Jagran Forum 17 जनवरी को देहरादून में, छह सत्रों में उत्तराखंड से जुड़े अहम विषयों पर होगा मंथन
Jagran Forum देहरादून में 17 जनवरी को जागरण फोरम का आयोजन होगा, जहां उत्तराखंड के विकास पर गहन मंथन किया जाएगा। छह सत्रों में पर्यावरण, पर्यटन, अध्यात ...और पढ़ें

दैनिक जागरण 17 जनवरी को देहरादून में ‘जागरण फोरम’ का आयोजन कर रहा है।
HighLights
17 जनवरी को देहरादून में जागरण फोरम का आयोजन।
पर्यावरण, पर्यटन, अध्यात्म पर छह सत्रों में मंथन।
उपराष्ट्रपति, सीएम, सुनील शेट्टी सहित कई हस्तियां शामिल।
राज्य ब्यूरो, जागरण देहरादून। Jagran Forum अनंत काल से ऋषि-मुनियों की तपस्थली रही देवभूमि उत्तराखंड को प्रकृति का भरपूर आशीर्वाद प्राप्त है। विश्व आज जबकि आर्थिक विकास की नई परिभाषाएं खोज रहा है, तब उत्तराखंड ने अपनी जड़ों की ओर लौटकर साफ संदेश दिया है कि सशक्त उत्तराखंड का मार्ग यहां के घने जंगलों, जीवनदायिनी पवित्र नदियों और हिमालय की कंदराओं से ही गुजरेगा।
यह सांस्कृतिक पुनर्जागरण भी है, जहां पर्यावरण, पर्यटन और अध्यात्म एक-दूसरे के पूरक बनकर अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
दैनिक जागरण 17 जनवरी को राजधानी देहरादून में ‘जागरण फोरम’ का आयोजन कर रहा है, जिसमें इस त्रिवेणी को और अधिक सशक्त बनाने पर मंथन होगा। फोरम में इन विषयों के इतर राज्य के विकास से जुड़े अन्य विषयों पर विशेषज्ञ मंथन में जुटेंगे।
पर्यावरणीय दृष्टि से नजर दौड़ाएं तो 71.05 प्रतिशत वन भूभाग वाला उत्तराखंड तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक की पर्यावरणीय सेवाएं देश को दे रहा है। इसमें अकेले वनों की भागीदारी लगभग एक लाख करोड़ रुपये की है।
प्रकृति का संरक्षण यहां की परंपरा का हिस्सा है। इसको ध्यान में रखते हुए पारिस्थितिकी और आर्थिकी में समन्वय से राज्य के विकास की राह को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
उत्तराखंड देश का ऐसा राज्य है जो जीडीपी (ग्रास डोमेस्टिक प्रोडक्ट) के साथ ही जीईपी (ग्रास एन्वायरनमेंट प्रोडक्ट) भी जारी कर रहा है। ऐसे में समझा जा सकता है कि पर्यावरण संरक्षण में राज्य महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
उत्तराखंड की वादियां हमेशा से ही सैलानियों के आकर्षण का केंद्र रही हैं। साल-दर-साल सैलानियों की बढ़ती संख्या इसका उदाहरण है। पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं जुटाने के साथ ही जिम्मेदार पर्यटन की दिशा में राज्य आगे बढ़ रहा है।
ईको टूरिज्म के जरिये पर्यावरण के संरक्षण का संदेश देश और विश्व को उत्तराखंड दे रहा है। पर्यटन के विभिन्न आयामों ने राज्य को न केवल नई पहचान दी है, बल्कि यह आर्थिकी का अहम जरिया भी है।
अध्यात्म की भूमि तो देवभूमि अनंत काल से रही है। साधकों को यह भूमि लुभाती है। योग, वेलनेस, अध्यात्म की दृष्टि से बड़ी संख्या में साधक यहां पहुंचते हैं। चारधाम केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री के साथ ही हेमकुंड साहिब, कैंची धाम, जागेश्वर धाम समेत अन्य धार्मिक स्थल, देश-विदेश के श्रद्धालुओं की अगाध आस्था के केंद्र हैं। जाहिर है कि तीर्थाटन व पर्यटन राज्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं।
दैनिक जागरण की ओर से 17 जनवरी को देहरादून में होटल फेयरफील्ड बाय मैरियट में आयोजित जागरण फोरम में भी पर्यावरण, पर्यटन व अध्यात्म की त्रिवेणी में सशक्त उत्तराखंड की गंगा निकलेगी।
खबरें और भी
तीर्थाटन और पर्यटन, जेनजी का धर्म, हरित विकास संबंधी सत्रों में विषय विशेषज्ञ राज्य के विकास में इस त्रिवेणी को कैसे सशक्त बनाया जा सकता है, इस पर मंथन करेंगे। इसके साथ ही अन्य विषयों पर भी सत्र होंगे। फोरम का उद्घाटन उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन करेंगे। इसके बाद छह अन्य सत्र होंगे।
हरित विकास पर केंद्रित सत्र में प्रसिद्ध पर्यावरणविद् पद्मभूषण डा अनिल प्रकाश, आइआइटी रुड़की के प्रो रजत अग्रवाल व उत्तराखंड उद्योग संगठन के अध्यक्ष पंकज गुप्ता अपने अनुभव साझा करने के साथ ही आगे की राह दिखाएंगे। पर्यटन तीर्थाटन सत्र में राज्य के पर्यटन व संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज का मार्गदर्शन मिलेगा।
अगले सत्र माटी के संदेश में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अतिथि वक्ता होंगे। जेन-जी का धर्म सत्र में जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
उत्तराखंड बना बालीवुड का नया ठिकाना से संबंधित सत्र में सिने अभिनेता सुनील शेट्टी की मौजूदगी रहेगी। समापन सत्र रणबांंकुरों की भूमि उत्तराखंड होगा, जिसमें प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) मुख्य अतिथि होंगे।
यह भी पढ़ें- Jagran Forum में सशक्त उत्तराखंड को लेकर होगा मंथन, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 17 जनवरी को करेंगे उद्घाटन