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    Rishikesh: पानी के खाली टैंक में गिर गया था शावक, वन विभाग ने दो घंटे के रेस्क्यू के बाद मां से मिलवाया

    Updated: Mon, 01 Dec 2025 05:22 PM (GMT+05:30)

    ऋषिकेश के शिवपुरी रेंज में एक गुलदार का शावक पानी के खाली टैंक में गिर गया। वन विभाग की टीम ने तत्परता दिखाते हुए शावक को सुरक्षित बाहर निकाला। ट्रैप ...और पढ़ें

    नरेंद्रनगर वन प्रभाग की शिवपुरी रेंज के अंतर्गत पानी के टैंक में गिरा गुलदार का शावक।

    नरेंद्रनगर वन प्रभाग की शिवपुरी रेंज के अंतर्गत पानी के टैंक में गिरा गुलदार का शावक।

    HighLights

    1. गुलदार शावक टैंक में गिरा

    2. वन विभाग ने किया रेस्क्यू

    3. मां से मिलाया गया शावक

    गौरव ममगाईं, जागरण संवाददाता ऋषिकेश : बच्चे के लिए लिए मां की ममता और मां के लिए बच्चे में अपनत्व का भाव सिर्फ मानव में ही नहीं होता, बेजुबान भी इसे बखूबी समझते हैं।

    अपनों को खो देने की जो वेदना, तड़प और ममत्व इंसान को झकझोर देता है और मिलन की बेला पर वात्सल्य, स्नेह और दुलार का जो भाव प्रकट होता है, जानवर भी उस प्रक्रिया से गुजरते हैं।

    बस अंतर सिर्फ इतना है कि बेजुबान कुछ कह नहीं सकते, उसे महसूस कर सकते हैं। किस्सा एक गुलदार और उसके चार महीने के शावक से जुड़ा है।

    पानी के खाली टैंक में गिरा शावक और जंगल में उसकी मां साढ़े चार घंटे तक एक दूसरे को पाने के लिए तड़पी तो वन विभाग ने उस पीड़ा को महसूस कर दोनों का मिलन करा दिया।

    मिलन की बेला पर दोनों के लिपटने, प्यार करने के दृश्य को देख वन विभाग के कर्मचारी भी भावुक हुए बिना नहीं रह सके।

    मामला नरेंद्रनगर वन प्रभाग की शिवपुरी रेंज का है। वन क्षेत्राधिकारी विवेक जोशी ने बताया कि गुलदार का शावक के पानी के खाली टैंक में गिरा था।

    वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) ने करीब एक बजे उसे बाहर निकाल लिया। चूंकि शावक करीब चार महीने का था, ऐसे में उसकी मां को तलाशना चुनौती थी। इसके लिए ट्रैप कैमरों को खंगला गया।

    साथ ही गश्त भी जारी रखी। इस दौरान एक गुलदार क्षेत्र में चहल-कदमी करती दिखी। इससे पुष्टि हुई कि शावक इसी का है। करीब साढ़े पांच बजे क्यूआरटी सदस्यों ने शावक को गुलदार की लोकेशन से थोड़ा दूर रख दिया।

    इस पर वह तेज कदमों से मां तक पहुंच गया। शावक के गुलदार से लिपटने और मां का दुलार मिलने से यह पुष्ट हो गया कि दोनों एक दूसरे के लिए व्याकुल थे। डीएफओ दिगांथ नायक ने कहा कि यह रेस्क्यू मानव और वन विभाग का वन्यजीवों के प्रति प्रेम को दर्शाता है।

    कुछ देर होती तो गुलदार हो सकती थी खूंखार

    प्रदेश में इन दिनों भालू और गुलदार के हमले की कई घटनाओं के बीच मानव-वन्यजीव प्रेम की यह रोचक तस्वीर है। वन क्षेत्राधिकारी विवेक जोशी ने बताया कि मादा गुलदार अपने शावक को बहुत हिफाजत से रखती है।

    शावक पर किसी भी तरह के खतरे का अंदेशा होने पर उसका स्वभाव खूंखार हो जाता है। यह गुलदार भी आक्रामक हो रही थी। वह आस-पास के क्षेत्र में घूम रही थी।

    यदि शावक से मिलाने में कुछ घंटे की देरी होती तो वह खूंखार हो सकती थी। यह मानव-वन्यजीव संघर्ष का कारण बन सकता था। उन्होंने कहा कि शावक को गुलदार से मिलाने में ग्रामीणों की भूमिका भी सराहनीय रही। उन्होंने समय पर वन विभाग को सूचित किया।

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