पहाड़ का सूखा मिटाकर घर-घर पहुंचा 'जल', उत्तराखंड में रंग ला रही धामी सरकार की 'जल जीवन मिशन' क्रांति
उत्तराखंड में जल जीवन मिशन ने विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद 15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों तक शुद्ध पेयजल ...और पढ़ें
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HighLights
15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को मिला शुद्ध नल जल।
सभी सरकारी स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों में नल से जल सुविधा।
जल स्रोतों के संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी पर विशेष ध्यान।
डिजिटल टीम, देहरादून। विषम भौगोलिक परिस्थितियों, उबड़-खाबड़ रास्तों और दुर्गम पहाड़ियों से घिरे उत्तराखंड में कभी पीने के पानी का इंतजाम करना किसी जंग जीतने जैसा होता था। कड़ाके की ठंड हो या झुलसाने वाली गर्मी, ग्रामीण महिलाओं को पानी का एक मटका भरने के लिए मीलों पैदल सफर तय करना पड़ता था। लेकिन आज देवभूमि उत्तराखंड की यह तस्वीर तेजी से बदल चुकी है। केंद्र सरकार की दूरदर्शी पहल 'जल जीवन मिशन' और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दृढ संकल्प से राज्य के कोने-कोने में 'हर घर नल से जल' पहुंच रहा है।
कठिन पर्वतीय इलाकों की परवाह किए बिना धामी सरकार ने जिस गति से जल जीवन मिशन के बुनियादी ढांचे को धरातल पर उतारा है, उसी का नतीजा है कि राज्य के 15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों में से अधिकांश को सुरक्षित और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा चुका है।
उत्तराखंड में जल जीवन मिशन की मौजूदा स्थिति
पहाड़ की जीवनशैली को आसान बनाना हमारी प्राथमिकताः सीएम धामी
"उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हमारी माताओं और बहनों को पानी के लिए अत्यधिक संघर्ष करना पड़ता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के 'हर घर जल' के विजन को साकार करने के लिए हमारी सरकार ने हर चुनौती को पार करते हुए पहाड़ों की चोटी तक पाइपलाइन पहुंचाई है। हमारा लक्ष्य केवल नल लगाना नहीं, बल्कि घर-घर तक स्वच्छ, कीटाणुरहित और पर्याप्त पानी पहुंचाना है। जल स्रोतों के संरक्षण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग को भी इस मिशन से जोड़ा गया है। धामी सरकार देवभूमि के हर नागरिक को जीवन की बुनियादी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध है।
