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देहरादून के शेरगढ़ में फिर दिखे दो गुलदार, ग्रामीणों में दहशत; वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

Published: Wed, 23 Sep 2026 06:31 AM (IST)

देहरादून के शेरगढ़ गांव में आबादी क्षेत्र में दो गुलदार घूमते दिखे, जिससे ग्रामीणों में दहशत है। वन विभाग की ...और पढ़ें

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HighLights

  1. शेरगढ़ गांव में आबादी क्षेत्र में दो गुलदार घूमते हुए दिखे।

  2. वन विभाग की निष्क्रियता और सुरक्षा उपायों पर सवाल उठाए गए।

  3. ग्रामीणों ने सोलर फेंसिंग और प्रभावी गश्त की मांग की।

संवाद सहयोगी, डोईवाला। लच्छीवाला रेंज से सटे आबादी क्षेत्रों में वन्यजीवों की लगातार बढ़ रही आवाजाही के बावजूद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। ताजा मामला माजरी ग्रांट ग्राम पंचायत के शेरगढ़ गांव का है, जहां सोमवार देर रात आबादी क्षेत्र के मार्ग पर दो गुलदार घूमते दिखाई दिए। मार्ग से गुजर रहे वाहन चालकों ने गुलदारों की तस्वीरें अपने मोबाइल कैमरों में कैद कीं।

ग्रामीणों का कहना है कि आबादी के बीच गुलदारों की लगातार मौजूदगी के बावजूद वन विभाग की ओर से न तो प्रभावी निगरानी की जा रही है और न ही ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए कोई ठोस पहल दिखाई दे रही है। दो दिन पूर्व भी क्षेत्र में अन्य वन्यजीव प्लास्टिक कचरा खाते दिखाई दिए थे।

शेरगढ़ क्षेत्र में पहले भी गुलदार किसानों की गोशालाओं और आंगन तक पहुंचकर पशुओं पर हमला कर चुके हैं। वहीं हाथियों की आवाजाही और फसलों व अन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। ऐसे में आबादी क्षेत्र में लगातार वन्यजीवों की मौजूदगी मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ा रही है।

न निगरानी, न सोलर फेंसिंग, न ग्रामीणों से संवाद
ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग से कई बार सोलर फेंसिंग लगाने और वन्यजीवों की आवाजाही पर प्रभावी निगरानी की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सवाल यह भी है कि संवेदनशील आबादी क्षेत्रों में वनकर्मियों की नियमित गश्त और निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। उपप्रधान गुरजीत कौर ने कहा कि वन विभाग को कई बार क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियों की सूचना दी जा चुकी है, लेकिन विभाग की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है।

भारतीय किसान यूनियन टिकैत के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह खालसा ने भी वन विभाग पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से सोलर फेंसिंग की मांग कर रहे हैं, लेकिन विभाग इस दिशा में गंभीरता नहीं दिखा रहा है। यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो ग्रामीण वन विभाग के खिलाफ धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।