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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 16, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ऊर्जा निगम में भ्रष्टाचार के खिलाफ विशाल धरना देंगे कर्मचारी Dehradun News

By Raksha PanthariEdited By:
Updated: Sat, 16 Nov 2019 02:03 PM (IST)

ऊर्जा के तीनों निगमों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए ऊर्जा कामगार संगठन ने इसके खिलाफ विशाल धरना देने की बात कही है।

ऊर्जा निगम में भ्रष्टाचार के खिलाफ विशाल धरना देंगे कर्मचारी Dehradun News
ऊर्जा निगम में भ्रष्टाचार के खिलाफ विशाल धरना देंगे कर्मचारी Dehradun News

देहरादून, जेएनएन। ऊर्जा कामगार संगठन ने ऊर्जा के तीनों निगमों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ विशाल धरना दिया जाएगा। इस बाबत शनिवार को होने वाली केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मुहर लगाई जाएगी। 

संगठन की बैठक शुक्रवार को ईसी रोड स्थित कार्यालय में हुई। बैठक में प्रांतीय अध्यक्ष राकेश शर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा कि तीनों निगमों के प्रबंधन सिर्फ टेंडरों में भ्रष्टाचार करने में जुटे हैं, जबकि कर्मचारी की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। अब कर्मचारियों को रियायती दरों पर मिलने वाली बिजली की सुविधा भी खत्म होने जा रही हैं, क्योंकि प्रबंधन हाईकोर्ट में सशक्त पैरवी नहीं कर सका और अपना पक्ष भी मजबूती से नहीं रखा। उन्होंने कहा कि एलआइसी की रिपोर्ट के अनुसार सेना के बाद सबसे ज्यादा ऑन ड्यूटी मौत बिजली विभाग में होती है फिर भी प्रबंधन मौन है। 

उन्होंने कहा कि वेतन विसंगति, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी में भर्ती, बिजली घरों का निजीकरण, नए डिविजन में सिर्फ अधिशासी अभियंता की ही तैनाती आदि समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। एक निजी कंपनी ने अनुबंध किए बिना ही बिजली के पोलों पर ऑप्टिकल फाइबर बिछा दी है, लेकिन फिर भी प्रबंधन मौन है। यूजेवीएनएल में ईआरपी सॉफ्टवेयर की खरीद में घोटाला हुआ है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इसके विरोध में शनिवार को होने वाली बैठक में विशाल धरना प्रदर्शन का निर्णय लिया जाएगा। बैठक में दीपक बेनीवाल, अशोक जोशी, संजीव कुमार, पंकज कुमार, परमेश्वर सिंह, बलवंत सिंह, विजय, मेहताब, सोहन शर्मा आदि मौजूद थे। 

विद्युत संविदा कर्मियों ने विभिन्न समस्याओं पर की चर्चा 

बल्लीवाला स्थित ऊर्जा भवन में शुक्रवार को विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन की ओर से बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई। 

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बैठक को संबोधित करते हुए संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कवि ने कहा कि सरकार और निगम प्रबंधन की ओर से लगातार संविदा कर्मियों की उपेक्षा करते आ रहे हैं। बीते 13 नवंबर को कैबिनेट में संविदा कर्मियों के यात्रा भत्ते पर सर्विस चार्ज न लिए जाने का निर्णय कर्मचारियों के साथ मजाक है, क्यों अधिकांश कर्मियों को यात्रा भत्ता नहीं दिया जाता। इसके अलावा मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार विभिन्न श्रेणियों के कर्मियों को 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से वेतन दिए जाने की बात भी समझ से परे है। इसमें श्रेणियों को स्पष्ट नहीं किया गया है। 

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संगठन के पदाधिकारियों ने नाराजगी जताते आरोप लगाया कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। उन्होंने बिजली घरों, विद्युत लाइनों, मीटर रीडिंग, कैश कलेक्शन आदि कार्यों को उपनल कर्मियों से छीनकर निजी हाथों में देने का विरोध किया। उन्होंने इससे उपभोक्ताओं को भी परेशानी होने का दावा किया। संगठन ने बैठक में राज्य सरकार से मांग की कि संविदा कर्मियों का जोखिम भरी कार्यदशा और निगमों कार्मिकों की कमी को देखते हुए नियमितीकरण किया जाए। इस दौरान अनिल नौटियाल, घनश्याम शर्मा, संजय काला, रविंद्र राणा, सतेंद्र नेगी आदि उपस्थित थे।

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