जेनी के आरोपों पर हरक सिंह का जवाब- 'अदालत में फैसला हो चुका, अंकिता हत्याकांड से ध्यान भटका रही भाजपा'
पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने जेनी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में न्यायालय का फैसला आ चुका है।

कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत

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राज्य ब्यूरो, देहरादून। पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने जैनी प्रकरण को लेकर भाजपा और प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक दबाव में है।
जनता का ध्यान इस मामले से भटकाने के लिए सुनियोजित तरीके से जैनी प्रकरण को दोबारा उछाला गया और जैनी को देहरादून बुलाया गया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दौरे के बाद जनता में निराशा का माहौल देखने को मिला। इसके बाद जैनी प्रकरण को चर्चा में लाया गया।
सीबीआइ और न्यायालय के आदेशों की अवमानना
शनिवार को राजपुर रोड स्थित कांग्रेस भवन में पत्रकारों से बातचीत की। डॉ. रावत ने कहा कि जैनी के आरोपों की सीबीआइ जांच हो चुकी थी और यह मामला न्यायालय से 23 वर्ष पहले बंद हो गया था। ऐसे में अब इस प्रकरण को दोबारा उठाना सीबीआइ और न्यायालय के आदेशों की अवमानना है।
उन्होंने कहा कि जब यह मामला सामने आया था, तब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार थी। तत्कालीन विधायक आशा नौटियाल और विजया बड़थ्वाल भी जांच के दायरे में आई थीं।
डॉ. रावत ने कहा कि उन्होंने देहरादून के सीजीएम न्यायालय में दोनों विधायकों और जैनी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। हालांकि, तत्कालीन मुख्यमंत्री व पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के कहने पर दोनों विधायकों को माफ करते हुए उन्होंने मुकदमा वापस ले लिया था।
अब वह दोबारा मानहानि का मुकदमा लड़ेंगे। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2016 में जैनी ने उनसे मिलकर माफी भी मांगी थी। दिल्ली में मामला दर्ज होने के बाद वहां की अदालत ने भी जैनी के बयानों पर टिप्पणी की थी। उनके अनुसार, जैनी कई मामलों में अपने बयानों से पलटती रही हैं।
डॉ. रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को चुनौती देते हुए कहा कि विवाद की शुरुआत सरकार ने की है और इसका अंत हरक सिंह करेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि डीएनए जांच में कोई गड़बड़ी हुई थी तो उस समय केंद्र में भाजपा की सरकार थी।
उन्होंने मुख्यमंत्री धामी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का भी डीएनए टेस्ट कराने की मांग उठाई। उनका कहना था कि डीएनए जांच में किसी तरह की हेराफेरी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जैनी प्रकरण सामने आने के बाद उन्होंने ही डीएनए टेस्ट और सीबीआइ जांच की मांग की थी। अब धामी सरकार की ओर से दोबारा जांच के लिए एसआइटी गठित की है तो वह हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं। हालांकि, इस मामले को लेकर वह न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
उन्होंने कहा कि न्यायालय उन्हें बरी कर चुका है। इसके बाद उन्होंने जनता की अदालत में लैंसडाउन से पांच हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। उन्होंने सवाल किया कि यदि वह दोषी थे तो वर्ष 2016 में भाजपा ने उन्हें पार्टी में क्यों शामिल किया? इसके बाद वह तीन बार चुनाव जीते और विभिन्न सरकारों में मंत्री भी रहे।
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