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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 13, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

उत्तराखंड में अब निजी मेडिकल कॉलेजों पर कसा जाएगा शिकंजा

By Raksha PanthariEdited By:
Published: Fri, 13 Apr 2018 02:03 PM (IST)Updated: Fri, 13 Apr 2018 10:27 PM (IST)

उत्तराखंड में अब निजी कॉलेजों पर शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है।कॉलेजों की मनमानी पर अंकुश लगाने को ...और पढ़ें

उत्तराखंड में अब निजी मेडिकल कॉलेजों पर कसा जाएगा शिकंजा
उत्तराखंड में अब निजी मेडिकल कॉलेजों पर कसा जाएगा शिकंजा

देहरादून, [राज्य ब्यूरो]: सरकार के तमाम दावों के बावजूद निजी मेडिकल कॉलेज पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) समेत एमबीबीएस पाठ्यक्रमों के लिए फीस तय करने का अधिकार छोड़ने को तैयार नहीं हैं। पीजी सीटों पर चल रहे दाखिले के दौरान निजी निजी मेडिकल कॉलेजों की ओर से खुद फीस तय किए जाने का विवाद फिर बढ़ गया है। ऐसी शिकायतें मिलने पर चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने निजी मेडिकल कॉलेजों के रवैये की शिकायत सरकार से की है। सरकार ने एक बार फिर कॉलेजों की मनमानी पर अंकुश लगाने को प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति की बैठक 16 अप्रैल को बुलाई है। समिति फीस तय किए जाने को लेकर निजी कॉलेजों के दावे को लेकर अहम फैसला ले सकती है। 

निजी मेडिकल कॉलेजों की ओर से पीजी और एमबीबीएस पाठ्यक्रमों की फीस में की गई भारी वृद्धि को लेकर सरकार सख्त रुख अपना चुकी है। इस वजह से कॉलेजों को फीस वृद्धि का फैसला वापस लेना पड़ा था, लेकिन सरकार और कॉलेजों के दावों के विपरीत पीजी सीटों पर दाखिले के दौरान फीस के मामले में फिर अजीबोगरीब हालात पैदा हो गए। निजी कॉलेजों ने दाखिला ले रहे छात्रों के समक्ष यह दोहराया कि फीस निर्धारण उनका अधिकार है। नतीजतन कुछ छात्रों ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट की शरण भी ली। उधर, चिकित्सा शिक्षा निदेशालय को भी निजी कॉलेजों के फीस वसूली को लेकर अपनाए जा रहे रवैये की शिकायतें मिली हैं। 

चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ आशुतोष सयाना ने कहा कि प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति निजी कॉलेजों को फीस के बारे में हिदायत दे चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित समिति को शुल्क निर्धारण का अधिकार है। समिति एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज को इस संबंध में नोटिस भी भेज चुकी है। निजी मेडिकल कॉलेजों की ओर से पिछली फीस को ही लागू रखने पर सहमति जताई जा चुकी है। इसके बावजूद ऐसी शिकायतें मिलने के बाद शासन को पत्र भेजकर सूचित किया गया है।

उधर, पीजी सीटों पर फीस को लेकर कॉलेजों के रुख से छात्रों को हो रही परेशानी को देखते हुए सरकार सख्त रुख अपनाने जा रही है। इस संबंध में प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति की 16 अप्रैल को बैठक बुलाई गई है। समिति के सदस्य सचिव व अपर मुख्य सचिव डॉ रणबीर सिंह ने बैठक को लेकर संबंधित पक्षों को पत्र भेजा है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक बैठक में कॉलेजों पर अंकुश लगाने को सख्ती की सिफारिश सरकार से की जा सकती है। 

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