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बढ़ते प्रदूषण से देहरादून की आर्द्रभूमियां छोड़ रहीं खतरनाक ग्रीनहाउस गैस, वाडिया इंस्टीट्यूट के शोध में खुलासा

Updated: Sun, 23 Aug 2026 02:10 AM (IST)

दून घाटी की आर्द्रभूमियां जलवायु परिवर्तन को प्रभावित करने वाली ग्रीनहाउस गैसों का स्रोत बन रही हैं, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. दून की आर्द्रभूमियां ग्रीनहाउस गैसों का बड़ा स्रोत बन रही हैं।

  2. वाडिया संस्थान के शोध में 0.0195 मिलियन टन उत्सर्जन का अनुमान।

  3. मीथेन की हिस्सेदारी 62%, प्रदूषण से बढ़ा खतरा इन आर्द्रभूमियों पर।

सुमन सेमवाल, देहरादून। दून घाटी की आर्द्रभूमियां जल और जैव विविधता का भंडार होने के साथ जलवायु परिवर्तन को प्रभावित करने वाली ग्रीनहाउस गैसों का स्रोत भी बन रही हैं।

वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के अध्ययन में सात मीठे पानी की आर्द्रभूमियों से सालाना करीब 0.0195 मिलियन टन कार्बन डाईआक्साइड समतुल्य उत्सर्जन का अनुमान लगाया गया है।

इसमें मीथेन की हिस्सेदारी करीब 62 प्रतिशत है। आयुषी बैसवार, डा. समीर के. तिवारी और सहजनूर कौर का यह शोध जुलाई 2026 में साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुआ है।

इन आर्द्रभूमियों में अध्ययन

डाकपत्थर, आसन लेफ्ट, आसन राइट, आसन सेंट्रल, आसन रामसर साइट, नकरौंदा और मनु स्वैम्प को अध्ययन में शामिल किया गया। इनका कुल क्षेत्र 221.29 हेक्टेयर था। अलग-अलग मौसम में कार्बन डाइआक्साइड, मीथेन और जलवाष्प की सांद्रता व उत्सर्जन प्रवाह मापा गया।

प्रदूषण से बढ़ा खतरा

शोधकर्ताओं के अनुसार तेजी से बढ़ता शहरी विस्तार, कृषि गतिविधियां और नदियों में बढ़ता अपशिष्ट जल आर्द्रभूमियों में पोषक तत्व व कार्बनिक पदार्थ बढ़ा सकते हैं। इससे सूक्ष्मजीवी गतिविधि और मीथेन निर्माण बढ़ने की आशंका है।

हालांकि मानवीय स्रोतों से आए पदार्थों को सीधे नहीं मापा गया, लेकिन अलग-अलग स्थानों पर उत्सर्जन में बड़े अंतर से भूमि उपयोग और बदले जल प्रवाह की संभावित भूमिका सामने आई।

गर्मियों में कई गुना मीथेन

सर्दियों में मीथेन प्रवाह 0.03 से 185.83 नैनोमोल प्रति वर्गमीटर प्रति सेकंड और गर्मियों में 0.82 से 508.29 तक रहा। अधिकतम उत्सर्जन आसन सेंट्रल में 508.29 रहा। संचयी प्रवाह आसन सेंट्रल 605.78, आसन लेफ्ट 517.45 और डाकपत्थर 0.84 नैनोमोल प्रति वर्गमीटर प्रति सेकंड रहा।

कार्बन डाइआक्साइड भी बढ़ा

सातों आर्द्रभूमियों से कार्बन डाईआक्साइड प्रवाह सर्दियों में 0.04 से 0.51 और गर्मियों में 0.41 से 3.43 माइक्रोमोल प्रति वर्गमीटर प्रति सेकंड रहा।

कम ऑक्सीजन और ज्यादा मीथेन

शोध ने मीथेन बनने की परिस्थितियों को भी स्पष्ट किया। जिन आर्द्रभूमियों की मिट्टी अधिक नम और आक्सीजन कम थी, वहां मीथेन उत्सर्जन ज्यादा मिला। आसन लेफ्ट में घुलित आक्सीजन केवल 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर थी, जबकि डाकपत्थर में सर्दियों के दौरान यह 11.1 मिलीग्राम प्रति लीटर थी।

इसी तरह नकरौंदा में घुलित ऑक्सीजन करीब 4.4 से 4.8 मिलीग्राम प्रति लीटर रही। वहीं, पानी मे तापमान भी बढ़ा (35 से 41 डिग्री सेल्सियस) मिला। इस कारण ने भी मीथेन बनाने वाली सूक्ष्मजीवी प्रक्रिया को बढ़ावा दिया।