में कदम तेजी से बढ़ेंगे। आसन वेटलैंड को अंतरराष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित किए जाने के बाद से उत्तराखंड में पर्यटन को नए पंख लगने की कवायद भी बढ़ गई है।

उत्तराखंड की पहली रामसर साइट आसन वेटलैंड में नेचर गाइड के लिए वन प्रभाग ने बोक्सा जनजाति की छात्राओं को प्रशिक्षण दिया था। पर्यटकों के लिए दो बर्ड वाचर टावर बनाए गए हैं। नेचर गाइड होने पर पक्षी प्रेमियों को प्रवासी परिंदों के बारे में जानकारी मिल पाएगी। वानिकी प्रशिक्षण केंद्र में डिस्पले के माध्यम से परिंदों के बारे में जानकारी दी जा रही है। केंद्र परिसर के अंदर एक किमी लंबी झील है। जिसे पर्यटकों के लिए विकसित किया जा रहा है।

उम्मीद है कि फरवरी में वर्ल्ड वेटलेंड डे पर इसको पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। नेचर ट्रेल के माध्यम से झील के चारों ओर पर्यटकों के घूमने व परिंदों को कैमरे में कैद करने की सुविधा मिलेगी। प्रकृति के बीच इसका आंनद पर्यटक उठा सकेंगे। चकराता वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी अमित कंवर झील को विकसित कराने के कार्य को पूरी बारीकी से देख रहे हैं। हालांकि रामसर साइट में पर्यटकों के आसन झील किनारे बैठने के लिए इंतजाम अभी कम है।

पक्षी प्रेमियों व पर्यटकों को जीएमवीएन के आसन रिसार्ट की बोटिंग प्रवासी परिंदों को नजदीक से निहारने का माध्यम है। वन दारोगा प्रदीप सक्सेना ने बताया कि आसन रामसर साइट में एक दो दिन में मड टापू विकसित करने का कार्य शुरू करा दिया जाएगा, क्योंकि अक्टूबर में प्रवासी परिंदों का आगमन शुरू हो जाएगा।

आसन रामसर साइट में छह माह विदेशी और छह माह तक देशी परिंदों का रहता है राज
आसन रामसर साइट में में बर्फ प्रभावित देशों के प्रवासी परिंदों का राज अक्टूबर से मार्च अंत तक रहता है। उसके बाद अप्रैल से सितंबर तक यहां पर लोकल प्रजातियों के परिंदों का राज रहता है, जो यहां पर ब्रीडिंग, नेस्टिंग व चूजों को प्रशिक्षित करने का काम छह माह के भीतर कर लेते हैं।

हर साल यहां पर प्रवासी परिंदों की विधिवत गणना की जाती है। सबसे पहले यहां पर सुर्खाब प्रवास के लिए आते हैं, जिनकी संख्या भी काफी अधिक हो जाती है। यहां पर दुर्लभ प्रजाति का पलास फिश ईगल का जोड़ा भी हर साल आता है।

आसन वेटलैंड में प्रवास पर आकर ये परिंदे बनते हैं उत्तराखंड के मेहमान
रुडी शेलडक यानि सुर्खाब, नार्दन शावलर, गैडवाल, यूरेशियन विजन, इंडियन स्पाट बिल्ड डक, रेड क्रस्टेड पोचार्ड, टफ्ड डक,लिटिल ग्रेब, ग्रेट क्रेस्टेड पोचार्ड, राक पिजन, यूरेशियन, बार हेडेड गूज, मलार्ड, नार्दन पिनटेल्स, ग्रीन बिंग टेल, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, कामन पोचार्ड, फेरीजिनस डक, टफ्टड डक, ग्रेट क्रेस्टेड ग्रेब, यूरेशियन मोरहेन, यूरेशियन कूट, ग्रे हेडेड स्पामहेन, व्हाइट ब्रेस्टेड लैपविंग,कामन सेंडपाइपर, कामन ग्रीन, पलास फिश ईगल, एशियन वूली नेक्टड, ग्रे हेरोन, पर्पल हेरोन, पर्पल हेरोन, ग्रेट इग्रेट, प्लमबियस, व्हाइट कैप्टड, व्हाइट ब्राउड, व्हाइट वेगटेल, पाडीफील्ड पिपिट प्रजातियों के परिंदे प्रवास पर आते हैं।