देहरादून के गांवों में छिपे पर्यटन खजाने अब आएंगे सामने, बनेंगे आकर्षण का केंद्र
दून जिले में अब मसूरी व सहस्रधारा तक सीमित न रहकर गांवों के मंदिर, झरने और ऐतिहासिक स्थल नए पर्यटन केंद्र बनेंगे। ग्राम्य विकास विभाग ने 409 ग्राम पंचायतों में स्थलों की पहचान शुरू की है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

409 ग्राम पंचायतों में मंदिर, झरने, नदियां और ऐतिहासिक स्थल तलाशेगा ग्राम्य विकास विभाग। जागरण
HighLights
दून के गांव बनेंगे नए पर्यटन केंद्र।
ग्राम्य विकास विभाग ने स्थलों की पहचान शुरू की।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा बढ़ावा।
विरेंद्र कुमार, देहरादून। दून का पर्यटन अब सिर्फ मसूरी व सहस्रधारा तक सीमित नहीं रहेगा। जिले के गांवों में गुमनामी के अंधेरे में पड़े मंदिर, झरने, नदियां और ऐतिहासिक स्थल पर्यटन के नए केंद्र बनेंगे। ग्राम्य विकास विभाग ने जिले की छह विकासखंडों की 409 ग्राम पंचायतों में पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण गांवों और स्थलों की पहचान शुरू कर दी है।
स्थल चिन्हित होने के बाद संबंधित ग्राम पंचायतों से इनके विकास के प्रस्ताव मांगे जाएंगे।विभाग की योजना केवल स्थलों का सुंदरीकरण करने तक सीमित नहीं है। पर्यटन स्थल के साथ गांव की पूरी तस्वीर बदलने की तैयारी है। चयनित स्थानों के आसपास पेयजल, बिजली, ठहरने की सुविधा और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।
इससे बाहर से आने वाले पर्यटक इन स्थलों तक पहुंचने के साथ उत्तराखंड की ग्रामीण संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली से भी रूबरू हो सकेंगे। विभागीय स्तर पर स्थलों की पहचान का काम शुरू हो चुका है। चयन के बाद ग्राम पंचायतों से निर्माण, सुंदरीकरण और आवश्यक सुविधाओं के विकास के प्रस्ताव लिए जाएंगे। इसके जरिए उन ग्रामीण क्षेत्रों को पर्यटन के नक्शे पर लाने की कोशिश होगी, जो अब तक मुख्य पर्यटन स्थलों की चमक से दूर रहे हैं।
चकराता-कालसी से खुलेगा नया पर्यटन गलियारा
ग्राम्य विकास विभाग चकराता, कालसी, रायपुर, सहसपुर, डोईवाला और विकासनगर विकासखंडों में ऐसे स्थलों की तलाश कर रहा है, जिनमें पर्यटन की मजबूत संभावना है। इन क्षेत्रों में पुराने मंदिरों और धार्मिक मान्यता वाले स्थानों के अलावा प्राकृतिक झरने, नदियां और ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं। उचित प्रचार और सुविधाओं के अभाव में इनमें से कई स्थल अभी पर्यटकों की पहुंच से दूर हैं।
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पर्यटक आएंगे तो गांव में टिकेगा पैसा
योजना का सबसे बड़ा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने की उम्मीद है। पर्यटन स्थल विकसित होने से होम स्टे, स्थानीय खानपान, हस्तशिल्प, परिवहन और छोटे कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है। यानी पर्यटक केवल स्थल देखकर लौटने के बजाय गांव में रुकेंगे तो स्थानीय लोगों की आय के रास्ते भी खुलेंगे।
जिले में पर्यटन की बहुत संभावनाएं हैं। चकराता, कालसी समेत अन्य विकासखंडों में ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अनेक स्थल हैं। इन स्थानों के आसपास सुविधाएं विकसित कर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा। इससे स्थानीय नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
