विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पहाड़ का सूखा मिटाकर घर-घर पहुंचा 'जल', उत्तराखंड में रंग ला रही धामी सरकार की 'जल जीवन मिशन' क्रांति

Published: Wed, 12 Aug 2026 04:37 PM (IST)

उत्तराखंड में जल जीवन मिशन ने विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद 15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों तक शुद्ध पेयजल ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. 15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को मिला शुद्ध नल जल।

  2. सभी सरकारी स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों में नल से जल सुविधा।

  3. जल स्रोतों के संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी पर विशेष ध्यान।

डिजिटल टीम, देहरादून। विषम भौगोलिक परिस्थितियों, उबड़-खाबड़ रास्तों और दुर्गम पहाड़ियों से घिरे उत्तराखंड में कभी पीने के पानी का इंतजाम करना किसी जंग जीतने जैसा होता था। कड़ाके की ठंड हो या झुलसाने वाली गर्मी, ग्रामीण महिलाओं को पानी का एक मटका भरने के लिए मीलों पैदल सफर तय करना पड़ता था। लेकिन आज देवभूमि उत्तराखंड की यह तस्वीर तेजी से बदल चुकी है। केंद्र सरकार की दूरदर्शी पहल 'जल जीवन मिशन' और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दृढ संकल्प से राज्य के कोने-कोने में 'हर घर नल से जल' पहुंच रहा है।

कठिन पर्वतीय इलाकों की परवाह किए बिना धामी सरकार ने जिस गति से जल जीवन मिशन के बुनियादी ढांचे को धरातल पर उतारा है, उसी का नतीजा है कि राज्य के 15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों में से अधिकांश को सुरक्षित और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा चुका है। 

उत्तराखंड में जल जीवन मिशन की मौजूदा स्थिति

उत्तराखंड में जल जीवन मिशन केवल पानी की पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गुणवत्ता, सतत संचालन और सामुदायिक भागीदारी का एक नया मॉडल बन चुका है। राज्य ने वाटर टेस्टिंग क्वालिटी के निर्धारित लक्ष्यों को 100 प्रतिशत पूरा कर देश में एक मिसाल कायम की है। प्रदेश के सभी सरकारी व अशासकीय स्कूलों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनबाड़ी केंद्रों को नल के जल से पूरी तरह से जोड़ दिया गया है। ग्रामीण पेयजल योजनाओं के दीर्घकालिक रखरखाव के लिए लगभग 7,800 'नल जल मित्रों' का चयन किया गया है। साथ ही, पाइपलाइनों के संचालन और रख-रखाव की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं को सौंपी गई है।
 
राज्य सरकार ने केंद्र के साथ 'जल जीवन मिशन 2.0' के तहत सुधार-आधारित एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे पानी के प्राकृतिक स्रोतों के पुनर्जीवन और डिजिटल ट्रैकिंग पर काम किया जा रहा है।

पहाड़ की जीवनशैली को आसान बनाना हमारी प्राथमिकताः सीएम धामी

राज्य में जल जीवन मिशन के प्रभाव और सरकार के संकल्प पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा-  
"उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हमारी माताओं और बहनों को पानी के लिए अत्यधिक संघर्ष करना पड़ता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के 'हर घर जल' के विजन को साकार करने के लिए हमारी सरकार ने हर चुनौती को पार करते हुए पहाड़ों की चोटी तक पाइपलाइन पहुंचाई है। हमारा लक्ष्य केवल नल लगाना नहीं, बल्कि घर-घर तक स्वच्छ, कीटाणुरहित और पर्याप्त पानी पहुंचाना है। जल स्रोतों के संरक्षण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग को भी इस मिशन से जोड़ा गया है। धामी सरकार देवभूमि के हर नागरिक को जीवन की बुनियादी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध है।

'नलों में आता साफ पानी देख भर आती हैं आंखें': ग्राउंड रिपोर्ट से लाभार्थियों की जुबानी

जल जीवन मिशन के माध्यम से पहाड़ों में आई जीवनदायिनी क्रांति का सबसे बड़ा सबूत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिक हैं।पौड़ी गढ़वाल निवासी मंगला देवी ने कहा कि पहले सुबह 4 बजे उठकर 2 किलोमीटर नीचे प्राकृतिक धारे (स्रोत) पर पानी के लिए लाइन लगानी पड़ती थी। दिन का आधा समय केवल पानी ढोने में निकल जाता था। अब जब रसोई के नल से साफ पानी आता है, तो लगता है जैसे बरसों पुराना सपना पूरा हो गया। हमारे बच्चों का स्वास्थ्य भी अब बेहतर रहता है।


पिथौरागढ़ के रमेश राम हमारे गांव में पानी का संकट इतना था कि लोग गर्मियों में घर छोड़ने को मजबूर हो जाते थे। जल जीवन मिशन के तहत जब टैंक बना और घर में नल लगा, तो पूरा गांव खुशी से झूम उठा। अब हमें न केवल पानी मिल रहा है, बल्कि पानी की जांच के लिए गांव की महिलाओं को किट भी दी गई है।