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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 20, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

हल्द्वानी-नैनीताल रूट पर भी दौड़ेगी इलेक्ट्रिक बस, जानिए कब से

By Raksha PanthariEdited By:
Published: Tue, 20 Nov 2018 01:26 PM (IST)Updated: Wed, 21 Nov 2018 09:16 AM (IST)

इलेक्ट्रिक बस अगले हफ्ते से हल्द्वानी नैनीताल रूट पर फर्राटा भरती नजर आएगी। अभी तक ये बस देहरादून मसूरी रूट पर चल रही है।

हल्द्वानी-नैनीताल रूट पर भी दौड़ेगी इलेक्ट्रिक बस, जानिए कब से
हल्द्वानी-नैनीताल रूट पर भी दौड़ेगी इलेक्ट्रिक बस, जानिए कब से

देहरादून, जेएनएन। देहरादून-मसूरी रूट पर दौड़ रही इलेक्ट्रिक बस अब अगले हफ्ते से हल्द्वानी-नैनीताल रूट पर फर्राटा भरती नजर आएगी। दरअसल, देहरादून-मसूरी रूट पर चलाई जा रही प्रदेश की एकमात्र इलेक्ट्रिक बस को एक महीना पूरा हो रहा है। इसके बाद इलेक्ट्रिक बस को हल्द्वानी-नैनीताल रूट पर भी एक महीने के लिए चलाया जाएगा। इससे कुमाऊं के इस रूट पर भी भौगोलिक स्थिति के अनुरूप बस की क्षमताओं को परखा जा सकेगा। 

परिवहन निगम की ओर से अब इलेक्ट्रिक बस को हल्द्वानी-नैनीताल रूट पर चलाने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। 21 अक्टूबर से देहरादून-मसूरी रूट पर इस इलेक्ट्रिक बस का संचालन शुरू किया गया था, इस रूट पर बस की सेवा की अवधि एक महीना निर्धारित थी। यह समय 21 नवंबर को पूरा हो रहा है। इसके बाद इस बस का संचालन हल्द्वानी-नैनीताल रूट पर एक माह किया जाएगा। 

बता दें कि परिवहन निगम की ओर से देहरादून-मसूरी व हल्द्वानी-नैनीताल रूट पर 25-25 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का निर्णय लिया गया है। इस योजना को लेकर टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा रही है। पहले विभाग ने इन रूटों पर ट्रायल कराया था, जो तकनीकी रूप से सफल रहा। 

पर्वतीय रूट पर आ रही दिक्कतें 

भले ही इलेक्ट्रिक बस को मैदानी व पर्वतीय दोनों रूटों के लिए अनुकूल बताया जा रहा हो, लेकिन पर्वतीय रूटों पर इलेक्ट्रिक बस की क्षमताओं पर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि देहरादून-मसूरी रूट पर यह बस महज 150 से 180 किमी. तक का एवरेज दे रही है, जबकि निर्माण कंपनी ने एवरेज 280 किमी. तक का दावा किया था। 

परिवहन निगम के महाप्रबंधक(संचालन) दीपक जैन ने बताया कि अगले सप्ताह से इलेक्ट्रिक बस को हल्द्वानी-नैनीताल रूट पर एक माह के लिए चलाया जाएगा। जहां तक पर्वतीय रूट पर इलेक्ट्रिक बसों के कम एवरेज का सवाल है, मैदानी रूट की तुलना में पर्वतीय रूट पर थोड़ा अंतर होना स्वाभाविक है। 

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