जागरण संवादी देहरादून में 'शब्दार्थ' का विमोचन, हिंदी भाषा की उलझनें होंगी दूर
दैनिक जागरण के 'हिंदी हैं हम' अभियान के तहत देहरादून में 'शब्दार्थ' के नए संस्करण का विमोचन हुआ। यह पुस्तक हिंदी के भ्रमित करने वाले शब्दों के शुद्ध प ...और पढ़ें

देहरादून में मसूरी रोड स्थित फेयरफील्ड बाय मैरियट होटल में शनिवार को दो दिवसीय अभिव्यक्ति के उत्सव जागरण संवादी में दैनिक जागरण शब्दार्थ के नए संस्करण का लोकार्पण करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी,स्वामी मिथिलेशनंदिनी शरण, एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विवि के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह व दैनिक जागरण के प्रबंध संपादक तरुण गुप्त। जागरण
HighLights
'दैनिक जागरण' के 'हिंदी हैं हम' अभियान के तहत 'शब्दार्थ' का विमोचन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई दिग्गजों ने किया पुस्तक का विमोचन
'शब्दार्थ' हिंदी के भ्रमित करने वाले शब्दों के शुद्ध प्रयोग पर केंद्रित
जागरण संवाददाता, देहरादून। दैनिक जागरण के 'हिंदी हैं हम' अभियान के अंतर्गत आयोजित संवादी कार्यक्रम में शनिवार को हिंदी भाषा को समृद्ध और सहज बनाने वाले महत्वपूर्ण प्रकाशन 'शब्दार्थ' के नवीन संस्करण का विमोचन किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, दैनिक जागरण के प्रबंध संपादक तरुण गुप्त, अयोध्या धाम के संत मिथिलेशनंदिनी शरण और हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने संयुक्त रूप से पुस्तक का विमोचन किया।
'शब्दार्थ' हिंदी भाषा के उन शब्दों पर केंद्रित प्रकाशन है, जिनके प्रयोग, वर्तनी और अर्थ को लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति बनी रहती है। पुस्तक का उद्देश्य पाठकों, विद्यार्थियों, लेखकों, पत्रकारों और हिंदी प्रेमियों को सही भाषा प्रयोग के प्रति जागरूक करना है।
दैनिक जागरण द्वारा प्रत्येक वर्ष प्रकाशित किए जाने वाले इस विशेष संस्करण में हिंदी के दुविधापूर्ण शब्दों, उनके शुद्ध प्रयोग व प्रचलित भ्रांतियों को उदाहरणों सहित प्रस्तुत किया जाता है। इसका उद्देश्य हिंदी को अधिक शुद्ध, प्रभावी और व्यावहारिक बनाना है।
विमोचन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति और समाज की पहचान भी है। ऐसे समय में जब हिंदी का दायरा लगातार बढ़ रहा है, भाषा की शुद्धता और शब्दों के सही प्रयोग को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है।
'हिंदी हैं हम' अभियान के अंतर्गत दैनिक जागरण वर्षों से हिंदी भाषा, साहित्य और पठन-पाठन संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों और प्रकाशनों का आयोजन करता रहा है। 'शब्दार्थ' उसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण उपक्रम माना जाता है, जो हिंदी के प्रति पाठकों की समझ को और अधिक परिष्कृत बनाने का प्रयास करता है।