देहरादून में छात्र गुटों का आतंक, रसूखदार हूटर लगाकर निकालते हैं 'दहशत मार्च'
देहरादून का सुद्धोवाला-भाऊवाला क्षेत्र अब अपराध का गढ़ बन गया है। छात्र गुट वर्चस्व दिखाने के लिए हूटर लगी मॉडिफाइड गाड़ियों से 'दहशत मार्च' निकालते ह ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, देहरादून। एजुकेशन हब कहे जाने वाले प्रेमनगर, सुद्धोवाला, मांडूवाला जैसे इलाके अब अपराध और गैंगवार के लिए कुख्यात हो चले हैं। देव भूमि यूनिवर्सिटी के पास भाजपा नेता रोहित नेगी की गोली मारकर हत्या के बाद दिव्यांशु हत्याकांड ने पुलिसिया इकबाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इलाके में यूपी, बिहार व अन्य जगहों के छात्रों के गुट और रसूखदारों के गैंग सक्रिय हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन गिरोहों का काम करने का तरीका बिल्कुल फिल्मी है। ये व्हाट्सएप ग्रुप पर कनेक्ट रहते हैं और गैंग का इशारा मिलते ही हमला करने निकल पड़ते हैं। अक्सर सुद्धोवाला से मांडूवाला के जंगलों के बीच गाड़ियों पर हूटर लगाकर दहशत मार्च निकालते हैं। इनमें माडिफाइड बुलेट, काली थार, स्कार्पियो और चौड़े एलाय व्हील्स वाली गाड़ियां एक साथ कान्वाय की शक्ल में निकलती हैं।
इन गाड़ियों पर वीआईपी स्टिकर, अवैध हूटर और सायरन लगे होते हैं। सुद्धोवाला से भाऊवाला के बीच यह काफिला अपनी दहशत और वर्चस्व दिखाने के लिए निकलता है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि इन्हें देखकर अन्य छात्र भी प्रभावित हो रहे हैं और फिल्मी जिंदगी जीने के शार्टकट के चक्कर में गलत रास्तों पर कदम रख रहे हैं।
सख्ती से ही काबू आए उपद्रवी, बिधौली पुलिस ने पेश की नजीर
पुलिस सूत्रों का कहना है कि पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी के पास बिधौली और पौंधा में हुए गोलीकांड के बाद पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया।
बिधौली चौकी पुलिस अब हॉस्टलों के भीतर घुसकर वेरिफिकेशन कर रही है और संदिग्ध वाहनों की तलाशी ली जा रही है। इसी सख्ती का नतीजा यह है कि बदमाशों में डर पैदा हुआ है कि पुलिस अलर्ट है, लिहाजा वे अब गाड़ी या कमरों में असलहा या नशा रखने से कतरा रहे हैं। एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि पिछले कुछ माह में विधौली पुलिस ने सैकड़ों माडिफाइड वाहन जब्त किए हैं।
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10 किमी तक न पिकेट, न बैरिकेडिंग
इसके उलट प्रेमनगर थाना क्षेत्र के केहरी गांव, सुद्धोवाला और मांडूवाला में स्थिति भयावह है। उत्तरांचल यूनिवर्सिटी से लेकर भाऊवाला तक के लगभग 11 किलोमीटर के दायरे में पुलिस की मौजूदगी शून्य है। स्थानीय लोगों की शिकायत है कि यहां न तो चीता पुलिस की पेट्रोलिंग होती है और न ही कहीं बैरिकेडिंग लगती है।
हास्टलों से छात्र नशा करके निकलते हैं और राहगीरों के साथ मारपीट की घटनाएं आम हो गई हैं। भाऊवाला चौक पर तैनात पुलिसकर्मी मुस्तैदी के बजाए साइड में बैठे नजर आते हैं, जिससे अपराध को बढ़ावा मिल रहा है। पूरे रूट पर कहीं पिकेट जांच होनी तो दूर, एक बेरीकेड भी नहीं लगती है, जिससे आपराधिक तत्व बेधड़क रफ्तार भरते हैं।
मांडूवाला-भाऊवाला में पुलिस चौकी की पुरानी मांग
झाझरा चौकी से मांडूवाला की दूरी लगभग 10 किलोमीटर है। यह पूरा इलाका घने जंगलों और सुनसान रास्तों से घिरा है, जो इसे अपराधियों के लिए मुफीद बनाता है। हाल ही में यहां एक महिला की लाश भी मिली थी। इलाके में कई बड़े कालेज, हास्टल्स और हजारों छात्र हैं। स्थानीय निवासी लंबे समय से यहां एक स्थाई पुलिस चौकी की मांग कर रहे हैं ताकि रोहित नेगी हत्याकांड और दिव्यांशु जैसी वारदात दोबारा न हो।