एमबीबीएस दाखिला गिरोह का भंडाफोड़, मेरठ से चल रहा था 45 लाख में सीट बेचने का खेल
एसआईटी ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों की बिक्री करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, देहरादून। सरकारी मेडिकल कालेजों की एमबीबीएस सीटों को पैसे के दम पर हासिल कराने वाले गिरोह का विशेष जांच दल (एसआइटी) ने पर्दाफाश किया है। गिरोह का नेटवर्क मेरठ से संचालित हो रहा था और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे की एक सीट का 45 लाख रुपये में सौदा किया जा रहा था।
तीन अभ्यर्थियों को दाखिला दिलाने के नाम पर गिरोह ने उनके स्वजन से 20-20 लाख रुपये एडवांस के रूप में वसूल भी लिए थे। यानी तीन सीटों के लिए तय 1.35 करोड़ रुपये के सौदे में 60 लाख रुपये पहले ही गिरोह के पास पहुंच चुके थे।
एसआइटी ने गिरोह के दो सदस्यों रुपेश पंडित निवासी पूर्णिया, बिहार (हाल निवासी ब्रह्मपुरी, मेरठ) और अरविंद कुमार निवासी लक्सर हरिद्वार को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि रुपेश मेरठ में मिकोडो पाठशाला नाम से एजुकेशन कंसलटेंसी चला रहा था।
इसी कंसलटेंसी की आड़ में एमबीबीएस समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिले कराने का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। अब जांच की सबसे अहम कड़ी यही है कि 45 लाख रुपये में सरकारी मेडिकल सीट दिलाने का दावा करने वाला यह नेटवर्क केवल इन तीन दाखिलों तक सीमित था या इसके पीछे और बड़ा गिरोह सक्रिय है।
फर्जी प्रमाणपत्र बना सीट हथियाने की थी तैयारी
गिरोह ने सरकारी मेडिकल कालेज में दाखिले के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे को निशाना बनाया। तीन अभ्यर्थियों के नाम से उत्तराखंड में 'अपुणी सरकार' पोर्टल पर कूटरचित दस्तावेज लगाकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आनलाइन आवेदन किए गए। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए गए तो पूरे खेल की परतें खुलनी शुरू हुईं।
एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल के अनुसार इसी मामले में रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। एसपी देहात जया बलोनी के नेतृत्व में गठित एसआइटी ने जांच आगे बढ़ाई तो दाखिले के नाम पर चल रहे नेटवर्क का पता चला। इसके बाद मंगलवार को दोनों आरोपितों को गिरफ्तार किया गया।
एक संपर्क से तीन दाखिलों का सौदा
जांच में सामने आया कि अरविंद कुमार ने अपनी बेटी परी के एमबीबीएस दाखिले के लिए रुपेश से संपर्क किया था। इसके बाद उसने दो परिचितों के बच्चों का दाखिला कराने की जिम्मेदारी भी उसे दे दी।
रुपेश ने अपने साथियों के साथ मिलकर तीनों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से सरकारी मेडिकल कालेज में दाखिला दिलाने का भरोसा दिया। हर सीट के लिए 45 लाख रुपये तय हुए।
एसआइटी की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि इस नेटवर्क में रुपेश और अरविंद के अलावा और कौन लोग शामिल हैं और क्या इससे पहले भी इसी तरीके से मेडिकल दाखिलों का खेल किया गया है।
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पांच साल से कंसलटेंसी की आड़ में नेटवर्क
एसएसपी के अनुसार रुपेश पिछले करीब पांच वर्षों से एजुकेशन कंसलटेंसी का काम कर रहा था। मिकोडो पाठशाला के माध्यम से निजी विश्वविद्यालयों और विदेशों में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए और बीकाम आदि पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए कमीशन पर काम करता था। इसी नेटवर्क के जरिये सरकारी मेडिकल कालेजों में दाखिले का रास्ता निकालने की कोशिश की गई।
